दुर्ग में बोरिंग बैन, फसल अवशेष प्रबंधन, बाल मेला और बाल दिवस

श्रीमती रमशीला साहू दुर्ग में आयोजित बाल मेला में होंगी शामिल

13 नवम्बर 2017 - महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती रमशीला साहू कल दोपहर एक बजे 14 नवम्बर को बाल दिवस के अवसर पर दुर्ग के रविशंकर स्टेडियम में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मुख्य आतिथ्य में आयोजित बाल मेला में शामिल होंगी। श्रीमती साहू इस दौरान प्रयास एवं अन्य संस्थाओं के बच्चों से मुलाकात के कार्यक्रम में भी शामिल होंगी। श्रीमती साहू शाम 06 बजे अपने 32 बंगला स्थ्ति निवास से राजधानी रायपुर के लिए रवाना होंगी ।

दुर्ग : नलकूप खनन पर 30 जून तक प्रतिबंध : सक्षम अधिकारी के अनुमति बिना नहीं कर सकेंगे बोर-खनन

कलेक्टर श्री उमेश कुमार अग्रवाल ने जिले में अल्प वर्षा और सूखे की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए 30 जून 2018 तक की अवधि के लिए नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ पेयजल परीक्षण अधिनियम-1986 क्रमांक 3 की धारा-3 के अंतर्गत यह आदेश जारी करते हुए जिले को जल अभाव ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। उन्होंने आदेश जारी करते हुए कहा है कि सक्षम अधिकारी की पूर्वानुमति के बिना कोई भी नया नलकूप, पेयजल के अलावा किसी अन्य प्रयोजन के लिए खनन नहीं किया जा सकेगा। शासकीय एजेंसी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पूरे जिले में तथा नगरीय निकाय अपने सीमा क्षेत्रों में पेयजल के लिए बोर-खनन कर सकेगा।
लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बोर-खनन हेतु अनुमति देने के लिए नगरीय निकाय क्षेत्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्राधिकृत अधिकारी की निुयक्ति की गई है। नगर निगम भिलाई के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में बोर-खनन के लिए संयुक्त कलेक्टर श्री बी.बी. पंचभाई से अनुमति लेना होगा। इसी तरह राजस्व अनुविभाग क्षेत्र दुर्ग के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व दुर्ग, धमधा क्षेत्र के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व धमधा एवं पाटन अनुविभाग क्षेत्र के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पाटन से अनुमति लेना होगा।
किसी व्यक्ति या एजेंसी के द्वारा बिना अनुमति के बोर-खनन करने या उल्लेखित प्रावधानों का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। उक्त प्राधिकृत अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में पेयजल परीक्षण अधिनियम का पालन सुनिश्चित करने के साथ ही बोर-खनन के लिए अनुमति देंगे।

दुर्ग : फसल अवशेष के सुरक्षित प्रबंधन पर किसानों को मिलेगी एक हजार रूपए एकड़ की सहायता

प्रदूषण से बचने और खेत की उर्वरा शक्ति बनाए रखने राज्य सरकार की विशेष योजना

छत्तीसगढ़ में अब फसल कटने के बाद खेतों में बचे अवशेषों को ना जला कर उनके सुरक्षित प्रबंधन के लिए राज्य सरकार किसानों को एक हजार रूपए प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता देगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा खेतों में फसलों के कटने के बाद बचे अवशेषों को जलाने पर लगे प्रतिबंध के बाद सरकार ने यह व्यवस्था की है। राज्य शासन द्वारा इस संबंध में नया रायपुर स्थित मंत्रालय, कृषि विभाग से अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। सरकार अब किसानों को फसल अवशेषों के सुरक्षित प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत एक हजार रूपए प्रति एकड़ की सहायता देगी। इस योजना के अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार और किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने के लिए प्रेरित करने के संबंध में कार्यवाही करने के निर्देश कलेक्टर श्री उमेश कुमार अग्रवाल ने जिला कार्यालय से भी जारी किए हैं। योजना के क्रियान्वयन के लिए कृषि विभाग के जिला स्तरीय कार्यालय को नोडल विभाग के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा खेतों में फसलों के कटने के बाद बचे अवशेषों को जलाने पर पिछले वर्ष से प्रतिबंध लगा दिया गया है। खेतों में बचे फसल अवशेषों को जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को संज्ञान में लेते हुए ट्रीब्यूनल द्वारा यह आदेश जारी किया गया है। खेतों में फसल अवशेषों के समुचित निपटान के लिए होने वाले अतिरिक्त खर्चे के कारण किसान खेतों में ही आग लगा देते हैं। ऐसे में फैलने वाले प्रदूषण और भूमि की उर्वरा शक्ति को घटने से रोकने के लिए राज्य शासन ने किसानों को सहायता की व्यवस्था की है। किसानों को यह आर्थिक सहायता खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों के फसल अवशेषों प्रबंधन पर भी मिलेगी।
    उप संचालक कृषि श्री जी.एस. धुर्वे ने आज यहां बताया कि खेतों में पड़े फसल अवशेषों जैसे धान के पैरा को खेत में फैलाने के लिए 100 रूपए प्रति एकड़, डिस्क हैरो से जोताई के लिए 400 रूपए प्रति एकड़, माइक्रोआर्गेनिज्म ट्रायकोडर्मा के लिए 120 रूपए प्रति एकड़, सिंचाई के लिए 100 रूपए प्रति एकड़, कम्पोस्ट खाद के लिए 80 रूपए प्रति एकड़ और रोटावेटर चलाकर तैयार करने के लिए 200 रूपए प्रति एकड़ की सहायता दी जाएगी। श्री धुर्वे ने बताया कि किसानों द्वारा फसल कटने के बाद फसल अवशेषों और धान के पैरा को नहीं जलाकर उसका सुरक्षित प्रबंधन करने के काम की निगरानी और सत्यापन मोबाईल एप्प के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए की जाने वाली पूरी प्रक्रिया की फोटो लेकर संबंधित एप्प पर जियों टेगिंग के माध्यम से एप्प पर अपलोड की जाएंगी। इस आधार पर सत्यापन प्रमाणित होकर राशि सीधे के किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।
जारी किए गए निर्देशों के अनुसार इस योजना से किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर (5 एकड़) तक रकबे के लिए सहायता दी जाएगी। सभी जाति वर्ग के और लघु, सीमांत, बड़े किसानों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। रेगहा, पट्टा या लीज पर खेती करने वाले किसानों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। लघु-सीमांत, अनुसूचित जाति-जनजाति और महिला किसानों को प्राथमिकता के आधार पर योजना का लाभ दिया जाएगा। उप संचालक कृषि ने बताया कि योजना के तहत फसल अवशेषों के समुचित निपटान के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त करने किसानों को 15 दिसम्बर तक ग्राम सभाओं में अनुमोदन कराकर कृषि विभाग में पंजीयन कराना होगा। पंजीयन के समय खेती से संबंधित जरूरी दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी भी देनी होगी।  
इस संबंध में कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि फसल अवशेष को जलाने से खेत की 6 इंच परत जिसमें विभिन्न प्रकार के लाभदायक सूक्ष्मजीव जैसे राइजोबियम, एजेक्टोबैक्टर, नील हरित काई के साथ ही मित्र कीट के अण्डें भी नष्ट हो जाते हैं एवं भूमि में पाये जाने वाले ह्यूमस, जिसका प्रमुख कार्य पौधों की वृद्धि पर विशेष योगदान होता है, वो भी जल कर नष्ट हो जाते हैं। जिससे आगामी फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी अवशेष जलाने से नष्ट होती है। फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन जैसे फसल कटाई उपरांत अवशेषों को इकट्ठा कर कम्पोस्ट गड्ढे या वर्मी कम्पोस्ट टांके में डालकर कम्पोस्ट बनाया जा सकता है अथवा खेत में ही पड़े रहने देने के बाद जीरों सीड कर फर्टिलाइजर ड्रील से बोनी कर अवशेष को सड़ने हेतु छोड़ा जा सकता है। इस प्रकार खेत में अवशेष छोडने से नमी संरक्षण, खरपतवार नियंत्रण एवं बीज के सही अंकुरण के लिए मलचिंग के काम आ जाता है।

दुर्ग में 14 नवम्बर को बाल मेला आयोजन की तैयारी पूरी : मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह नौनिहालों को देंगे आशीर्वाद

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री केदार कश्यप सुबह पहुंचे दुर्ग, लिया तैयारियों का जायजा

दुर्ग, 13 नवम्बर 2017 - बाल दिवस 14 नवम्बर को दुर्ग में जिला स्तरीय बाल मेले में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी शामिल होंगे। रविशंकर स्टेडियम में आयोजित होेने वाले इस मेले में जिले के विभिन्न शासकीय एवं निजी स्कूलों के लगभग 10 हजार विद्यार्थी-पालक शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह मेले में विद्यार्थियों से संवाद और मेधावी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन भी करेंगे। कार्यक्रम की तैयारी का जायजा लेने स्कूली शिक्षा मंत्री श्री केदार कश्यप आज सुबह दुर्ग पहंुचे थे। उन्होंने स्वयं आयोजक स्थल पहुंचकर कार्यक्रम की रूप-रेखा और तैयारियों की विस्तार से जानकारी ली। कलेक्टर श्री उमेश कुमार अग्रवाल ने उन्हें कार्यक्रम के किए जा रहे तैयारी और व्यवस्था के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। मंत्री श्री कश्यप ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश एवं सुझाव दिए हैं। इस अवसर पर भारत स्काउट एवं गाइड के स्टेट कमिश्नर श्री गजेन्द्र यादव, कलेक्टर श्री उमेश कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक श्री अमरेश मिश्र, अपर कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, शिक्षा विभाग के अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। बाल दिवस के अवसर पर आयोजित विद्यालयों कार्यक्रम में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी विद्यालय में अध्ययन कर रहे विद्यार्थी विशेष रूप से सम्मिलित होंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना, चिरायु योजना से लेकर अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाओं से लाभान्वित होने वाले विद्यार्थी भी इस बाल मेले में शिरकत करेंगे। विद्यार्थियों के साथ ही उनके पालक कार्यक्रम में भाग लेंगे। कार्यक्रम के आयोजन की तैयारी
मुख्यमंत्री बच्चों सेे करेंगे संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह 14 नवम्बर को दोपहर 1 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे। मेला स्थल पर डॉ. रमन सिंह बच्चों के साथ लगभग 1 घंटे रहेंगे। इस दौरान वे बाल मेला में उपस्थित बच्चों एवं पालकों से सीधे संवाद करेंगे। साथ ही बच्चों को सम्बोधित कर उनका उत्साहवर्धन करेंगे। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को मिली सुविधा, प्रयास विद्यालय में पढ़कर प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुए विद्यार्थियों, छात्रावास और आश्रमों में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री भविष्य निर्माण के लिए जरूरी चर्चा करेंगे और उनका अनुभव भी सुनेंगे। विद्यार्थियों के अनुभवों से योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए योजना तैयार करने में भी सहायता ली जाएगी।  
बच्चों को प्रदर्शनी में मिलेगी स्कूलों में होने वाली गतिविधियों की जानकारी
बाल मेला कार्यक्रम के अवसर पर आयोजन स्थल पर विभिन्न विद्यालयों के द्वारा प्रदर्शनी लगाया जाएगा। प्रदर्शनी के माध्यम से बच्चों में छुपी प्रतिभा और उनके व्यक्तित्व विकास के साथ ही अन्य गतिविधियों में परम्परागत करने का प्रयास किया जाएगा। प्रदर्शनी के माध्यम से बच्चों को शैक्षणिक गतिविधियां, सांस्कृतिक विकास, खेलकुद, व्यक्तित्व विकास की बारीकियांे से रू-ब-रू कराया जाएगा। जिले के मेधावी विद्यार्थियों को इस दौरान प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया जाएगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की होगी मनमोहक प्रस्तुति
इस अवसर पर स्कूली छात्र-छात्राओं के द्वारा लोक संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम की मनमोहक प्रस्तुति दी जाएगी। बच्चों के द्वारा एकल व समूह में गीत-संगीत की प्रस्तुति होगी। बच्चों के बीच विभिन्न प्रकार की हुई प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभाओं का सम्मान किया जाएगा। बच्चों के बीच पेंटिंग, खेल प्रतियोगिता व अन्य गतिविधियों के विजेता का सम्मान किया जाएगा।

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