'छत्तीसगढ़ विकास' का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा

देश और दुनिया के विकास का रास्ता गांवों और खेतों से होकर निकलता है। किसानों की सम्पन्नता से ही बाजारों में चहल-पहल हो सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में आगे चल कर भारतीय अर्थ व्यवस्था ही टिकाऊ होगी, क्योकि यह कृषि पर आधारित है। डॉ. रमन सिंह ने आज सवेरे यहां अपने निवास पर राज्य योजना मंडल द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'छत्तीसगढ़ विकास' का विमोचन करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। योजना मंडल के उपाध्यक्ष डॉ. दीनानाथ तिवारी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. लक्ष्मण चतुर्वेदी और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. चितरंजन हाजरा तथा रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री श्याम बैस सहित अनेक प्रबुध्द नागरिक और वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।

डॉ. रमन सिंह ने पुस्तक की विषय वस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विगत लगभग पांच वर्ष में कृषि ऋणों पर ब्याज दरों में लगातार कमी, एक लाख से अधिक नए सिंचाई पम्प कनेक्शन, किसान क्रेडिट कार्ड और समर्थन मूल्य नीति के तहत धान खरीदी के बेहतर प्रबंधन के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ ने कृषि उत्पादन और खेती पर आधारित अर्थ व्यवस्था के विकास में एक लम्बी छलांग लगाई है। राज्य में स्प्रिंकलर, ड्रिप और स्प्रेयर जैसे उपकरणों की मांग काफी बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस व्यापक सोच और महान सपने के साथ छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था, वह सोच और वह सपना अब साकार होता नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछड़ेपन और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए ही तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड राज्यों का गठन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ भले ही पिछड़ेपन से कुपोषित आठ वर्ष का एक नन्हा बच्चा है, लेकिन विगत पौने पांच वर्ष में राज्य शासन द्वारा प्रारंभ और संचालित योजनाओं के जरिए यह विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस नए राज्य में अब तक हुए विकास की तुलना पंजाब और हरियाणा जैसे विकसित और पुराने राज्यों के साथ नहीं की जानी चाहिए, फिर भी छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों की तुलना देश के किसी भी राज्य की पंचवर्षीय योजनाओं की उपलब्धियों से की जा सकती है। छत्तीसगढ़ में विगत चार वर्ष में एक लाख से अधिक किसानों को सिंचाई पम्प कनेक्शन मिलना अपने आप में एक बड़ा चमत्कार है। इसे मिला कर नए राज्य में अब तक एक लाख 99 हजार से अधिक सिंचाई पम्पों का विद्युतीकरण किया जा चुका है। गरीबों को दिए जाने वाले एक बत्ती कनेक्शनों की संख्या छह लाख 30 हजार से बढ़ कर नौ लाख 86 हजार तक पहुंच गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबों की कमजोर क्रय शक्ति को ध्यान में रख कर उन्हें सहारा देने के उद्देश्य से सिर्फ तीन रूपए किलो में 35 किलो चावल और सिर्फ 25 पैसे किलो में नमक देने की योजना संचालित की जा रही है। किसानों को सिर्फ तीन प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण देने का निर्णय लेकर उनके लिए ऋण की पात्रता बढ़ा कर तीन लाख रूपए कर दी गई है। राज्य के आठ लाख 52 हजार किसानों को विकास क्रेडिट कार्ड दिए गए हैं। राज्य में पहली बार सहकारी संस्थाओं का चुनाव कराया गया है। सहकारिता के क्षेत्र में वैद्यनाथन कमेटी की अनुशंसाओं को लागू किया गया है। जनता की सुविधा के लिए प्रत्येक दो ग्राम पंचायतों पर एक पटवारी हलके का गठन किया गया है। राज्य में धान का उत्पादन 50 लाख टन से बढ़ कर 61 लाख 30 हजार टन हो गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य अथवा देश के विकास के लिए सबसे बड़ी ताकत मानव संसाधन की होती है। छत्तीसगढ़ ने प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में उत्साह जनक सफलता हासिल की है। बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल संभागों में दो नए विश्वविद्यालयों की स्थापना के बाद राज्य में अब शासकीय विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ कर दस तक पहुंच गई है। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला है। राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग कॉलेजों में कुल सीटों की क्षमता केवल दो हजार 750 थी, जो इस वर्ष 2008-09 में बढ़ कर ग्यारह हजार 580 हो गई है। पालीटेक्निक संस्थाओं में भी इस दौरान सीटों की संख्या एक हजार 495 से बढ़ कर दो हजार 385 हो गई है। तकनीकी शिक्षा के विकास के लिए बजट प्रावधान 240 करोड़ रूपए से बढ़ कर दो हजार 593 करोड़ रूपए हो गया है। वर्ष 2001 में जहां स्कूलों में एक लाख 08 हजार शिक्षक थे, वहीं वर्ष 2007 में यह संख्या एक लाख 30 हजार से अधिक हो गई है। प्राथमिक शालाओं की संख्या 29 हजार 434 से बढ़ कर वर्ष 2007-08 में 37 हजार तक पहुंच गई है। इस दौरान मिडिल स्कूलों की संख्या छह हजार 152 से बढ़ कर पन्द्रह हजार 038 तक, हाई स्कूलों की संख्या 1103 से बढ़ कर 1987 और हायर सेकेण्डरी स्कूलों की संख्या 1278 से बढ़ कर 2100 तक पहुंच गई है। राज्य में चार वर्ष पहले गृह निर्माण मंडल का अस्तित्व नहीं था, जबकि इसका गठन होने के बाद प्रदेश भर में आवास निर्माण की गतिविधियों में काफी तेजी आई है और दो हजार करोड़ रूपए से भी अधिक राशि के कार्य हो रहे हैं। आवास निर्माण में बड़ी संख्या में राज मिस्त्रियों की जरूरत होती है। इसके लिए कुशल श्रमिक तैयार करने के उद्देश्य से राज मिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।

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