छत्तीसगढ़ की वन मड़ई की महक दुनिया में जाएगी

अनुसूचित जाति-जनजातियों के लिए छत्तीसगढ़ जितनी योजनाएं किसी भी राज्य में नहीं: डॉ. रमन सिंह : मुख्यमंत्री ने किया वन मड़ई का शुभारंभ, तेन्दूपत्ता श्रमिकों के बच्चों की मेडिकल, इंजीनियरिंग पढ़ाई का पूरा खर्च देने की घोषणा रायपुर, 13 अगस्त 2017 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा-मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं, आप देश के किसी भी राज्य में चले जाइए, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए जितनी योजनाएं छत्तीसगढ़ में चल रही हैं, उतनी किसी भी राज्य में नहीं। मुख्यमंत्री ने आज अपरान्ह यहां विज्ञान महाविद्यालय के मैदान में आयोजित वन मड़ई का शुभारंभ करते हुए यह बात कही। उन्होंने तेंदूपत्ता श्रमिक परिवारों के बच्चों की मेडिकल, आईआईटी और इंजीनियरिंग कॉलेजों की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार की ओर से देने की भी घोषणा की। उन्होंने कार्यक्रम में वनोपज श्रमिकों की कल्याण योजनाओं से संबंधित विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया। डॉ. सिंह ने लघु वनोपज समितियों और वन प्रबंधन समितियों को लाभांश राशि के चेक भी वितरित किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल ने की। डॉ. रमन सिंह ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा - राज्य के वनवासी बहुल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं का तेजी से विकास हो रहा है। वह दिन दूर नहीं जब शिक्षा सुविधाओं का लाभ उठाकर इन क्षेत्रों के बच्चे भी डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस जैसे प्रशासनिक अधिकारी बनेंगे और छत्तीसगढ़ सहित देश की सेवा करेंगे। वन मड़ई का आयोजन डॉ. रमन सिंह की सरकार के कल 14 अगस्त को 5000 दिन पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों की लघु वनोपज सहकारी समितियों और वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों ने हजारों की संख्या में हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि की आसंदी से उन्हें सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा - आप सबके सहयोग और समर्थन से प्रदेश सरकार ने अपने 5000 दिनों का सफर सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। राज्य तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। बहुत जल्द छत्तीसगढ़ देश के तीन सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में आ जाएगा। डॉ. सिंह ने कहा - छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों के अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के किसानों को सिंचाई के लिए निःशुल्क बिजली दी जा रही है। उनके खेतों में सोलर पम्पों की स्थापना के लिए सौर सुजला योजना शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा - वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा की बेहतर व्यवस्था की गई है। बस्तर और सरगुजा में मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। नये कॉलेजों और नये आईटीआई की भी स्थापना की गई है। प्रयास आवासीय विद्यालयों के जरिए इन क्षेत्रों के बच्चों को मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ-साथ आईआईटी जैसे संस्थानों में प्रवेश मिलने लगा है। प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी पांच संभागीय मुख्यालयों में चल रहे प्रयास आवासीय विद्यालयों में सीटों की संख्या 1700 से बढ़ाकर तीन हजार करने का निर्णय लिया है। नईदिल्ली में छत्तीसगढ़ सरकार ने यूथ हॉस्टल की स्थापना की है। राज्य के आदिवासी क्षेत्रों की तीन युवाओं का चयन संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के जरिए प्रशासनिक पदों के लिए हुआ है। शिक्षा की गुणवत्ता पर भी छत्तीसगढ़ सरकार पूरा ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री ने तेन्दूपत्ता, कुल्लू, खैर, हर्रा, साल बीज, लाख, इमली, आदि लघु वनोपजों की खरीदी के लिए वनोपज समितियों में 10 हजार से अधिक संग्रहण केन्द्रों के जरिए की गई व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा - हम सबका यह प्रयास है कि इनकी अच्छी कीमत हमारे वनवासी भाई-बहनों को मिले। विगत 5000 दिनों में तेन्दूपत्ते का पारिश्रमिक 450 रूपए से बढ़ाकर 1800 रूपए कर दिया गया है। डॉ. सिंह ने चरण पादुका योजना का जिक्र करते हुए कहा - जब मैंने इस योजना की शुरूआत की तो कुछ लोगों ने इसका मजाक उड़ाया और कहा कि वनवासी लोग जूते नहीं पहनते, लेकिन राज्य सरकार ने इन श्रमिकों की समस्या को महसूस किया। वे गरीबी के कारण मजबूरी में जूते नहीं पहन पाते थे। इससे तेन्दूपत्ता संग्रहण के दौरान उनके पांवों में कांटे चुभ जाते थे फलस्वरूप उनके पैरों में जख्म हो जाता था। प्रदेश के तेरह लाख तेन्दूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका योजना का लाभ मिल रहा है। इसका बड़ा असर हुआ है। अब उनके पैरों में जख्म होने की घटनाएं कम हो गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा - प्रदेश भर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए लगभग 59 लाख गरीब परिवारों को मात्र एक रूपए किलो में चावल दिया जा रहा है। वन क्षेत्रों के परिवारों को भी इसका लाभ मिल रहा है। तेन्दूपत्ता और अन्य वनोपज संग्रहणकर्ता परिवारों के लिए सामूहिक बीमा योजना और उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजना भी चलाई जा रही है। वन मड़ई को अध्यक्षीय आसंदी से विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल ने और विशेष अतिथि की आसंदी से वनमंत्री श्री महेश गागड़ा ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम में श्रम और खेल मंत्री श्री भईयालाल राजवाड़े, गृह, जेल और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री रामसेवक पैकरा, लोक निर्माण, आवास और पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत, महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती रमशीला साहू , रायपुर के लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस और राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री भरत साय, वनौषधि बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री श्रीनिवास मद्दी, वनौषधि बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री जे.पी. शर्मा, लघु वनोपज सहकारी संघ के उपाध्यक्ष श्री टीकम टांडिया विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। अनेक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
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