शादीयाफ्ता इश्‍क की दास्‍तां - पढ़ी आपने ?

हास्‍य भी गंभीर हो सकता है यह जादू आशा श्रीवास्‍तव की इस व्‍यंग्‍य रचना में आप खुद पढ़े।

‘शादीयाफ्ता’ शब्‍द सुनते ही सजायाफ्ता शब्‍द दिमाग का दरवाजा खटखटाने लगता है। शादी के बारे में आमराय तो यही है कि यह वो बला है जिसका काटा उफ् तक नहीं करता। शादी के आपनी ही पत्‍नी से इश्‍क की कोई दास्‍तां भी हो सकती है कहने वाला कोई सिरफिरा ही हो सकता है.....

आशा श्रीवास्तव वयोवृद्ध महिला साहित्यकार हैं जिनकी हर विषय पर पकड़ होने के अलावा हास्य व्यंग्य में खास दखल है।  मूलतः अंग्रेजी के शिक्षण में जिंदगी बीताई हुई आशा श्रीवास्तव के व्यंग्य साहित्य एक खास बौद्धिक श्रेणी के होतें हैं जिनकी पहचान बननी अभी बाकी है। 

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