राज्यपाल ने रामकृष्ण आदर्श हाईस्कूल का किया भूमिपूजन

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल महामहिम श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन आश्रम बच्चों की पढ़ाई हेतु राज्यपाल कोष से 2 लाख रूपये देने की घोषणा, जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के रामकृष्ण मिशन आश्रम के आदिवासी बच्चों से मिलें। इस दौरान उन्होने 50 लाख की लागत से बनने वाले, रामकृष्ण विद्या मंदिर आदर्श आवासीय हाईस्कूल स्तरीय विद्यालय भवन का भूमि पूजन किया। आदिवासी बच्चों द्वारा पीटी, नृत्य व व्यायाम का प्रदर्शन किया गया।

इस दौरान अपने उद्बोधन में राज्यपाल ने कहा कि देश का भविष्य है जो कि आगे जाकर देष के विकास की नींव खड़ी करते हैं। उन्होने कहा कि इस आश्रम के बच्चे भी क्षेत्र के सभी लोगों की आषा के केन्द्र हैं। उन्होने आग्रह किया कि बच्चे अच्छी पढ़ाई लिखाई कर आगे बढ़े लेकिन अपनी समृध्द कला संस्कृति और संस्कार को भी बनाएं रखें। राज्यपाल श्री नरसिम्हन ने कहा कि रामकृष्ण आश्रम बगीचा द्वारा प्रदेश के इस पिछड़े क्षेत्र के आदिवासी भाई-बहनों और उनके बच्चों के उत्थान के लिये व्यापक प्रयास किये जा रहे हैं। यह विद्यालय अब शिक्षा का महत्वपूर्ण केन्द्र बन चुका है। पहाड़ी कोरवा एवं अन्य आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिये आश्रम द्वारा किया जा रहा प्रयास सराहनीय है।

राज्यपाल ने की मंदिर में पूजा अर्चना- राज्यपाल श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन आज प्रात: लगभग 10.30 बजे जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के रामकृष्ण मिशन आश्रम पहुंचे। इस दौरान उन्होने वहां मंदिर में पूजा अर्चना की तत्पष्चात उन्होने सरस्वती देवी केी प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन किया।

आकर्शक आदिवासी नृत्य व व्यायाम प्रदर्शन-आश्रम के बच्चों ने राज्यपाल के समक्ष आकर्षक नृत्य, गीत व व्यायाम का प्रदर्शन किया। आदिवासी नृतक दल द्वारा पारम्परिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के जरिये नृत्य का प्रदर्शन कर मनमोहक छटा बिखेरी। राज्यपाल ने कहा कि आश्रम के माध्यम से बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ खेलकूद, पीटी, योगाभ्यास, संगीत प्रषिक्षण, कम्प्यूटर प्रशिक्षण, कृषि एवं बागवानी प्रशिक्षण दिया जाना निश्चित रूप से बच्चों के सर्वागीण विकास का एक महत्वपूर्ण कदम है।

राज्यपाल कोश से 2 लाख रूपये देने की घोषणा-राज्यपाल श्री नरसिम्हन आश्रम में पढ़ रहे आवासीय बच्चों के कौशल को देखकर अत्यंत अभिभूत हुए। दो आदिवासी बच्चों द्वारा अंग्रेजीव हिन्दी भाषा में दिये गये भाषण ने महामहिम को भावविभोर कर दिया और आश्रम की षिक्षा की उन्होने जमकर सराहना की। उन्होने कहा कि क्षेत्र के आदिवासी बच्चों को तो आश्रम के माध्यम से 10वीं तक की षिक्षा अच्छी तरह मिल जाती है लेकिन अधिकतर यह देखा गया है कि आदिवासी बच्चे दसवीं तक पढ़कर ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। उन्होने आदिवासी बच्चों को आगे पढ़ते रहने की बात कही व आश्रम के 10वीं कक्षा में प्रथम, द्वितीय व तृतीय आने वाले आदिवासी बच्चों के आगे की पढ़ाई के लिये राज्यपाल कोष से 2 लाख रूपये देने की घोषणा भी की।

महामहिम राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि आदिवासियों ने आज भी अपनी प्राचीन संस्कृति और परम्पराओं को सहेजकर बरकरार रखा है। उन्होने कहा कि, यहां के सरल सीधे-सादे और शांतिपूर्ण जीवन की जितनी भी तारीफ की जाए, कम है। उन्होने बच्चों से आव्हान किया कि पढ़ाई लिखाई करने के बाद, वे समाज में व्याप्त मद्यपान, अंधविश्‍वास जैसी बुराईयों को दूर करने की दिषा में आगे आए, व समाज की अच्छाईयों को भी अपनाएं।

इस दौरान स्वामी ज्योतिर्मयान्द, कलेक्टर डी.डी. सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री अकबर राम कोर्राम, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री धुव, डी.एफ.ओ. श्री यादव, एस.डी.एम.बगीचा श्री मंडावी, कुनकुरी एस.डी.एम. सहित अन्य अधिकारी व गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।

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