शोक संवेदना, नोनी सुरक्षा, गजराज और जामवंत योजना

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी डॉ. दुर्गा सिंह सिरमौर के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी डॉ. दुर्गा सिंह सिरमौर के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया
गृह ग्राम पथरी में राजकीय सम्मान के साथ दी गयी अंतिम बिदाई
रायपुर, 12 सितम्बर 2014 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सहयोगी और वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. दुर्गा सिंह सिरमौर के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। डॉ. सिंह ने उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने आज यहां जारी शोक संदेश में कहा है कि डॉ. सिरमौर ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में छत्तीसगढ़ अंचल में भी राष्ट्रीय चेतना के विकास और विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ज्ञातव्य है कि डॉ. सिरमौर का राजधानी रायपुर के नजदीक ग्राम पथरी (विकासखंड धरसींवा) में निधन हो गया, जहां आज दोपहर अत्यंत गमगीन माहौल में राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की गयी। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। स्वर्गीय डॉ. सिरमौर को अंतिम बिदाई देने क्षेत्रीय विधायक श्री देवजी भाई पटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान, मजदूर तथा आम नागरिक इस अवसर पर उपस्थित थे। सभी लोगों ने स्वर्गीय डॉ. सिरमौर को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।

कुंए में चार मौतें: मुख्यमंत्री ने गहरा दुःख व्यक्त किया

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज राज्य के कबीरधाम (कवर्धा) जिले के ग्राम राजनवागांव के एक कुंए में उतरे चार लोगों की आकस्मिक मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। डॉ. सिंह ने सभी दिवंगतों के शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। ज्ञातव्य है कि इस हादसे में एक पुलिस कर्मी सहित तीन ग्रामीणों की मृत्यु हो गयी। ये लोग बिजली का पम्प निकालने के लिए कुंए में उतरे थे। 

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ में ’नोनी सुरक्षा योजना’ शुरू इस वित्तीय वर्ष के बजट में 40 करोड़ रूपए का प्रावधान

एक अप्रैल 2014 के बाद जन्मी बालिकाओं को बारहवीं की पढ़ाई और 
18 वर्ष की उम्र पूर्ण करने पर मिलेगी एक लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि
राज्य सरकार बालिका के नाम पर भारतीय जीवन बीमा निगम में 
पांच साल तक हर साल जमा करेगी पांच हजार रूपए

रायपुर, 12 सितम्बर 2014/ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुरूप राज्य सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेश की बालिकाओं के लिए नोनी सुरक्षा योजना की शुरूआत कर दी है।  इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष 2014-15 के बजट में 40 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इस योजना में बालिकाओं को बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई पूर्ण करने और 18 वर्ष की उम्र तक विवाह नहीं करने पर एक लाख रूपए अथवा शासन द्वारा निर्धारित परिपक्वता राशि प्रोत्साहन के रूप में दी जाएगी। परिपक्वता राशि एक लाख रूपए से कम नहीं होगी। यह योजना एक अप्रैल 2014 से लागू की गई है। योजना के प्रावधानों में बताया गया है कि एक अप्रैल 2014 के बाद जन्मी बालिकाओं के लिए शुरू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य सरकार के घोषणा पत्र 2013 में और वित्तीय वर्ष 2014-15 के बजट में इस योजना के क्रियान्वयन की घोषणा की थी। 
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि विभाग द्वारा मंत्रालय (महानदी भवन) से नोनी सुरक्षा योजना के क्रियान्वयन के लिए सभी जिला कलेक्टरों और विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियांे को परिपत्र के रूप में दिशा निर्देश जारी कर दिया है। परिपत्र के अनुसार योजना का लाभ देने के लिए बालिकाओं का पंजीयन किया जाएगा। राज्य सरकार इस योजना में पंजीकृत बालिका के लिए प्रति वर्ष पांच हजार रूपए की धनराशि उसके नाम पर भारतीय जीवन बीमा निगम में पांच साल तक जमा करेगी।  परिपत्र के अनुसार यह योजना छत्तीसगढ़ में बालिकाओं की शैक्षणिक स्थिति और उनकी सेहत की स्थिति में सुधार करने, बालिकाओं के अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने, कन्या भ्रूण हत्या रोकने, बालिकाओं के जन्म के प्रति जनता और समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। बाल विवाह की सामाजिक बुराई को दूर करना भी इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य है।
विभाग के सचिव श्री दिनेश श्रीवास्तव द्वारा योजना के बारे में इस महीने की नौ तारीख को जारी परिपत्र और दिशा-निर्देशों के अनुसार बालिका के माता-पिता अथवा अभिभावक को उसका जन्म पंजीयन प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा। बालिका के माता-पिता को छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना चाहिए। इसके लिए तहसीलदार या नायब तहसीलदार द्वारा जारी प्रमाण पत्र अथवा बीपीएल कार्ड या स्वास्थ्य बीमा कार्ड संलग्न किया जा सकता है। बालिका गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की होनी चाहिए।़ योजना का लाभ दो संतानों (बालिकाओं) तक सीमित होगा अर्थात यदि दो बालक के पश्चात तीसरी बालिका है, तो योजना में लाभ की पात्रता नहीं होगी। प्रथम अथवा द्वितीय बालिका होने के संबंध में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/ए.एन.एम./सरपंच/पार्षद/पंचायत सचिव द्वारा जारी प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा। द्वितीय बालिका की दशा में आवेदन करने से पूर्व माता या पिता द्वारा परिवार नियोजन का स्थायी विकल्प अपनाना अनिवार्य होगा। प्रथम/द्वितीय प्रसूति की जन्मी जुड़वा अथवा एक साथ एक से अधिक जन्मी सभी बालिकाओं को योजना का लाभ मिलेगा, लेकिन प्रथम प्रसव में जन्मी जुड़वा बालिकाओं को योजना के अंतर्गत लाभ देने के बाद द्वितीय प्रसव से जन्मी तीसरी बालिका को योजना का लाभ प्राप्त नहीं होगा। यदि परिवार में बालिका को विधिवत गोद लिया हो तो उसे पात्र मानते हुए योजना के तहत अन्य मापदण्डों को पूरा करने की दशा में योजना का लाभ दिया जाएगा। योजना के अंतर्गत पंजीकृत बालिका का 18 वर्ष तक विवाह न होने एवं कक्षा बारहवीं तक शिक्षा पूर्ण होने पर ही योजना का लाभ मिलेगा। 
अधिकारियों ने बताया कि योजना में पात्र/पंजीकृत बालिका के नाम पर भारतीय जीवन बीमा निगम (एल.आई.सी.) को पांच वर्ष तक प्रतिवर्ष पांच हजार रूपए अर्थात कुल 25 हजार रूपए विनियोजित किए जाएंगे। एल.आई.सी. को दी गई राशि का दस प्रतिशत अतिरिक्त कार्पस/अंशदान निधि के रूप में एल.आई.सी. को योजना प्रारंभ से दिया जाएगा, ताकि परिपक्वता राशि एक लाख रूपए से कम हो तो कार्पस/अंशदान निधि से अंतर की राशि की प्रतिपूर्ति की जा सके अथवा रूपए के संभावित अवमूल्यन को ध्यान में रखते हुए परिपक्वता राशि बढ़ायी जा सके। आवेदन प्राप्ति से लेकर भुगतान तक सभी औपचारिकताओं की पूर्ति भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा की जाएगी। इसके लिए भारतीय जीवन बीमा निगम एवं राज्य सरकार के मध्य अनुबंध किया जाएगा। एल.आई.सी. द्वारा बालिका के नाम पर प्रथम किश्त जारी करने के उपरांत बॉण्ड/प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा संचालित अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी नियमानुसार बालिका/परिवार को देय होगा। योजना का लाभ लेने के लिए अपने गांव-मोहल्ले के आंगनबाड़ी केन्द्र, संबंधित परिक्षेत्र के पर्यवेक्षक, बाल विकास परियोजना अधिकारी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी अथवा जिला कार्यक्रम अधिकारी से सम्पर्क कर निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए बालिका के जन्म के एक वर्ष के भीतर आवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य है। ऐसे अभिभावक जो बालिका के जन्म के एक वर्ष के अंदर आवेदन प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं, उन्हें यह सुविधा होगी कि आगामी एक वर्ष की अवधि अर्थात बालिका के जन्म के दो वर्ष के अंदर संबंधित जिले के कलेक्टर को अपील आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने दी 152 करोड़ के प्रस्तावों को हरी झण्डी छत्तीसगढ़ में शुरू होगी गजराज परियोजना और जामवंत परियोजना

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वन विभाग की बैठक

रायपुर, 12 सितम्बर 2014/मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जंगली हाथियों और भालुओं के संरक्षण और मानव के साथ उनके सह-अस्तित्व के लिए गजराज परियोजना और जामवंत परियोजना को मंजूरी दी। डॉ. सिंह ने आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में वन विभाग के अधिकारियों की बैठक में दोनों परियोजनाओं के लिए कैम्पा निधि से 152 करोड़ रुपए के प्रस्तावों की स्वीकृति प्रदान की। यह दोनों परियोजनाएं पांच वर्ष के लिए होगी, जिनमें गजराज परियोजना के लिए 132 करोड़ रुपए और जामवंत परियोजना के लिए 20 करोड़ रुपए की कार्य-योजना शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने भालुओं के संरक्षण के लिए विधानसभा के बजट सत्र में जामवंत परियोजना और सरगुजा विकास प्राधिकरण की बैठक में गजराज परियोजना लागू करने की घोषणा की थी। इन दोनों परियोजनाओं की मंजूरी से उनकी दोनों घोषणाएं पूरी हो गई हैं। मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री डी.एस. मिश्रा और प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री रामप्रकाश बैठक में शामिल थे।
जंगली हाथियों की समस्या से प्रभावित राज्य के उत्तर पूर्वी सरगुजा और रायगढ़-जशपुर इलाके के सात वनमण्डलों में यह गजराज परियोजना लागू होगी। इनमें जशपुर, बलरामपुर, सरगुजा, सुरजपुर, धरमजयगढ़, रायगढ़ और कोरबा वन मण्डल शामिल हैं।लगभग 26 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रों में इस परियोजना का क्रियान्वयन कर वनों का विकास किया जाएगा। वन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि राज्य में फिलहाल 250 हाथियों का रहवास है। राज्य निर्माण के समय मात्र 33 हाथी यहां मौजूद थे। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में उनके खाने-पीने के लिए पर्याप्त जंगल मौजूद होने के कारण उनकी आबादी यहां बढ़ रही है। मुख्य रूप से हाथी यहां ओडिशा और झारखण्ड राज्य से होकर प्रवेश करते हैं। गजराज परियोजना के अंतर्गत हाथियों के ग्रामीण क्षेत्रों में आक्रमण से बचाव के लिए सोलर फेंसिंग किया जाएगा। वन क्षेत्रों के लगभग छह सौ गांवों के समीप हाथियों के प्रवेश को रोकने के लिए एक हजार किलोमीटर लम्बाई में सोलर फेंसिंग लगाए जाएंगे। वन क्षेत्रों में हाथियों के लिए रूचिकर भोजन वाले पेड़ पौधे जैसे बांस आदि लगाए जाएंगे। जंगलों में हाथियों के लिए तालाब और स्टॉप डेम भी बनाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि प्रकाश की मौजूदगी से हाथी दूर भागते हैं। इसलिए करीब छह सौ गांवों में सोलर मास्ट की व्यवस्था की जाएगी। लोगों को हाथियों से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा। हाथी मित्र दल गठित कर उनके माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाएगा। हाथियों की समस्या से निपटने के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय हाथी प्रबंधन समिति गठित की जाएगी।
जामवंत परियोजना भालुओं से अत्यधिक प्रभावित राज्य के चार वनमण्डल- मारवाही, कटघोरा, कोरिया और मनेन्द्रगढ़ वनमण्डलों में क्रियान्वित होगा। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में भालुओं की संख्या लगभग दस हजार हैं,। राष्ट्रीय औसत 12 प्रति एक सौ वर्ग किलोमीटर की तुलना में मरवाही क्षेत्र में 23 भालू प्रति एक सौ वर्ग किलोमीटर हैं। जामवंत परियोजना के अंतर्गत प्रभावित क्षेत्रों में फलदार पौधे जैसे महुआ, बेर आदि लगाए जाएंगे। भालुओं के रहने के गुफा और उसके आसपास की पहचान कर उसका प्रबंधन किया जाएगा। भालुओं के बचाव के लिए हेल्प सेन्टर भी खोले जाएंगे। ग्राम पंचायत, स्थानीय ग्रामीण, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों, इको क्लब और स्कूली बच्चों में भी जागरूकता लाकर उनका सहयोग लिया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, वन विभाग के सचिव श्री अनिल साहू, राज्य कैम्पा संचालन समिति की सदस्य सुश्री नीतू गुप्ता, मुख्य वन्य प्राणि अभिरक्षक डॉ. बी.एन. द्विवेदी, मुख्य वन संरक्षक सर्वश्री श्री आर.बी.पी सिन्हा, के.सी. बेवर्ता और बी.पी. नोन्हारे उपस्थित थे।

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