स्वामी विवेकानन्द जयंती की पूर्व संध्या पर व्याख्यान माला आयोजित

विवेकानन्द प्रबुध्द संस्थान शुरू करने हरसंभव सहयोग मिलेगा - डॉ. रमन सिंह

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राज्य में 'स्वामी विवेकानन्द प्रबुध्द संस्थान' शुरू करने की परियोजना में राज्य सरकार भी पूरी गंभीरता के साथ अपना योगदान देगी। डॉ. सिंह आज शाम यहां संस्कृति विभाग द्वारा टाउन हॉल में स्वामी विवेकानन्द की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित व्याख्यान माला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संस्थान का स्वरूप और संस्थान के माध्यम से यहां होने वाली गतिविधियों का स्पष्ट रूप से चिन्हांकन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की यह मंशा है कि छत्तीसगढ़ में स्थापित होने वाला स्वामी विवेकानन्द को समर्पित यह संस्थान विश्व स्तर के संस्थान के रूप में विकसित हो। इसके लिए इस क्षेत्र के विद्वतजनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत है। संस्थान का स्वरूप तय होने के बाद विधानसभा में भी चर्चा की जाएगी और इसे वैधानिक स्वरूप प्रदान किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस वर्ष संस्कृति विभाग के बजट में विवेकानन्द प्रबुध्द संस्थान के लिए भी प्रावधान रखा जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने की। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अजय चन्द्राकर, बेलूर मठ कोलकाता के स्वामी श्रीफरानंद, विवेकानन्द आश्रम रायपुर के स्वामी सत्यस्वरूपानंद, पद्मश्री सम्मान प्राप्त डॉ. महादेव पाण्डेय, रायपुर नगर निगम के महापौर श्री सुनील सोनी, वरिष्ठ लेखक श्री कनक तिवारी और संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव श्री टी.राधाकृष्णन भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने व्याख्यान माला में कहा कि यह हमारे लिए गौरव का विषय है कि विश्व को दिशा देने वाले देश के महान दार्शनिक स्वामी विवेकानन्द ने अपने बचपन का कुछ समय रायपुर में बिताया। यह हमारा दायित्व है कि हम छत्तीसगढ़ की राजधानी से जुड़ी उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर इस काम को आगे बढाएंगे राज्य सरकार भी तत्परता के साथ इसके लिए कार्य करेगी।

संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि स्वामी विवेकानन्द ने पूरी दुनिया में धर्म और संस्कृति की पताका फहरायी। स्वामी विवेकानंद का छत्तीसगढ़ की धरती से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण ढाई वर्ष रायपुर में बिताए हैं। श्री अग्रवाल ने कहा कि तेरह वर्ष की उम्र में जबलपुर से रायपुर आते समय उन्हें छत्तीसगढ़ की धरती में आध्यात्मिक अनुभूति हुई। आध्यात्मिक व सांस्कृतिक दूत के रूप में स्वामी विवेकानंद ने विश्व में भारत के गौरव को स्थापित करने का कार्य किया। ऐसी महान विभूति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पहचान बने, यही हमारा प्रयास होना चाहिए। इस उद्देश्य से  ''विवेकानंद प्रबुध्द संस्थान'' स्थापित करने के लिए एक परियोजना तैयार की गई है।  

        स्वामी सत्यस्वरूपानंद जी ने व्याख्यान माला में कहा कि छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानन्द की आध्यात्मिक जन्मभूमि है। उन्होंने कहा कि हालांकि इतिहास में इस बात का उल्लेख नहीं है लेकिन स्वामी विवेकानन्द को बाल्यावस्था में जिस परिवेश में प्रथम भाव समाधि हुई थी और दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ था समय काल और परिस्थितियों के अनुसार वह स्थान छत्तीसगढ़ ही चिल्फी घाटी ही थी। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य में ईश्वर के दर्शन करना और मनुष्य की सेवा करना ही स्वामी विवेकानन्द के संदेशों का सार है। बेलूर मठ के स्वामी श्रीफरानंद ने भी स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानन्द ने जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा रायपुर में स्वामी विवेकानन्द की स्मृति में एक ऐसे संस्थान की स्थापना होनी चाहिए जहां मनुष्य के भीतर विश्वास जागे और वह अपने में चैतन्य सत्ता का अनुभव कर सके। वरिष्ठ अधिवक्ता श्री कनक तिवारी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द पहले व्यक्ति थे जिन्होंने हिन्दुस्तान को सबसे ज्यादा समझा। उन्होंने कहा कि देश में बौध्दिक क्रांति और नवजागरण के काल में छत्तीसगढ़ की विभूतियों ने अग्रणी भूमिका निभायी थी। छत्तीसगढ़ में इतनी प्रतिभा और क्षमता है कि वह आज भी देश का सिरमौर राज्य बन सकता है।

इसके पूर्व आज दोपहर को यहां रेडक्रास भवन के सभा गृह में संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल की उपस्थिति में ''विवेकानंद प्रबुध्द संस्थान'' के स्वरूप और संरचना का प्रारूप तैयार करने साहित्यकारों, वरिष्ठ पत्रकारों व बुध्दिजीवियों की विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें बेलूर मठ कलकत्ता के स्वामी श्रीफरानंद और रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम रायपुर के स्वामी सत्यस्वरूपानंद, कोलकाता हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश श्री सूर्यकुमार तिवारी, साहित्यकार डॉ. राजेद्र मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार श्री बसंत तिवारी, श्री गोविंद लाल वोरा, श्री सुनील कुमार, छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक श्री रमेश नैयर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. महादेव पाण्डेय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी, वरिष्ठ लेखक श्री कनक तिवारी, पूर्व विधायक श्री लक्ष्मी नारायण इंदुरिया, शिक्षाविद् श्री ओम प्रकाश वर्मा, श्रीमती पुष्पा तिवारी,, सुश्री जया जादवानी, और श्री बालचंद कछवाहा ने अपने विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के सचिव श्री के. सुब्रमणियम, संचालक संस्कृति एवं पुरातत्व श्री राकेश चतुर्वेदी सहित संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

व्याख्यान माला में प्रबुध्द जन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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