जल सुरक्षा वाला ०८ अप्रेल १८ का रमण गोठ गर्मी के पहले बचाव की बात

अंधड़ और बारिश से रायपुर ठंडा है पर रमण गोठ याने डॉ. रमन सिंह के गोठ में आने वाली धरती की तपन उनके आवाज में साफ महसूस किया छत्तीसगढ़ ने औए सारे लोग जुट गए गर्म गर्मी से निपटने

मजदूरों ने सुना ‘रमन के गोठ’
रायपुर, 8 अप्रैल 2018 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ’ को आज यहां गांधी मैदान स्थित चावड़ी में मजदूरों ने सुना। रमन के गोठ सुनने वालों में सर्वश्री हेमलाल-ग्राम खोरपा, संजय-पचपेड़ीनाका, प्रेमशंकर-भटगांव माना, जुगनू -सुंदरनगर रायपुर और पन्नालाल-पचपेड़ीनाका सहित अन्य श्रमिक शामिल थे। इन्होंने रमन के गोठ सुनकर बताया कि उन्हें पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों में पानी देने, पानी बचाने और अपने विवादों संबंधी मामलों को लोक अदालतों में जाकर तुरंत निराकरण कराने के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने यह भी बताया कि वे नियमित रूप से रमन के गोठ सुनते आ रहे हैं।

इस गर्मी बूंद गिने, बूंद-बूंद पानी बचाओ छत्तीसगढ़ का आव्हान, स्वयं मुख्यमंत्री आगे आये, तपती धरती माता पर खास रमनगोठ

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में जल संकट की स्थिति से निपटने के लिए जल संसाधनों के विकास और जल संरक्षण के लिए अपनी सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का उल्लेख करने के साथ-साथ सभी नागरिकों से बूंद-बूंद पानी बचाने का भी आव्हान किया है। उन्होंने आज सवेरे आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता ’रमन के गोठ’ की 32वीं कड़ी में कहा-छत्तीसगढ़ को प्रकृति ने जो सौगातें दी हैं, उनमें यहां के सघन वनों के साथ पर्याप्त बारिश का भी प्रमुख स्थान है। राज्य के गांवों और शहरों में लोगों ने इस बार भी मुख्यमंत्री के रेडियो प्रसारण को काफी उत्साह के साथ सुना। कई स्थानों पर महिलाओं ने आंगन में सब्जी काटते हुए तो कहीं मेहनतकश मजदूर पेड़ों की छांव में थकान मिटाते हुए इस कार्यक्रम को सुनते देखे गए।
    डॉ. रमन सिंह ने अपनी रेडियो वार्ता में कहा-दुनिया जिस तरह से बदल रही है, उन परिस्थितियों में पर्यावरण का भारी नुकसान हुआ है। इसके फलस्वरूप ’ग्लोबल वार्मिंग’ और ’जलवायु परिवर्तन’ पूरी दुनिया के लिए चिंता के मुख्य विषय बन गए हैं। उन्होंने कहा-विभिन्न कारणों से बरसात की मात्रा प्रभावित हुई है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में हर साल औसतन 1200 मिलीमीटर बारिश होती है। हमारे यहां मुख्य रूप से अतीत में जल संसाधनों का समुचित विकास नहीं हो पाने के कारण वर्तमान में भीषण गर्मी के दिनों में जल संकट की स्थिति बनती है।
जल संसाधन विकास हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता
प्रदेश की सिंचाई क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत
 डॉ. रमन सिंह ने जल संसाधनों के विकास को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इसके लिए अल्पकालीन और दीर्घकालीन, दोनों तरह के उपाय किए गए हैं। उन्होंने श्रोताओं से कहा-आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में निर्मित सिंचाई क्षमता सिर्फ 13 लाख 28 हजार हेक्टेयर थी, जो आज बढ़कर 20 लाख 61 हजार हेक्टेयर हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी अवधि में प्रदेश की सिंचाई क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए अभियान लक्ष्य भागीरथी शुरू करने के फलस्वरूप हमारे यहां सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण करने की रफ्तार दोगुनी हो गई है। राज्य शासन द्वारा उपलब्ध सतही जल से वर्ष 2028 तक 32 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता प्राप्त करने और शत-प्रतिशत सिंचाई क्षमता निर्मित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा-प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 21 जुलाई 2017 को मुख्यमंत्रियों की बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार की अभिनव पहल ’अभियान लक्ष्य भागीरथी’ की प्रशंसा करते हुए अन्य राज्यों को भी इसे एक रोल मॉडल के रूप में अपनाने की सलाह दी थी।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में छत्तीसगढ़ की तीन परियोजनाएं शामिल
    डॉ. सिंह ने कहा-यह हमारा सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत भारत सरकार द्वारा देश में चयनित 99 प्रमुख योजनाओं में छत्तीसगढ़ की तीन योजनाएं-रायगढ़ जिले की केलो सिंचाई परियोजना, बिलासपुर जिले की खारंग सिंचाई परियोजना और मुंगेली जिले की मनियारी सिंचाई परियोजना को अगले दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है। इससे 42 हजार 625 हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता निर्मित होगी। मुख्यमंत्री ने इस सहयोग के लिए छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री को साधुवाद दिया। डॉ. रमन सिंह ने कहा-प्रधानमंत्री ने ’वन ड्रॉप- मोर क्रॉप’ (हर बूंद से अधिक फसल) का आव्हान किया है, जिसके अनुसार बूंद-बूंद पानी का सदुपयोग किया जाना है। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि राज्य में 47 सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं का निर्माण शुरू किया गया है।
छत्तीसगढ़ में नदियों को जोड़ने के लिए छह लिंक प्रोजेक्ट
    मुख्यमंत्री ने कहा- हमने दूरगामी योजना के तहत नदियों को जोड़ने की परियोजनाओं पर भी विचार किया है। उन्होंने छह ऐसी लिंक परियोजनाओं के बारे में बताया। डॉ. सिंह ने कहा-इसके अंतर्गत महानदी-तांदुला, पैरी-महानदी, रेहर-अटेंग, अहिरन-खारंग, हसदेव-केवई और कोड़ार-नैनी नाला लिंक परियोजनाएं शामिल हैं। नदियों में हमेशा जल भराव रहे, उनके किनारे वृक्षारोपण हो और जल संरक्षण तथा संवर्धन का अभियान चलाया जाए। इसके लिए तकनीकी मार्गदर्शन हेतु ’ईशा फाउंडेशन’ के साथ एमओयू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा-इसके अलावा हमने वर्षा जल को एकत्रित करने के लिए अनेक छोटे-छोटे उपायों को बढ़ावा दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर गांव का पानी गांव में और खेत का पानी खेत में रोकने में मदद मिल सके।
नाला बंधान कार्यों में सरगुजा पहले, कोरिया दूसरे और कोरबा तीसरे स्थान पर
    उन्होंने यह भी कहा-विगत वर्ष नाला बंधान के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजना का बेहतर इस्तेमाल किया गया। इसके फलस्वरूप पूरे प्रदेश में दस हजार नाला बंधान के कार्य हुए, जिनमें 948 कार्य पूर्ण करके सरगुजा जिला अव्वल रहा। कोरिया जिला 901 नाले बांधकर दूसरे स्थान पर, राजनांदगांव जिला 742 नाले बांधकर तीसरे स्थान पर और कोरबा जिला 738 नाले बांधकर चौथे स्थान पर रहा। महासमुन्द जिला 682 नाले बांधकर पांचवे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने अन्य जिलों को भी इस काम में तेजी लाने की सलाह दी और कहा-इस वर्ष भी नाला बंधान का काम अच्छी तरह से किया जाए। उन्होंने यह भी कहा-अनेक स्थानों पर किसान आपसी सहयोग से नाला बंधान का काम करते हैं। ऐसे किसानों, उनके समूहों और अन्य लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनका सम्मान भी किया जाना चाहिए।

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