सरकार को फिक्र है खेती-किसानी-बागवानी और छत्तीसगढ़ के किसानों की: खरीफ फसलों की बोनी पूरी

साल2017 की अच्छी बारिश के बीच खेतिहर अपने काम में लग गए हैं और छत्तीसगढ़ की सरकार भी उनके पीछे खेती की फिक्र में अपनी जरुरी सलाह जारी करना प्रारंभ कर चुकी है. खेती किसानी के लिए सबसे अच्छा उपाय है सरकारी सलाहों पर लगातार ध्यान दिया जाए और अमल किया जाए. आइए देखते डॉक्टर रमन सिंह  की नीतियों के अनुरूप सरकारी तंत्र आपको कृषि सलाह में क्या बता रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में लगभग 28 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोनी पूरी
रायपुर, 18 जुलाई 2017 - छत्तीसगढ़ में चालू खरीफ मौसम के दौरान अभी तक लगभग 28 लाख हेक्टेयर में अनाज, दलहनी और तिलहनी फसलों की बोनी किसानों ने पूरी कर ली है। राज्य सरकार के कृषि विभाग ने इस साल 48 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोआई करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य के लगभग 60 प्रतिशत रकबे में बोनी पूरी हो चुकी है। 

कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज यहां बताया कि प्रदेश में खरीफ मौसम में धान की सबसे ज्यादा खेती होती है। इस साल 36 लाख 50 हजार हेक्टेयर में धान बोने की तैयारी की गई है। वर्तमान में 23 लाख 30 हजार हेक्टेयर में धान की बोआई पूर्ण हो गई है। खरीफ मौसम में धान की खुर्रा, लईचोपी और रोपा पद्धति से बोनी की जाती है। श्री अग्रवाल ने बताया कि एक लाख 38 हजार हेक्टेयर में मक्के, 10 लाख हेक्टेयर में ज्वार, कोदो, कुटकी और अन्य लघु धान्य फसलों की बोनी भी हो गई है। इस प्रकार कुल 24 लाख 75 हजार हेक्टेयर में अनाज फसलें बोयी गई है।

कृषि मंत्री ने बताया कि एक लाख से अधिक रकबे में दलहनी तथा एक लाख 50 हजार से अधिक रकबे में तिलहनी फसलें बोयी जा चुकी है। इस साल तीन लाख 83 हजार हेक्टेयर में दलहनी तथा तीन लाख 12 हजार हेक्टेयर में तिलहनी फसलों की बोआई करने का कार्यक्रम बनाया गया है। श्री अग्रवाल ने बताया कि लगभग 60 हजार हेक्टेयर में साग-सब्जी लगाई जा चुकी है।

बारिश में मवेशियों को कृमिनाशक दवा पिलाने की सलाह
बारिश के मौसम में मवेशियों को कृमि नाशक दवाई अवश्य खिलानी चाहिए। पशुपालन विभाग के अधिकारियों और पशु विशेषज्ञों ने मवेशियों को कृमि नाशक अल्बेन्डाजोल या फेनबेन्डाजोल दवाई खिलाने की सलाह पशु पालकों को दी है। वयस्क पशुओं को 3 ग्राम का एक बोलस (बड़ी गोली) तथा छोटे पशुओं को डेढ़ ग्राम का एक बोलस सुबह खाली पेट में खिलाना चाहिए। 
पशु विशेषज्ञों ने आज यहां जारी बुलेटिन में बताया कि पशुओं को फूट रॉट (पांव में गलन) से बचाने के लिए पशु बाड़े के फर्श को सूखा रखना चाहिए। दुधारू पशुओं को यदि पतला दस्त हो तो पहले कृमिनाशक दवा दी जानी चाहिए। उसके बाद एन.टी.जोल एवं रूमेन एफ.एस. बोलस दो-दो सुबह-शाम दो दिनों तक खिलाया जाना चाहिए। नवजात बछड़ों को जन्म के 15 दिन के बाद से ही पिपराजिन साल्ट 30 मिलीलीटर तीन माह तक हर माह दिया जाना चाहिए। इसे पिलाने से बछड़ों के पेट की कृमि खत्म हो जाती है। पशु विशेषज्ञों ने बताया कि भैंसवंशीय बछड़ों में गोल कृमि की शिकायत ज्यादा होती है। पिपराजिन साल्ट से पेट की गोल कृमि पूरी समाप्त हो जाती है। 
उन्होंने मुर्गी पालन करने वाले किसानों को मुर्गी घरों में पर्याप्त रोशनी के प्रबंध करने का सुझाव दिया है। बरसात के दिनों में सामान्यत बादल छाये रहने के कारण सूर्य प्रकाश की अवधि कम रहती है। इसलिए मुर्गी घरों में पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है।

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