सचिव सोनमणि बोरा पता कर रहे हैं कम सिंचाई क्यों?

जल संसाधन विभाग के सचिव श्री सोनमणि बोरा की अभिनव पहल, प्रदेश भर में सिंचाई में कमी का कारण जानने सर्वे प्रारंभ
जिले में 7 सहायक अभियंता एवं 24 उप अभियंताओं की ड्यूटी लगी

        गरियाबंद, 16 मई 2018 -  जल संसाधन विभाग के सचिव, श्री सोनमणि बोरा के निर्देश पर प्रदेश भर में सिंचाई योजनाओं की सिंचाई क्षमता में लगातार हो रही कमी के वास्तविक कारणों का पता लगाने हेतु एक अभिनव पहल किया गया है। विभाग के पूर्व निर्मित जलाशयों, व्यपवर्तन योजनाओं, एनीकट, स्टापडेम आदि सिंचाई संरचनाओं में जल भराव की कमी, रख-रखाव एवं संधारण कार्यो की कमी तथा नहरों एवं पक्की संरचनाओं के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण विगत कई वर्षो से क्षमता के अनुरूप सिंचाई नही हो पा रही है, जिससे प्रदेश में अभिकल्पित सिंचाई का रकबा क्रमशः घटता चला जा रहा है। इस तथ्य को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश में पहली बार विभागीय सचिव श्री सोनमणि बोरा के निर्देश पर विभाग द्वारा योजनाओं के भौतिक सर्वेक्षण कर अभिकल्पित सिंचाई की प्राप्ति हेतु पांच चरणों की एक विस्तृत कार्य योजना बनाई गई है। कार्य योजना के प्रथम चरण में विभाग के समस्त कार्यपालन अभियंताओं, सहायक अभियंताओं एवं उपअभियंताओं को 7 से 10 मई की अवधि में मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रदेश में चार स्थानों क्रमशः जगदलपुर, रायपुर, बिलासपुर, एवं अंबिकापुर में विस्तृत दिशा निर्देश एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया। विभाग के समस्त उपअभियंताओं एवं सहायक अभियंताओं को पांच-पांच योजनाओं के भौतिक सर्वेक्षण कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। द्वितीय चरण में दिनांक 14 से 26 मई के मध्य विभागीय अधिकारियों द्वारा आबंटित योजनाओं का भौतिक सर्वेक्षण किया जायेगा तथा प्रत्येक योजना के शीर्ष कार्य के पांच तथा नहरों के पांच फोटोग्राफ लेकर निर्धारित प्रपत्र में योजना से संबंधित जानकारी एवं सिंचाई में कमी के कारणों का उल्लेख करते हुए योजना के पुर्नव्यवस्थापन हेतु आवश्यक लागत राशि अंकित कर विशेष रूप से बनाये गये विभागीय मोबाईल एप में जानकारी अपलोड किया गया जायेगा। मैदानी अधिकारियेां द्वारा मोबाईल एप में अपलोड की गई जानकारी के विस्तृत विश्लेषण हेतु एक केन्द्रीय मानिटरिंग यूनिट गठित की गई है।

योजनों की गे्रडिंग एवं पुर्नव्यस्थापन कार्य

सिंचाई योजनाओं के भौतिक सर्वेक्षण में प्राप्त जानकारी की समीक्षा के आधार पर कार्य योजना के तृतीय चरण में 14 से 31 मई तक सिंचाई संरचनाओं को चार ग्रेड में विभाजित किया जायेगा। ऐसी योजनाऍ जिनकी वास्तविक सिंचाई 80 प्रतिशत से अधिक है उसे ’’ए’’ ग्रेड, 60 प्रतिशत से 80 प्रतिशत को ’’बी’’ ग्रेड, 40 प्रतिशत से 60 प्रतिशत को ’’सी’’ ग्रेड तथा 0 से 40 प्रतिशत को ’’डी’’ ग्रेड में विभाजित किया जायेगा। ’’डी’’ ग्रेड वाली योजनाओं के मरम्मत तथा जीर्णोद्वार कार्य को प्रथम वरीयता दी जायेगी। उन संरचनाओं को भी चिन्हित कर प्राथमिकता क्रम में रखा जायेगा, जहां जलाशय, एनीकट आदि में सिल्ट हटाकर जल भराव क्षमता में वृद्धि की जा सकती है।

                सिंचाई योजनाअेां के नवीनीकरण/पुर्नव्यवस्थापन हेतु आवश्यक मरम्मत एवं संधारण कार्यो की तकनीकी स्वीकृति आदि की प्रक्रिया उपरांत इन कार्यो को विभागीय अनुरक्षण मद, मनरेगा, बी.आर.जी.एफ., डी.एम.एफ. आदि के माध्यम से स्वीकृति प्रदान कर कार्य कराया जायेगा। इस हेतु कार्यपालन अभियंताओं को कलेक्टर एवं जिला पंचायत सी.ई.ओ. से संपर्क कर योजना के पुर्नव्यवस्थापन कार्य की स्वीकृति हेतु पहल करने विशेष रूप से निर्देशित किया गया है। लघु सिंचाई योजनाओं को जून 2018 पुर्नव्यवस्थापन कर, कृषकों को अधिक से अधिक सिंचाई प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।

                जल संसाधन संभाग, गरियाबंद के कार्यपालन अभियंता श्री पी.के. आनंद द्वारा जानकारी दी गई है कि गरियाबंद जिले में कुल 49 जलाशयों 30 व्यपवर्तन योजनाओं, 06 एनीकट, निरंक स्टापडेम एवं 01 लिफ्ट सिंचाई योजनाऍ है, जिनसे कुल 74871 हे. रूपांकित सिंचाई के विरूद्ध 43963 हे. क्षेत्र मंे वास्तविक सिंचाई हो रही है। इन योजनाओं के भौतिक सर्वेक्षण हेतु 07 सहायक अभियंताओं एवं 24 उपअभियंताओं की ड्यूटी लगाई गई है। योजनाओं के भौतिक सर्वे में प्राप्त जानकारी के आधार पर सिंचाई कमी के कारणों के दूर करने योजनावार, ग्रेडिंग के आधार पर पुनव्र्यवस्थापन, मरम्मत एवं संधारण कार्य मनरेगा, डी.एम.एफ. विभागीय मद से राशि प्राप्त कर सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित अवधि में अभिकल्पित सिंचाई प्राप्ति का हर संभव प्रयास किया जायेगा।

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