सम्पूर्ण रमन के गोठ की 20वीं कड़ी जस का तस

‘रमन के गोठ’ : आकाशवाणी से प्रसारित विशेष कार्यक्रम (दिनांक 09 अप्रैल, 2017, समय प्रातः 10.45 से 11.05 बजे)

श्रोताओं नमस्कार! (पुरूष उद्घोषक की ओर से)

  • आकाशवाणी के विशेष प्रसारण ‘रमन के गोठ’ में हम, सभी श्रोताओं का हार्दिक स्वागत करते हैं, अभिनंदन करते हैं। कार्यक्रम की बीसवीं कड़़ी के लिए आकाशवाणी के स्टुडियो में माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी पधार चुके हैं।
  • डॉक्टर साहब नमस्कार, बहुत-बहुत स्वागत है आपका इस कार्यक्रम में।

मुख्यमंत्री जी

  • धन्यवाद। आपका भी और अपने रेडियो व टीवी सेट्स के सामने बैठकर मुझे सुन रहे श्रोताओं का भी। 
  • जम्मो संगी-जहुंरिया, सियान-जवान, महतारी-बहिनी मन ला जय जोहार।

महिला उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, लोक सुराज अभियान का तीसरा चरण शुरू हो गया है। पहले हम ग्राम सुराज अभियान के बारे में सुना करते थे, तो इसकी पृष्ठभूमि क्या है, इस संबंध में हमारे श्रोताओं को बताना चाहेंगे?

मुख्यमंत्री जी

  • सन् 2003 के आखिरी माह में हमारी सरकार बनी थी और मैंने 2005 से ही ‘ग्राम सुराज अभियान’ शुरू कर दिया था, ताकि हम सचमुच जनता की वास्तविक तकलीफें और आवश्यकताओं को प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ सकें और उसका निदान करने के लिए कारगर प्रयास कर सकें। 
  • इस तरह वर्ष सन् 2005 में जब हमने ग्राम सुराज अभियान शुरू किया था, तब इसे छापामार शैली में चलाया गया था, ताकि हम जो घोषणाएं करते हैं, योजनाएं बनाते हैं, विकास के लिए काम करते हैं, उसके क्रियान्वयन की स्थिति देख सकें।

पुरूष उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, सही कहा आपने, लेकिन यह ग्राम सुराज अभियान, लोक सुराज अभियान में कैसे बदल गया?

मुख्यमंत्री जी

  • जब ग्राम सुराज अभियान का लाभ जनता को मिलने लगा तो शहरी क्षेत्रों से भी इसकी मांग उठी। 
  • फिर हमने नगर सुराज अभियान संचालित किया। लेकिन एक साल में दो अलग-अलग समय पर यह अभियान चलाने से समन्वय में दिक्कत होती थी, तब हमने यह निर्णय लिया कि ग्राम सुराज अभियान और नगर सुराज अभियान को मिलाकर एक व्यापक अभियान चलाया जाए और इसे लोक सुराज अभियान का नाम दिया।
  • इस प्रकार इस वर्ष प्रदेश का यह तीसरा लोक सुराज अभियान है।

महिला उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, इस बार के लोक सुराज अभियान में किस प्रकार के परिवर्तन किए गए हैं और इनका लाभ किस तरह जनता को मिलेगा ?

मुख्यमंत्री जी

  • इस वर्ष अभियान की शुरूआत ही नए तरीके से की गई है। पहले चरण में 26 से 28 फरवरी तक जनता के आवेदन लिए गए। 
  • आवेदन लेने के लिए पूरे प्रदेश में शिविर लगाए गए तथा ‘‘समाधान-पेटी’’ की व्यवस्था भी की गई। ऑनलाइन आवेदन लेने की सुविधा भी दी गई। इस तरह सरकार ने स्वयं लोगों के गांव-घर तक पहुंचकर आवेदन लिए। इस तरह लोक सुराज अभियान के केन्द्र में जनता आ गई। 
  • इस प्रकार ‘‘लोक सुराज-2017‘‘ को हमने पूरी तरह से नागरिकों की योजना बना दी है। इस अभियान का स्वरूप अब बदलकर ‘‘ऊपर से नीचे’’ के स्थान पर ‘‘नीचे से ऊपर’’ हो गया है। 
  • इस वर्ष पूर्व में ही जनता के बीच जाकर आवेदन लेने से हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति का पता चलता है कि हम न सिर्फ समस्याओं का हल करना चाहते हैं, बल्कि योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करना चाहते हैं।     
  • ग्रामीण क्षेत्र में हमारे अधिकारी, कर्मचारी, विधायक, सांसद, मंत्रीगण जाते हैं। सरकार की प्रमुख योजनाए-राज्य सरकार और केन्द्र सरकार की प्रमुख योजनाओं के बारे में, उन्हें हम जानकारी देते है। 
  • वैसे मेरी यात्रा 03 अप्रैल से 20 मई तक चलेगी। मैं न केवल ‘‘समाधान शिविर’’ में जा रहा हूॅ, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में औचक निरीक्षण भी कर रहा हॅू।
  • शाम 6 बजे से बैठकर 8 बजे तक उनकी समीक्षा बैठक करता हूॅ, फिर 8 बजे से लेकर रात 10 बजे तक जिले के विभिन्न प्रतिनिधि मण्डल से मिलता हूॅं। वन-टू-वन मुलाकात होती है। 
  • इस प्रकार उस पूरे जिले की अन्दर की जानकारियां, विकास कार्य और क्या ‘‘मिसिंग-लिंक’’ है, उसकी जानकारी मिलती हैं, और बहुत सारी योजनाएॅ जिसको जनता तक मुझे पहुंचाना है, जिसका लाभ सबको मिले जैसे एक उदाहरण दूंगा- ‘‘उज्ज्वला योजना’’ का। 
  •  ’’उज्ज्वला-योजना’’ में हमें 35 लाख परिवारों तक गैस का सिलेण्डर और डबल बर्नर का चूल्हा उनको देना है।
  • इस साल हमने 10 लाख को दिया है। याने आने वाले डेढ़ साल में हमें 25 लाख परिवारों तक जाना है। उन्हें ‘‘आईडेन्टीफाइड’’ करना है। उनको मैं गांव में जाकर प्रेरित करता हूॅ कि ‘‘एप्लीकेशन’’ इस बार कम आए हैं। 
  • हर गांव में यदि इसके लिए महिलाएं ‘‘एप्लीकेशन’’ दें, तो हम आने वाले समय में 25 लाख अतिरिक्त परिवारों को सिर्फ 200 रूपए की कीमत पर और यह 200 रूपए की कीमत भी, उसमें 160 रूपया उन्हें वापस हो जाता है, 40 रूपए में 4 हजार रूपए की लागत का ’’डबल-बर्नर’’ चूल्हा और सिलेण्डर मिल जाता है।
  • इस योजना के जरिए जो सोच है देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की, कि हर घर तक, बल्कि इतनी बड़ी बचत होगी 2 करोड़ से ज्यादा पेड़ कटने से यदि बचते है, छत्तीसगढ़ में तो पर्यावरण की दृष्टि से भी यह बेहतर होगा। 
  • महिलाओं को जो सबसे बड़ी दिक्कत है, धुंए की वजह से, खांसते-खांसते उनको श्वास की, और दमा की, और टी.बी. की बीमारी हो जाती है। उससे मुक्ति का एक उपाय उन्होंने किया है।
  • इसके साथ ही ‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना’’ जिसका जबरदस्त ‘‘रिस्पांस’’ है। इससे डेढ़ लाख रूपए से ज्यादा की योजना का लाभ सीधे हम गांव वालों को दे रहे है।  
  • पहली बार ऐसा हो रहा है कि कितनी अच्छी कीमत में 1 लाख 30 हजार रूपए की राशि हम उनको देते है, उसमें 12 हजार रूपए शौचालय के लिए देते है। 
  • मनरेगा में काम करने का 100 दिन का भुगतान भी हम उनको करते हैं, बनाने वाला इतना खुश है परिवार।
  • जब मैं गांव में जाकर मिलता हूूॅ, अपने हाथ से वो ईंटे रखते है, मैने भी जाकर उनके साथ ईंटे रखने का काम किया, तो यह समाज से जुड़ने का काम है, जो आज तक कच्चे मकान में रहते है, उनके लिए एक पक्के मकान, पक्के कमरे की व्यवस्था और उसके लिए हम बोलते है कि 02 लाख का ‘‘टारगेट’’ था, अब हम उसको 06 लाख तक कर दिये है। 
  • तीसरी योजना ‘‘सौर सुजला योजना’’  - जहॉ बिजली नहीं पहुंची है, ‘‘अन-इलेक्ट्रीफाइड विलेज’’ हैं। वहां यदि सिंचाई के साधन नहीं है, ‘‘रिमोट-एरिया’’  में, वह चाहे बलरामपुर हो, बीजापुर हो, सुकमा हो या दूरस्थ अंचल, वहां मैं जाकर ‘‘सौर सुजला योजना’’  के बारे में बताता हॅू, कि यह 4 लाख, साढ़े चार लाख का ‘‘सोलर-पम्प’’ उनको 10 हजार, 15 हजार और 18 हजार रूपए में मिलेगा। जीवनभर बिजली की बिल पटाने की जरूरत नहीं है। वह अपने 1 एकड़, 2 एकड़ बाड़ी की सिंचाई कर सकता है। 
  • उनको आवेदन देने का ‘‘क्राईटेरिया‘‘ यही है कि ’’प्रीमेटिव्ह -ट्राइब्स’’ के लोग, बी.पी.एल. के परिवार, छोटे मध्यम किसान, ये सभी इसमें ले सकते है। 
  • चौथी योजना जिसके बारे में मैं उनको जोड़ना चाहता हूॅ और बहुत लोग जुड़ भी रहे है। 4-4 हजार लोग जब शिविर में रहते है-मेरे साथ, काफी धूप रहती है, तेज गर्मी रहती है, मगर मैने आश्चर्य किया कि ऐसे शिविरों में 4 हजार लोग घण्टों बैठते हैं, बातंे सुनते हैं, ‘‘रिस्पांस’’ देते हैं, जैसे कि एक योजना मैने उनको ‘‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा बीमा योजना’’ के बारे में जब मैं बोलता हूॅ कि आपके परिवार की स्वास्थ्य-सुरक्षा सरकार की है।
  • यदि हमने खाद्यान्न सुरक्षा दिया, 1 रूपए किलो चांवल योजना हमनें चालू किया, आवास की योजना शुरू की, तो एक उससे, एक और अच्छी योजना है ‘‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’’ जिसमें हम पहले 30 हजार रूपए तक का ‘‘स्मार्ट-कार्ड ’’ हम उनको देते थे। अब वो 30 हजार रूपए के ‘‘स्मार्ट-कार्ड ’’ को बढ़ाकर 50 हजार रूपए कर दिया। 
  • एक गरीब परिवार की जेब में यदि ‘‘स्मार्ट-कार्ड ’’ रहेगा तो उसके अंदर कितना बड़ा विश्वास आता है, और यह  ‘‘यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम’’  है।
  • मैं गांव वालो को बताता हूॅ, हाथ ऊँचा कराता हूॅ, कि कितने लोगों का ‘‘स्मार्ट-कार्ड ’’ बना है। 
  • मैं आपके माध्यम से, रेडियो के माध्यम से, मेरे सुनने वाले श्रोताओं को जो बड़े ध्यान से मेरी बात सुनते है, आपको मैं प्रेरित करता हॅू, आप अपने गांव में अपने घर में, कोई भी ऐसा व्यक्ति न छोड़े जिन महिलाओं के ंघर में हमारे उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और इसके साथ ही साथ यदि आपने उनको ‘‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’’ के बारे में बताया तो आप बहुत बड़ा काम करेंगे।
  • जनता के बीच आपको न केवल श्रोता की हैसियत से, बल्कि प्रेरक की आपकी भूमिका हो जाएगी और मैं जानता हूॅ कि मुझे सुनने वाले लोग सरकार की उन अच्छी योजनाओं को जनता तक ले जाने में मुझे मदद करेंगे। यही मेरा माध्यम है, जिसके माध्यम से मैं अंतिम व्यक्ति तक पहंुचकर इस बात को कहना चाहता हूॅ और आप मुझसे जुड़े हुए है। 
  • एक बड़ा लक्ष्य हमने रखा है मार्च 2018 तक छत्तीसगढ़ के 66 हजार पारे, टोले, मजरे में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य हम पूरा करने जा रहे है। 
  • ये इन बातो का जिक्र मैं इसलिए कर रहा हूॅ कि यह समस्या सिर्फ और सिर्फ आपकी नहीं, आपके परिवार की नहीं बल्कि समाज में परिवर्तन लाने का है और परिवर्तन की बेला में हमने जितने भी हमारे पास 28 लाख ‘‘एप्लीकेशन‘‘  आये हैं। उसको हम इस शिविर के बाद रद्दी की टोकरी में नहीं डाल रहे है। इसका एक ‘‘टोटल कम्पयूटराईजेशन‘‘ हमने किया है। ‘‘डेटाबेस‘‘ बनाया है और इसको हम साल भर ‘‘फॉलो’’  करेंगे। 
  • ‘‘चीफ-सेक्रटरी’’ इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। ताकि उन समस्याओं की जड़ तक हम जाएं और आपको यह जानकारी मिलेगी कि आप यदि पात्र हितग्राही हैं तो आपको कब इसका लाभ मिलेगा। अपात्र हैं तो इसकी जानकारी दी जाएगी।
  • इस प्रकार एक-एक विषय के जितने भी ‘‘एप्लीकेशन‘‘ आये हैं उसका हम समय पर निराकरण करने का प्रयास करेंगे। 
  • मैं लगातार 20 मई तक आपके बीच ही रहूंगा। आपके गांव में, आपके मोहल्ले में, आपके किसी ग्रामीण अंचल में, किसी शिविर में आपसे मुलाकात होगी। निश्चित रूप से इन योजनाओं को आप भी अपने माध्यम से लोगों तक पहुंचायें। 

पुरूष उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, समाधान शिविरों की शुरूआत 3 अप्रैल से की गई है, इसमें क्या कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है ?

मुख्यमंत्री जी

  • इसको हमने तीन स्तर में, इसके क्रियान्वयन की योजना बनाई है पहली योजना जो हम क्रियान्वयन का कर रहे हैं, ‘‘एप्लीकेशन‘‘ लिया, प्रदेश के हर 10 पंचायत के बीच में एक समाधान शिविर होगा। उसमें ‘‘नोडल ऑफिसर’’ होगा। सभी विभाग के अधिकारी वहां उपस्थित होंगे।
  • एक-एक ‘‘एप्लीकेशन‘‘  को पढ़कर सुनाया जाएगा। समाधान के बारे में आपको जानकारी दी जाएगी और उसके साथ-साथ ’’ब्लॉक’’ लेबल पर, जिला लेबल पर जब इसकी समीक्षा बैठक करने हमारे मंत्रीगण जाएंगे, हमारे सांसद, हमारे विधायकगण जाएंगे।
  • पूरी ’’ट्रांसपेरेन्सी’’ के साथ, कैसे हम बेहतर तरीके से उनका क्रियान्वयन कर रहे है। इसकी मानिटरिंग हम करेंगे और उसमें से एक ’’फीडबैक’’ हमारे पास आएगा।
  • छत्तीसगढ़ की आज सबसे ज्वलन समस्या क्या है ? सबसे ज्यादा लोगों ने किस मुद्दे के लिए अपनी मांग रखी हैं, किस मुद्दे पर शिकायत हैै ? 
  • तो यह अवसर हमारे पास है कि 18 महीने में हम उनकी समस्याओं का भी समाधान ढूंढे और मुझे लगता है कि 13 साल में जितने भी कारगर और व्यापक लोक कल्याणकारी योजनाएं हमने बनाई हैं, वो सारी योजनाओं का जन्म ऐसे ही आपके बीच बैठकर ’’लोक सुराज-ग्राम सुराज अभियान’’ से ही बना है।
  • और उसकी व्यापकता इतनी हुई है कि उत्तरप्रदेश, बिहार के लोग, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ में आकर उन योजनाओं के अध्ययन के लिए उनके मंत्रीगण आ रहे है, उनके अधिकारीगण आ रहे हैं, तो यह एक बड़ी सफलता है और यह छत्तीसगढ़ की जनता की सफलता है। जिन्होंने मुझे ’’लोक सुराज अभियान’’ के माध्यम से बहुत कुछ सिखाया है और वही सीखकर मैं इस अभियान को आगे बढ़ाने में लगा हूॅ और उम्मीद करता हूॅ कि आपकी जो सोच है उसको हम धरातल पर योजना के रूप में ढ़ालने में हम सफल होंगे।

महिला उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, आपने इस वर्ष लोक सुराज अभियान में अपने प्रवास की पहली रात सुकमा में बिताई और दूसरी रात बीजापुर में। इस तरह दक्षिण बस्तर के सुदूर सीमावर्ती सर्वाधिक नक्सल प्रभावित आदिवासी, सघन वनक्षेत्र वाले जिलों में रात को ठहरने का क्या संदेश है?

मुख्यमंत्री जी

  • शुरूआत सुकमा से किया और सुकमा में रात्रि विश्राम किया। बीजापुर गया। बीजापुर में भी रात रूका। रात्रि विश्राम करना सुकमा में एक तरह से वहॉ के लोगो से सीधे जुड़ने की बात है। 
  • मेरा एक अनुभव इस बार आया है, जब मै सुकमा जिले के शबरी नदी के उस ‘‘दोरनापाल-पोडिया-कालीमेटा’’ मार्ग लोकार्पण के लिए गया। 
  • 500 मीटर यह लंबा पुल ओड़िशा से जोड़ता है। जब हमने इस पुल को प्रारंभ किया इस दोरनापाल में मैं अभी तक 500-600-700 लोगों से ऊपर कभी सभा नहीं किया। कभी वहाँ के लोगो से बातचीत करने का अवसर भी कम मिलता था। हजारों लोग न केवल छत्तीसगढ़ में बल्कि ओड़िशा से  4-5 हजार लोग इस पुल को पार करके आ रहे थे, नाच रहे थे, खुशियां मना रहे थे और एक साथ जश्न, मैने आज तक 13-14 साल की राजनीतिक यात्रा में किसी पुल की या किसी सड़क के उद्घाटन पर ऐसा माहोल मैंने नहीं देखा। 
  • यानि एक उस क्षेत्र के लिए एक नई सड़क का निर्माण और पुल का निर्माण एक विकास  का इतना बड़ा ‘‘ब्रिज’’ बन रहा है। पुल बन रहा है कि वो उस क्षेत्र की ‘‘इकॉनामी‘‘ को बदल देगा, सोच को बदल देगा।
  • 11 करोड़ रूपए का पुल है, और मैने वहॉ के अधिकारियों, कर्मचारियों, जवानों को बुलाकर धन्यवाद दिया और आप कल्पना करेंगे कि बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर में जो सड़कें बनती हैं, वो सामान्य दिशा-दशा में सड़कें बनती नहीं है। सड़क बनने के साथ न केवल ठेकेदार, वहॉं के अधिकारी, वहॉ की जनता, वहॉ के हमारे पुलिस के जवान, सी.आर.पी.एफ. के जवान एक-एक सड़कों  में कई उदाहरण है, जहॉ 12-12 जवानों की शहादत हुई, तो वो उस सड़क का महत्व हिन्दुस्तान के, दुनिया के किसी भी सड़क से अलग है और एक प्रकार से शहीदों के लिए जिन्होंने शहादत दी है उनकी इतनी बड़ी कुर्बानी उस सड़क में हुई तो उन सड़कों को मैं कहता हूॅ कि वो दुनिया के इतिहास की ऐसी सड़क है जिसका वर्णन कहीं न आज तक किया गया होगा। 
  • मुझे इस बात का भी अवसर मिला कि जब मैं सुकमा में रात में रूका तो वहॉ एक शिविर था। ‘‘केरलापाल‘‘  18 कि.मी. दूर सुकमा के उस क्षेत्र में सामान्यतः ‘‘वीआईपी मूव्हमेंट‘‘ या हम लोगों को ले जाते नहीं, मैं जब कार में बैठकर उस सड़क से यात्रा किया तो हमारे अधिकारियों को भी इस बात का भय था कि इस सड़क में मै कैसे जा रहा हूॅ।
  • यह ‘‘केरलापाल‘‘ वही जगह है जहॉ एलेक्स पाल मेनन को ‘‘किडनैप’’ किया गया था, उठाकर ले गये थे। तो मैंने कहा कि मै केरलापाल जरूर जाऊंगा। वहॉ के लोगों से मिलूंगा और वहॉ केरलापाल में हजारों लोगों की उपस्थिति में विकास के प्रति, सड़क-पुलिया के प्रति जो मांग मैने देखा तो मुझे लगा कि बस्तर बदल रहा है। सुकमा बदल रहा है। बीजापुर बदल रहा है, अब वहॉ के एकं-एक आदमी विकास से जुड़ रहे हैं। योजनओं से जुड़ रहे हैं। सरकार से जुड़ रहे हैं और हम यहीं चाहते थे।
  • शांति तभी आएगी जब विकास होगा और उस दिशा में इस ’’ब्रिज’’ ने कमाल किया। उस क्षेत्र के जवानो ने कमाल किया। ऐसे निर्माण कार्य एक संदेश देकर उन लोगों के मन में विश्वास पैदा करेंगे।

पुरूष उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, अभी तो आप बस्तर के अन्य स्थानों पर जाएंगे, लेकिन 3 और 4 मार्च के बस्तर प्रवास के दौरान आपका क्या अनुभव रहा और आपने वहां कौन सी बड़ी घोषणाएं की हैं?

मुख्यमंत्री जी

  • मुझे लगता है कि सुकमा में जब मैं गया तो प्रधानमंत्री आवास योजना का जो लक्ष्य था, मैने समीक्षा बैठक में कहा  कि उसको 3-गुना ज्यादा हम कर दें। 
  • हमने कहा कि उस क्षेत्र में शबरी नदी में अथाह जल है। मैने शबरी के किनारे किनारे बहुत यात्रा की, शबरी के पानी का उपयोग वनवासी कैसे करें ? तो हमने कलेक्टर को ’’टारगेट’’ दिया। 500 एडिशनल सोलर पम्प दिया जाए, ताकि वहॉ के हमारे किसानो को निःशुल्क यह पम्प मिले।
  • इसके साथ ही साथ उज्ज्वला योजना का भी। हमने कहा कि जितने घरों में जितनी बहने हमारी उज्ज्वला योजना के लिए ‘‘एप्लीकेशन’’ मैने कहा कि सुकमा बीजापुर के लिए कोई मेरे पास ‘’क्राईटेरिया’’ नहीं है। ‘’क्राईटेरिया’’ में हम बदलाव भी करेंगे। क्योंकि मुझे लगता है कि जहॉ आवश्यकता है, वहॉ पर हम रोशनी पहुंचाने में भी सफल नहीं हो पाए, बिजली का कनेक्शन, गैस का सिलेण्डर ज्यादा से ज्यादा दें। 
  • उस जिले में जब मैं गया तो मुझे खुशी हुई की महुआ बीनने वाले, तेन्दूपत्ता तोड़ने वाले उनको जब इस बात का एहसास हुआ कि उन्हें ‘‘स्मार्ट-फोन‘‘ मिलेगा तो उनको भी यह प्रसन्नता हुई कि ‘‘कनेक्टिविटी’’ शायद हमारे गांव में भी, हमारे घर में, हमारे पास में भी आएगी। 
  • भैरमगढ़ को नए राजस्व अनुविभाग का दर्जा दिया गया, क्योंकि उस इलाके में आवश्यकता थी। यह प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। 

पुरूष उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, आपने धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के ग्राम सिंगपुर में सबसे पहला औचक निरीक्षण किया। सिंगपुर में आपका क्या अनुभव रहा ?

मुख्यमंत्री जी

  •  चूंकि सिंगपुर का निरीक्षण औचक निरीक्षण था तो लोगों को सुखद आश्चर्य भी हुआ। सीधा मुझे हेलीकॉप्टर से उतारकर वहॉ के बूढ़ादेव के मन्दिर में ले गए। नारियल चढ़ाया। पूजा किया, फिर लोग इकट्ठे हुए। फिर गांव वालों से हालचाल पूछता रहा। आंगनबाड़ी, स्कूल, पानी, बिजली की व्यवस्था, वहॉ एक नई सड़क बनी है। ‘’कनेक्टिविटी‘’ वहॉ का बढ़ी है। इसके बारे में फिर उन्होंने कुल मिलाकर, बैठाकर फिर यह कहा कि सोंढूर सिंचाई जलाशय शाखा नहर का विस्तार दुगली से सिंगपुर तक यदि कर दिया जाए तो हमारे गांव में बाकी मांगो की जरूरत ही नहीं रहेगी। सिंचाई का पानी आ सकता है। कैनाल बन सकता है। 
  • तत्काल मैने वहॉ पर कहा कि बजट में प्रावधान करके इसी साल दुगली से सिंगपुर तक सिंचाई का नहर बने। पानी उनको अगले साल मिल जाए।
  • युवाओं ने मिनी स्टेडियम की मांग की। पेयजल के लिए सोलर पम्प की स्थापना का निर्णय हुआ और बहुत सारी स्थानीय बातो ंको वहॉ बैठकर चर्चा की और उसके लिए वहॉ के जिलाधीश आ गये थे उनको भी निर्देशित किया ।

पुरूष उद्घोषक

  • श्रोताओं! आपकी प्रतिक्रियाएं हमें आपके पत्र, सोशल मीडिया- फेसबुक, ट्विटर के साथ SMS से भी बड़ी संख्या में मिल रही हैं। इसके लिए आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद।
  • आगे भी आप अपने मोबाइल के मेसेज बॉक्स में RKG के बाद स्पेस लेकर अपने विचार लिखकर 7668-500-500 नम्बर पर भेजते रहिए और संदेश के अंत में अपना नाम और पता लिखना ना भूलें।

मुख्यमंत्री जी

  • सोशल मीडिया पर बहुत से श्रोताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। एस के फालके, डॉक्टर लता नारंग, परमेन्द्र सिंह, ओमप्रकाश शर्मा आदि ने लोक सुराज अभियान को सार्थक पहल बताया है और इसकी सफलता की कामना की है।
  • संजीव तिवारी ने कहा है कि जिस संवेदना और आदर के साथ आपने लोक सुराज अभियान को पाठशाला कहा है, वैसी ही भावना मंत्रियों और अधिकारियों की भी होनी चाहिए।
  • मैं आप सबको विश्वास दिलाता हूं कि शासन, प्रशासन और आप सब मिलकर इस अभियान को सफल बनाएंगे। 
  • शेषनारायण दुबे ने पूछा है कि बस्तर में शांति कब होगी।
  • मैं बताना चाहता हूं कि हम सुरक्षा, विकास और विश्वास की जिस रणनीति पर काम कर रहे हैं, यही रास्ता शांति की ओर ले जा रहा है। जल्दी ही हमें पूरी सफलता मिलेगी। बस्तर में शांति होगी और विकास भी।

पुरूष उद्घोषक

  • और श्रोताओं, अब बारी है ‘क्विज’ की। 
  • ग्यारहवें ‘क्विज’ का प्रश्न था-
  • ‘स्काय योजना का संबंध किस उपकरण से हैं? 
  •     जिसका सही जवाब है - (B) स्मार्ट फोन
  • सबसे जल्दी जिन पांच श्रोताओं ने सही जवाब भेजे हैं, उनके नाम हैं- 

1.    श्री चन्द्रकुमार पैकरा, परसोड़ी, जिला बिलासपुर

2.    श्री प्रशांत पाण्डे, मड़वा, जिला जांजगीर-चांपा

3.    कुमारी करूणा, मंदिरहसौद, जिला रायपुर

4.    अश्रिता जांगड़े, ग्राम पचरी, जि. जांजगीर

5.    श्री पवन सोनकर, भाठागांव, जिला रायपुर

महिला उद्घोषक

  • और श्रोताओं अब समय है बारहवें क्विज़ का। 

    जिसका सवाल है-

  • ‘लोक सुराज अभियान 2017’ में माननीय मुख्यमंत्री जी ने पहला रात्रि विश्राम कहॉ किया ? 
  •  इसका सही जवाब (A) सुकमा

                                   (B) दंतेवाड़ा

    इनमें से कोई एक है।

  • अपना जवाब देने के लिए, अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में फ। लिखें और स्पेस देकर या B जो भी आपको सही लगे, वह एक अक्षर लिखकर 7668-500-500 नम्बर पर भेज दें। साथ में अपना नाम और पता अवश्य लिखें।
  • आप सब ‘रमन के गोठ’ सुनते रहिए और अपनी प्रतिक्रियाओं  से हमें अवगत कराते रहिए। इसी के साथ आज के अंक का हम यहीं समापन करते हैं। अगले अंक में 14 मई को होगी आपसे फिर मुलाकात। तब-तक के लिए दीजिए हमें इजाजत। नमस्कार।
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