नई इस्पात नीति का स्वागत

राज्य के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी केन्द्र की नई इस्पात नीति: डॉ. रमन सिंह

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री और केन्द्रीय इस्पात मंत्री को दिया धन्यवाद

रायपुर, 04 मई 2017 - छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने केन्द्र सरकार द्वारा घोषित नई इस्पात नीति का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि केन्द्र की यह नयी स्टील नीति देश और राज्य के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय इस्पात मंत्री चौधरी वीरेन्द्र सिंह को बधाई दी है। 

मुख्यमंत्री ने आज यहां जारी बधाई संदेश में कहा है कि छत्तीसगढ़ में रायपुर, नया रायपुर और बिलासपुर को स्मार्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। सम्पूर्ण राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न योजनाओं के तहत कम लागत के सरकारी मकान निर्माण के प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं। तीन नये रेल कॉरीडोर सहित रेल नेटवर्क और विद्युत नेटवर्क का भी विस्तार हो रहा है। इसे देखते हुए राज्य में स्टील की जरूरत काफी बढ़ गयी है। केन्द्र सरकार की नयी स्टील नीति छत्तीसगढ़ के इस जरूरत को पूर्ण करने में सहायक होगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ देश का प्रमुख लौह अयस्क और स्टील उत्पादक राज्य है। वर्ष 2030 तक छत्तीसगढ़ में स्टील उत्पादन की क्षमता 200 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्य है। राज्य में अगले पांच-छह साल में रेल मार्ग दोगुने होने की प्रबल संभावना है।इससे हमारे यहां लौह अयस्क की उत्पादन लागत में कमी आएगी, जिसका लाभ स्टील सेक्टर के उद्योगों को मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय केबिनेट द्वारा नयी स्टील नीति कल तीन मई को अनुमोदित कर दी गयी। नयी नीति में भारत की वार्षिक स्टील उत्पादन क्षमता को 100  मिलियन टन से बढ़ाकर वर्ष 2030-31 तक 300 मिलियन टन करने का लक्ष्य है। इन नीति के अनुसार आटो मोबाईल और हाऊसिंग सेक्टर सहित अधोसंरचना विकास के अन्य क्षेत्रों में स्टील के इस्तेमाल को अधिक से अधिक बढ़ावा देने और प्रतिव्यक्ति स्टील के उपयोग की मात्रा 60 किलो से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 160 किलो करने की भी मंशा प्रकट की गयी है। इसके लिए केन्द्रीय इस्पात मंत्रालय द्वारा लौह अयस्क, कोकिंग कोल और नॉन कोकिंग कोल और प्राकृतिक गैस आदि की उपलब्धता को प्रतिस्पर्धी दरों पर सुनिश्चित की जाएगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय निवेश आकर्षित किया है। केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) और भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) द्वारा बस्तर क्षेत्र में संयुक्त उपक्रम कम्पनी बनाकर तीन मिलियन टन क्षमता का अल्ट्रा मेगा स्टील प्लांट का निर्माण तेजी से किया जा रहा है, जिसमें अगले छह महीने के भीतर आंशिक रूप से उत्पादन शुरू होने की संभावना है। एनएमडीसी द्वारा प्रस्तावित 1095 करोड़ की लागत वाले लौह अयस्क बेनिफिकेशन प्रोजेक्ट को भी इस हफ्ते में पर्यावरण स्वीकृति मिल चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने स्टील सेक्टर को अंतर्राष्ट्रीय उथल-पुथल से बचाने के लिए विशेष पहल करते हुए छोटे इस्पात उद्योगों को वर्ष 2016 में विशेष पैकेज दिया है । इसके फलस्वरूप इन छोटे उद्योगों में स्टील उत्पादन की लागत में प्रति मीटरिक टन लगभग 1200 रूपए की कमी आई है। इससे इन उद्योगों में उत्साह का संचार हुआ है। 

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