डॉ. विमल पाठक का निधन

नहीं रहे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विमल पाठक : मुख्यमंत्री ने गहरा दुःख व्यक्त किया

रायपुर 05 मई 2017 - छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विमल कुमार पाठक के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। डॉ. सिंह ने आज यहां जारी शोक संदेश में कहा है कि डॉ. विमल कुमार पाठक हिन्दी और छत्तीसगढ़ी भाषाओं के लोकप्रिय कवि और गंभीर निबंध लेखक थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन साहित्य सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। डॉ. रमन सिंह ने कहा-स्वर्गीय डॉ. विमल कुमार पाठक ने साहित्य और विशेष रूप से कविताओं के जरिए छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए जनमत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से छत्तीसगढ़ के साहित्य जगत के एक सुनहरे युग का अंत हो गया है। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय डॉ. पाठक के शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। ज्ञातव्य है कि भिलाई नगर निवासी डॉ. विमल कुमार पाठक का बीती रात वहां खुर्सीपार स्थित अपने निवास में निधन हो गया। वह लगभग 80 वर्ष के थे। आकाशवाणी रायपुर केन्द्र के प्रथम उद्घोषक रहे स्वर्गीय डॉ. विमल पाठक छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक के बड़े भाई थे। स्वर्गीय डॉ. विमल पाठक का पहला छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह ’गवंई के गीत’ वर्ष 1960 में प्रकाशित हुआ। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन को गति देने के लिए वर्ष 1978-79 में प्रदेश के अनेक वरिष्ठ और कनिष्ठ कवियों की रचनाओं पर आधारित पुस्तक ’छत्तीसगढ़ जागरण गीत’ का सम्पादन और प्रकाशन किया था।

रायपुर में जब वर्ष 1963 में छत्तीसगढ़ के प्रथम आकाशवाणी केन्द्र की स्थापना हुई, उस समय स्वर्गीय डॉ. विमल पाठक ’सुगंधी भईया’ के नाम से और स्वर्गीय श्री केशरी प्रसाद वाजपेयी ’बरसाती भईया’ के नाम से किसानों के लिए चौपाल कार्यक्रम प्रस्तुत करते थे। स्वर्गीय डॉ. विमल पाठक की कुछ वर्ष पहले ’छत्तीसगढ़ के हीरे’ नाम से एक पुस्तक प्रकाशित हुई थी, जिसमें उन्होंने राज्य की अनेक भूली-बिसरी विभूतियों की जीवनगाथा लिखी थी। डॉ. विमल पाठक को वर्ष 1983 में ’छत्तीसगढ़ी साहित्य का ऐतिहासिक अध्ययन’ विषय पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से पी-एच.डी. की उपाधि मिली थी। भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत रहने के दौरान उन्होंने वहां वार्षिक छत्तीसगढ़ी लोक महोत्सव की भी शुरूआत की, जिसके माध्यम से पंडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई सहित कई प्रतिभावान कलाकारों को राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आगे आने का मौका मिला। 

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