आठवें रमन के गोठ का मूल पाठ

Chief Minister's 8th Radio Talk Show

‘रमन के गोठ’ : आकाशवाणी से प्रसारित होने वाला विशेेष कार्यक्रम (दिनांक 10 अप्रैल, 2016, समय प्रातः 10.45 से 11.00 बजे तक)

उद्घोषक की ओर से
श्रोताओं नमस्कार!

आकाशवाणी के महत्वपूर्ण प्रसारण ‘‘रमन के गोठ’’ कार्यक्रम में आपका हार्दिक स्वागत है, अभिनंदन है।
    ’’रमन के गोठ’’ कार्यक्रम की 8वीं कड़ी के प्रसारण के अवसर पर आज आकाशवाणी के स्टुडियो में हमारे राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह पुनः उपस्थित हैं। मुख्यमंत्री जी, हम आपका हार्दिक स्वागत करते हैं।
मुख्यमंत्री की ओर से

    धन्यवाद! कार्यक्रम सुनईया मोर सब्बो संगी, जहुंरिया, सियान, दाई, बहिनी मन ला डा. रमन के जोहार!
उद्घोषक की ओर से

   श्रोताओं ! आज फिर से हमारे प्रदेश की ढाई करोड़ जनता मुख्यमंत्री जी से सीधे संवाद के माध्यम से रूबरू हो रही हैं।
   हमें पिछली कड़ी को सुनने वाले श्रोताओं से सैकड़ों पत्र प्राप्त हुए हैं, जिसमें श्रोताओं ने बहुत ही रोचक तरीके से कार्यक्रम के संबंध में अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं।
   अभी तक हमारे मुख्यमंत्री जी की ख्याति “चाउंर वाले बाबा” के रूप में थी और अब श्रोताओं ने उन्हें एक नए शब्द से नवाजा है।
    मयंक रेेडियो श्रोता संघ, बदनारा-नवागढ़ बेमेतरा के अनेक श्रोताओं ने अपनी भावना इस प्रकार व्यक्त की है कि-रेडियो हमर महाप्रसाद आय। रेडियो नई होतिस त कईसे सुनतेन ज्ञान विज्ञान के गोठ। किसान के गोठ। बड़े-बड़े डॉक्टर, वैज्ञानिक के गोठ। गांव शहर के हाल चाल। खेती किसानी के गोठ। मोदी के मन के बात अऊ रमन के गोठ।
   और श्रोताओं इस प्रकार अब डा. रमन सिंह ‘‘रेडियो वाले बाबा’’ बन गए हैं।
   अनेक श्रोता, जिसमें नवागढ़ के नारायण प्रसाद वर्मा, गरियाबंद के योगेश्वर साहू, राजनांदगावं छुरिया के झग्गरराम साहू, खमतराई के हीरा साहू व कबीरधाम पिपरिया के कमलकांत गुप्ता ने यह भी कहा है कि जिस प्रकार डॉ. रमन रोचक प्रस्तुति के माध्यम से जनहितकारी उपयोगी जानकारी से प्रदेश की जनता को अवगत कराते हैं, उससे कार्यक्रम की उपयोगिता बहुत ज्यादा बढ़ गई है और आकाशवाणी के माध्यम से इस उत्कृष्ट प्रस्तुति का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इस प्रस्तुति के माध्यम से हर गली, चौपाल, कस्बों और मोहल्लों में बैठा हुआ श्रोता अपने आप को मुख्यमंत्री केे अत्यंत करीब महसूस कर रहा है।
    श्रोताओं! हम एक और बात आपसे साझा करना चाहेंगे, कि बड़ी संख्या में श्रोताओं ने इस बात पर खुशी जाहिर की है, कि विशेष पिछड़ी जन-जातियों के लिए निःशुल्क रेडियो वितरण शासन द्वारा किए जाने की योजना है।
   आईये! ‘‘रमन के गोठ’’ के कार्यक्रम में आगे बढ़ते हैं, सुनते हैं, अपने लोकप्रिय जन-जन के नेता, प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह जी को।
मुख्यमंत्री जी द्वारा-छत्तीसगढ़ी भाषा में
    ऐ कार्यक्रम ल आप मन अतेक ध्यान अऊ मया लगा के सुनथौ, ऐखर अंदाजा मोला आप मन के जो चिट्ठी आथे, ओला पढ़े से होथे।
    बेमेतरा जिला के बदनारा-नवागढ़ कटई ले नारायण प्रसाद वर्मा, चंद्रकांत वर्मा, शारदा वर्मा, सीमा, बबली वर्मा, ये सब्बो झन मयंक रेडियो श्रोता संघ के हवै। एमन एक ठन बहुत सुंदर चिट्ठी भेजे हें, जेमा सुंदर कविता लिखे हंे। गांव गली के बारे में जऊन कविता बनाए हे, ओला मैं पढ़ के सुनावथौं।
गांव ले कर मया दुलार संगी, गांव चल, देख खेत खार संगी।
देख आमा बगईचा के शोभा, धान के खेत कोठार संगी।
तैं गरीबी ल अऊ अषिक्षा ल, खेदेबर गांव म हमर आ संगी।
गांव म हे दया मया अब्बड़, चार दिन तो इहां गुजार संगी।
गांव के अन्न खात हे दुनिया, अन्नदाता ल झन बिसार संगी।
गांव हर आत्मा ये भारत के, गांव ह लगही तिहार संगी।

    ये बात बिलकुल सही है वर्मा जी। गांवे म हमर भारत देश के आत्मा ह बसे हे। आपके ऐ बात ह 16 आना सही आय।नवरात्रि एवं जंवारा
     दू दिन पहिली गांव-गांव में नवरात अऊ जंवारा के तिहार शुरू होगे हे। हमर छŸाीसगढ़ में “शक्ति पूजा” के परम्परा पुराना समय से चलत आवथे। देवी के भक्ति में गांव-गांव में जसगीत गाए के परम्परा हे। अऊ जसगीत के माध्यम से हम सब देवी मां के भक्ति अऊ आराधना करे के साथ अपन मनोकामना ल पूरा करे बर माता के आषीर्वाद बर बिनती करथन।
  चाहे डोंगरगढ़ में बम्बलेश्वरी हो, रतनपुर के महामाया, दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी, चंद्रपुर के चंद्रहासिनी हो, धमतरी के बिलईमाता, चाहे नारायणपुर के मावली माता हो, झलमला के गंगा मईया, ऐ सब मं देवी हा साक्षात् बिराजे हे, जेखर कृपा हमर छŸाीसगढ़वासी ऊपर बने हुए हे।
    नवरात्रि के आखरी दिन 15 तारीख के रामनवमीं परही। जऊन दिन मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम के जनम होयेे रहिस। जेखर ननिहाल हमर छŸाीसगढ़ हर आए, तेखरो मैं हं आप सब ल बधाई देवत हववं।
       मुख्यमंत्री जी द्वारा- हिन्दी भाषा में
       अंबेडकर जयंती/महावीर जयंती
 

    श्रोताओं ! सबसे पहले मैं हमारे देश के संविधान निर्माता ‘‘डॉ. भीमराव अंबेडकर जी’’ का नमन करता हूॅ, और 14 अप्रैल को उनकी जयंती के अवसर पर राज्य के समस्त नागरिको को हार्दिक बधाई और शुभकामना देता हॅॅॅू।
    समूचे राष्ट्र में डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 125 वीं जयंती मनायी जा रही है।
    उनकी जयंती के इस पावन अवसर पर मैं उनके मूलमंत्र ‘‘षिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित रहो‘‘ को याद करता हूॅ, जो आज भी प्रासंगिक है।
    हमने अच्छा जीवन जी लिया, लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए हम क्या कर पायंे ? यह अफसोस हमें न हो, इसके लिए आज हमे डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर के मार्गदर्शी सिद्धांतो को लेकर ही चलना होगा, तभी हम उनके सपनो का भारत बना सकेंगें।
    साथियों ! इसी के साथ अप्रैल महीने की 19 तारीख को ‘‘भगवान महावीर‘‘ की जयंती मनायी जायेगी। मैं राज्य के समस्त जैन भाई-बहनो को ‘‘महावीर जयंती’’ की हार्दिक बधाई और शुभकामनाए देता हूॅ।
     उद्घोषक द्वारा
 

मुख्यमंत्री जी आपने पारंपरिक पर्वों की चर्चा और राज्यवासियों को उसकी बधाई देकर आज के कार्यक्रम की शुरूआत की। शासन की नीति और योजनाओं के संबंध में आप राज्य की जनता से क्या कहना चाहेंगे, क्या जानकारी देना चाहेंगे?
 

मुख्यमंत्री जी द्वारा- हिन्दी भाषा में
 

ग्राम उदय से भारत उदय अभियान:
राष्ट्रीय पंचायत दिवस

  साथियों ! इस माह, जैसा मैंने बताया, 14 अप्रैल को हमारे संविधान निर्माता डा. भीमराव अंबेडकर की जयंती है, तथा उसी दिन से राज्य में “ग्राम उदय से भारत उदय” अभियान प्रारंभ होने जा रहा है, जो 24 अप्रैल तक चलेगा।
    मैं आपको बताना चाहता हूं कि भारतीय संविधान का 73वां संशोधन, जिसके द्वारा त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिया गया था, उसके उपलक्ष्य में 24 अप्रैल को ‘‘राष्ट्रीय पंचायत दिवस’’ के रूप में मनाया जाता है।
  साथियों ! 14 अप्रैल से 24 अप्रैल 2016 के मध्य तीन चरणों में होने वाले इस अभियान में प्रथम चरण में तीन दिनों तक अर्थात 14 से 16 अप्रैल 2016 को ‘‘सामाजिक समरसता’’  के कार्यक्रम आयोजित होंगे।
    दूसरे चरण में चार दिनों तक 17 से 20 अपै्रल 2016 तक ‘‘ग्राम किसान सभा’’ के आयोजन होंगे।
ऽ    तीसरे चरण में 21 से 24 अप्रैल 2016 के मध्य सभी पंचायतों में ‘‘विषेष ग्राम सभाओं’’ का आयोजन होगा।
ऽ    24 अपै्रल 2016 को ‘‘राष्ट्रीय पंचायत दिवस’’ के दिन प्रधानमंत्री स्वयं दूरसंचार के माध्यम से आप सभी से अपने विचार साझा करेंगे।
ऽ    मैं आप सभी से अनुरोध करता हूॅ, कि ग्राम सभा के पश्चात अपने गांव में एक स्थान पर एकत्रित होकर प्रधानमंत्री जी केे प्रसारण को जरूर सुने। प्रसारण का समय आपको पृथक से सूचित किया जायेगा।
स्कूल षिक्षा: सामाजिक अंकेक्षण
ऽ    साथियों ! आपको याद होगा मैंने अपने पिछले प्रसारण में स्कूल जाने वाले बच्चों के संबंध में शाला प्रवेश उत्सव, सभी विषय के किताबो का निःशुल्क वितरण के संबंध में आपसे विस्तारपूर्वक चर्चा की थी।
ऽ    01 अप्रैल से स्कूल प्रारंभ हो चुका है। आपको याद होगा कि पिछले साल स्कूल शिक्षा की गुणवŸाा बढ़ाने के लिए “षिक्षा गुणवŸाा अभियान” हम सबने प्रारंभ किया था।
ऽ    इस बार अभियान के दूसरे वर्ष हम पुनः शालाओं के ‘‘सामाजिक अंकेक्षण’’ से इसकी शुरूआत करेंगे, जो ‘‘डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती’’ के दिन 14 अप्रैल से प्रारंभ होगा।
ऽ    हमारी कक्षाओं में क्या चल रहा है, शिक्षक रोज पढ़ा रहे हैं कि नहीं, बच्चे समझ रहे हैं या नहीं, उनमें अच्छी आदतों और मूल्यों का विकास हो रहा है या नहीं, ये सब ‘‘सामाजिक अंकेक्षण’’ के दौरान आपको देखना है।
ऽ    इस बार हमने सभी शालाओं में माताओं को भी शिक्षा में सक्रिय सहयोग के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया है। माताएं यदि अपने बच्चों से उनके रोज की पढ़ाई के बारे में जानकारी लेने लगें, शिक्षकों से नियमित जानकारी लेती रहें व उन्हें अच्छा पढ़ाने के लिए प्रेरित करने लगे तथा शाला प्रबंध समिति को शाला के बेहतर प्रबंधन के लिए दबाव डालना शुरू कर सकें तो, वह दिन दूर नहीं, जब हम अपने राज्य में शिक्षा की गुणवŸाा में आशातीत सुधार कर पाएंगे।
ऽ    इसके साथ ही एक चीज मैं बताना चाहूंगा, 01 अप्रैल से स्कूल हमने प्रारंभ किया है। सभी किताब कॉपी बच्चों को उपलब्ध हो गयी है, और येे पहली बार हो रहा है कि हमने समय पर न केवल किताब दिया बल्कि इस किताब का उपयोग गर्मियों की छुट्टी में जब उनके माता-पिता या बड़े भाई यदि उस किताब का उपयोग कर बच्चों को पढ़ाये तो आने वाले समय में स्कूल जाने की उनकी झिझक समाप्त होगी।
ऽ    हमने रायपुर में इसकी शुरूआत की और रायपुर मंे पहिली कक्षा में प्रवेश करने वाले एक पांच साल के लड़के और एक पांच साल की लड़की ने न केवल गीत गाया बल्कि मंच पर खड़े होकर आत्मविश्वास के साथ अपना परिचय दिया। यह लगता है कि आने वाली पीढ़ी के बच्चे आत्मविश्वास से भरे हुए हैं, और स्कूल जाने का उनके अन्दर उत्साह है। हजारों ग्रामीण के सामने यह कार्यक्रम हुआ। पूरे छत्तीसगढ़ में 01 अप्रैल को हमने इसका आयोजन किया।
गर्मी में स्वास्थ्य संबंधी सलाह
ऽ    साथियो ! मौसम में बदलाव के साथ गर्मी शुरू हो गई है। गर्मी और तेज धूप के कारण लू लगना और डायरिया या उल्टी-दस्त, टाईफाईड, पीलिया जैसी बीमारियों के होने का खतरा रहता है।
ऽ    इन बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक उपाय किया जाना चाहिए।
ऽ    तापमान बढ़ने के साथ शरीर में पानी की कमी होती है, जिसके कारण अधिक पानी पीना पड़ता है। इससे शरीर का तापमान स्थिर बना रहता है। पानी की कमी से लू लगती है, जिसके कारण तेज बुखार और ‘‘डिहाइड्रेषन’’ होने लगता है।
ऽ    चूंकि 01 अप्रेल से 30 अप्रैल तक स्कूल में बच्चे पढ़ने जाएंगे, इसलिए गर्मी में इन बच्चों को लू न लगे, इसके लिए विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
ऽ    स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हैंडपंप के माध्यम से रहती है। जहां इसमें कोई कठिनाई हो, ऐसे स्थानों में बच्चों को पानी की बॉटल ले जाने हेतु जरूर देवें तथा पानी पीने के लिए प्रेरित करें।
ऽ    अधिक से अधिक तरल पेय और पानी पिये। खाली पेट न रहे, शरीर के तापमान में वृद्धि, थकावट और मुँह का लगातार सूखना आदि लक्षण होने पर निकट के स्वास्थ्य केन्द्र से सम्पर्क करंे।
ऽ    किसी स्थान में पीलिया, डायरिया आदि के एक साथ कई प्रकरण होने पर तत्काल मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता को सूचित करें।
ऽ    मैं प्रदेश के नागरिको को स्मरण दिलाना चाहता हूॅ, कि लोगो की सुविधा के लिए ही 24 घण्टे टेलीफोन से निःशुल्क प्राथमिक उपचार सलाह के लिए ‘‘104 स्वास्थ्य परामर्ष सुविधा’’ प्रारंभ की है। इसका अधिक से अधिक उपयोग कर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ ले।
भू-जल संरक्षण अभियान
ऽ    भाइयों और बहनों! आज मैं आप लोगों से एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार साझा करना चाहता हूं, वह है भू-जल संरक्षण अभियान। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि प्रकृति हमें अपनी आवश्यकता की पूर्ति हेतु पर्याप्त संसाधन देती है, लेकिन लोभ की पूर्ति हेतु नहीं।
ऽ    प्रकृति से हमें पीने और अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु पर्याप्त मात्रा में भू-जल उपलब्ध है। लेकिन विगत कुछ समय से हम यह देख रहे हैं, कि भू-जल का अविवेकपूर्ण तथा अत्यधिक दोहन करने के कारण अनेक स्थानों गांव, मजरा, टोलांे में हैण्डपम्प और पेयजल के श्रोत सूख गये हैं। जहां कभी भी पेयजल की समस्या दिखाई नहीं देती थी।
ऽ    यह एक विकट समस्या और चुनौती हम सभी के लिए सामने आ रही है। क्या हजारों की संख्या के गांवों में यदि पेयजल उपलब्ध न हो तो टैंकरों के माध्यम से यह व्यवस्था हम कर सकते है? निश्चित रूप से नहीं।
ऽ    इस भीषण समस्या व चुनौती को देखते हुए हमें इस दिशा में गंभीरता से विचार करना होगा। भू-जल स्तर एक ऐसी अमूल्य सम्पत्ति है, जिसका हमें ऐसा उपयोग करना होगा कि आने वाली पीढ़ी के लिए वह उपलब्ध रह सके।
ऽ    हमने देखा है कि गांव में न केवल पेयजल के स्रोत हैं, बल्कि उसके साथ ही साथ हैण्डपम्प से ज्यादा पॉवरपम्पों की संख्या है। यदि एक जिले मैं राजनांदगांव का कहूॅ तो जहां 17,600 हैण्डपम्प है, वहीं 31 हजार से भी अधिक संख्या में पावरपम्प हैं, और पावरपम्प के चलने से उस गांव का पेयजल स्तर नीचे आ जाता है, और गर्मी में समर पैडी जो गर्मी में धान की खेती लेते हैं, उसमें पानी की अत्यधिक आवश्यकता होती है।
ऽ    01 किलो धान पकाने के लिए 3000 लीटर पानी की जरूरत होती है। यदि ऐसे 100 पम्प गांव में चल रहे हैं, तो वहां का जल स्तर निश्चित रूप से नीचे जायेगा। कई स्थानों में हमने देखा है कि ऐसे पम्पों को बंद कराने पर उनके हैण्डपम्प में पानी स्वभाविक रूप से आने लगा है।
ऽ    अनेक गांवों में मैने यह भी देखा है, कि सिंचाई की ‘‘सतही जलस्रोत‘‘ होने के बाद भी जहां किसान नहरों के पानी से अपनी फसलों की सिंचाई कर सकते हैं, वहां पावरपम्पों के माध्यम से सिंचाई किया जाता है। ऐसी स्थिति उचित प्रतीत नहीं होती।
ऽ    हमें सिंचाई के लिए यथासंभव अधिक से अधिक ‘‘सतही जलश्रोत‘‘ का उपयोग करना चाहिए और भू-जल कोे आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना होगा।
ऽ    भू-जल के अत्यधिक दोहन होने के कारण ही हैण्डपम्पों में फ्लोराइड जैसे तत्वों की अधिकता हो जाती है, जो मानव उपभोग के लिए हानिकारक है।
ऽ    वर्ष 2009 में राज्य में फ्लोराइड की अधिकता वाले मात्र 3 या 4 गांव थे। वहीं इनकी संख्या बढ़कर अब 405 हो गयी है और इसका मुख्य कारण भू-जल का अत्यधिक दोहन होना ही है।
ऽ    इसलिए मेरी आपसे अपील ही नहीं, बल्कि यह प्रार्थना है कि अपने-अपने गांव, मजरा, टोला में भू-जल संरक्षण करने के साथ ही साथ वर्षा के जल का वाटरहार्वेस्टिंग तकनीक के माध्यम से ‘‘रिचार्जिंग‘‘ करते हुए भू-जल  संवर्धन के काम करें।
ऽ    अपने पंचायत भवन, स्कूल भवन और अन्य शासकीय भवन में भी वाटरहार्वेस्टिंग का उपयोग करने के लिए अभी से संरचना बनायंे, और इसके लिए मनरेगा का उपयोग हम कर सकते हैं। प्रत्येक गांव में हम यदि रिचार्जिंग की व्यवस्था करेंगंे, गांव का पानी यदि गांव में रोका जायेगा और हम बेहतर ऐसे स्ट्रक्चर बनायेंगे, तो भविष्य में आपको पानी का संकट नहीं झेलना पड़ेगा।
ऽ    भाईयों और बहनों ! मैं आपसे पुनः 08 मई 2016 को ‘‘रमन के गोठ‘‘ कार्यक्रम में मिलूंगा। तब तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए।


जय जोहार जय छत्तीसगढ़
 

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