शारदीय नवरात्रि में धान बोनस विधानसभा विशेष सत्र

किसानों के हर सुख-दुख में सरकार उनके साथ: डॉ. रमन सिंह

रायपुर, 22 सितम्बर 2017 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने यहां विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में किसानों के लिये 2101 करोड़ 54 लाख 77 हजार रूपये का द्वितीय अनुपूरक अनुदान मांग पेश करते हुए इस आशय की विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री ने विशेष सत्र बुलाने के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा- दीपावली से पहले हम अपने किसानों के चेहरों पर मुस्कान देखना चाहते है। इसी उद्देश्य से उन्हें धान का बोनस दिलाने के लिये विशेष सत्र बुलाकर द्वितीय अनुपूरक अनुदान प्रस्ताव यहां पेश किया गया है, ताकि सदन से स्वीकृति लेकर किसानों को इस राशि का वितरण किया जा सके। डॉ. सिंह ने सभी लोगों को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं दी। 
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों की आर्थिक बेहतरी के लिये राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसके परिणाम स्वरूप खेती के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।  इसमें कृषि जगत के योगदान को देखते हुए भी इस वृद्धि का लाभ किसानों को बोनस के रूप में मिलना चाहिए। उन्होंने कहा- हमारी सरकार किसानों के हर सुख-दुःख में उनके साथ खड़ी है। विधानसभा का एक विशेष सत्र किसानों को समर्पित करना हमारे संकल्प को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा- राज्य निर्माण के प्रारंभिक वर्षों में प्रदेश सरकार का पूरा बजट सिर्फ 11 हजार करोड़ रूपये के आसपास हुआ करता था, लेकिन आज 11 हजार करोड़ रूपये अकेले किसानों को धान की कीमत के रूप में दे रहे हैं। हमने खेती की लागत को कम करने के लिये कई उपाय किये है। सहकारी समितियों से किसानों को दिये जाने वाले कृषि ऋणों पर ब्याज की दर को 14 प्रतिशत से क्रमशः घटाते शून्य प्रतिशत कर दिया है। ऐसा करने वाले छत्तीसगढ़ पहला राज्य है। ब्याज मुक्त ऋण सुविधा के फलस्वरूप आज छत्तीसगढ़ के किसान सहकारी समितियों से 3500 करोड़ रूपये का ऋण ले रहे हैं और हर साल 11 हजार करोड़ रूपये का धान बेच रहे हैं। धान खरीदी की अनूठी कम्प्यूटरीकृत पारदर्शी व्यवस्था की गई है। सरकार के इन प्रयासों के फलस्वरूप किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा  राज्य सरकार ने स्वास्थ्य बीमा योजना में प्रदेश के प्रत्येक परिवार को अब सालाना 30 हजार रूपये के स्थान पर 50 हजार रूपये तक इलाज की सुविधा देने जा रही है। राज्य के किसानों को भी स्मार्ट कार्ड पर 50 हजार रूपए तक निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत् 36 लाख परिवारों को निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन देने का कार्य तेजी से शुरू कर दिया है। किसान परिवारों को भी इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा- किसानों के लिए न्यूनतम 2 प्रतिशत प्रीमियम पर फसल बीमा की व्यवस्था की गई है और लगभग 13 लाख् 50 हजार किसानों को इसमें शामिल किया जा चुका है। सूखे की स्थिति को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा के तहत 200 दिनों तक रोजगार देने की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी को भी रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़े। इसके अलावा प्रभावित गांवों में पेयजल के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
प्रदेश में सूखे की स्थिति की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- हम सूखा प्रभावित किसानों को तीन प्रकार से मदद करना चाहते हैं। उन्हें राजस्व पुस्तक परिपत्र (आर.बी.सी) 6-4 के तहत फसल क्षति का मुआवजा दिया जाएगा। दीपावली तक 2100 करोड़ रूपए से ज्यादा धान का बोनस उन्हें मिलेगा, जो उनके संजीवनी का काम करेगा। इसके अलावा उन्हें फसल बीमा योजना का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा 2015 में भी हमने किसानों को सूखे के दौरान लगभग 1800 करोड़ रूपए का राहत पैकेज दिया था।

विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र : धान बोनस के लिए 2101 करोड़ 55 लाख रूपए की अनुपूरक अनुदान मांग ध्वनिमत से पारित

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का जो लक्ष्य देश को दिया है, उसके अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने भी अपना रोडमैप तैयार कर लिया है। डॉ. सिंह ने कहा-देश की आजादी के 75 साल वर्ष 2022 में पूरे होंगे। इस लक्ष्य से पहले ही वर्ष 2020 तक प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ में हमारी तैयारी शुरू हो गई है और इसके लिए हमारी पूरी टीम लगी हुई है। केन्द्र और राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से छत्तीसगढ़ के किसानों के जीवन में बड़ा परिवर्तन आया है।
मुख्यमंत्री ने आज शाम यहां विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के समापन अवसर पर इस आशय के विचार व्यक्त किए। उल्लेखनीय है कि एक दिवसीय सत्र के प्रारंभ में मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की ओर से किसानों को वर्ष 2016 के उपार्जित धान का बोनस देने के लिए 2101 करोड़ 54 लाख 77 हजार रूपए की अनुपूरक अनुदान मांग पेश करते हुए इस पर चर्चा की भी शुरूआत की। पक्ष और विपक्ष के बीच दिन भर की चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने अनुपूरक अनुदान प्रस्ताव पर अपना विस्तृत वक्तव्य दिया। उनके वक्तव्य के बाद सदन में यह अनुदान प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा-किसानों के हित में सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। विधानसभा का यह विशेष सत्र किसानों पर केन्द्रित करने का यह एक अनूठा अवसर है। डॉ. सिंह ने कहा-किसानों को बोनस देने के लिए 2100 करोड़ रूपए से ज्यादा राशि का प्रस्ताव है। इसमें अगर-मगर की कोई बात ही नहीं है। यह राशि सीधे किसानों के खाते में जाना है। मैं अक्सर हर दूसरे-तीसरे दिन राज्य का दौरा करता हूं। हर जगह मैंने देखा है कि प्रदेश के किसानों ने धान बोनस की घोषणा का भारी उत्साह के साथ स्वागत किया है। हाल ही में राजनांदगांव के कार्यक्रम में जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों के 70 हजार किसानों ने आकर बोनस के लिए प्रदेश सरकार को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा-इस बार धान का यह बोनस हमारे किसानों के लिए दीपावली के तोफे के रूप में होगा। सरकार किसानों के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा-इस बार राज्य बड़े हिस्से में सूखे की स्थिति निर्मित हुई है। हमने सूखा प्रभावित किसानों की मदद के लिए पुख्ता इंतजाम किया है। उन्हें राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के तहत मुआवजा मिलेगा, ग्रामीणों को मनरेगा में 100 दिनों के स्थान पर 200 दिनों का रोजगार दिया जाएगा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का भी उन्हें लाभ मिलेगा। इसके अलावा धान का बोनस भी उनको दिया जाएगा।
डॉ. सिंह ने कहा-किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार प्रारंभ से ही सजग और सक्रिय है। हमने वर्ष 2013-14 में किसानों को उपार्जित धान पर लगभग 2374 करोड़ रूपए का बोनस दिया था। वर्ष 2015 में भी सूखे की स्थिति निर्मित हुई थी, तब उन्हें लगभग 1800 करोड़ रूपए का राहत पैकेज दिया गया था। डॉ. रमन सिंह ने कहा-किसानों को खेती से संबंधित योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रत्येक दो गांवों के बीच एक किसान संगवारी नामांकित किया गया है और हर जिला मुख्यालय में किसान-मितान केन्द्र खोले गए हैं।
डॉ. सिंह ने कहा-न सिर्फ धान पर, बल्कि हमारी सरकार किसानों को गन्ना और तेन्दूपत्ते के संग्रहण में भी बोनस दे रही है। लगभग 14 लाख तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के लिए संग्रहण पारिश्रमिक की दर में 300 रूपए की वृद्धि की गई है और उन्हें 1800 रूपए प्रति एक हजार गड्डी तेन्दूपत्ते पर पारिश्रमिक दिया जा रहा है। डॉ. सिंह ने कहा-किसानों पर खेती की लागत का बोझ कम करने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। किसानों को 14-15 प्रतिशत ब्याज पर खेती के लिए ऋण लेना पड़ता था। हमारी सरकार ने वर्ष 2004 में इस ब्याज दर को घटाकर 9 प्रतिशत कर दिया और साल-दर-साल क्रमशः कम करते हुए अब उन्हें शून्य ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है। डॉ. सिंह ने कहा-ब्याजमुक्त ऋण सुविधा का यह सकारात्मक असर हुआ है कि वर्ष 2001 में जहां केवल साढ़े तीन लाख किसानों ने सिर्फ 190 करोड़ रूपए का ऋण लिया था, लेकिन आज शून्य प्रतिशत ब्याज पर दस लाख से ज्यादा किसान साढ़े तीन हजार करोड़ रूपए कृषि ऋण प्राप्त कर रहे हैं और सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर लगभग ग्यारह हजार करोड़ रूपए का धान बेच रहे हैं। डॉ. सिंह ने कहा-किसानों को सिंचाई के लिए निःशुल्क बिजली दी जा रही है। कृषक जीवन ज्योति योजना के तहत पांच हार्सपावर तक सिंचाई पम्पों के लिए सालाना 7500 यूनिट बिजली उन्हें मुफ्त मिल रही है, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को सिंचाई कार्य के लिए पूरी बिजली निःशुल्क दी जा रही है। डॉ. सिंह ने कहा-प्रदेश सरकार ने किसानों को खेती के साथ-साथ कृषि क्षेत्र से सम्बद्ध पशुपालन, मछलीपालन जैसे व्यवसायों में भी जोड़ने के उपाय किए हैं। इसके लिए हमने कृषि बजट में ग्यारह हजार 800 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में वर्ष 2003-04 से वर्ष 2016-17 तक उठाए गए कदमों और उपलब्धियों की भी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि राज्य में दो फसली खेती का रकबा पांच लाख 46 हजार हेक्टेयर से बढ़कर दस लाख 47 लाख हेक्टेयर हो गया है। अर्थात इसमें 86 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। धान उत्पादन में 39 प्रतिशत और गेहूं के उत्पादन में 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उद्यानिकी फसलों का रकबा 46 हजार हेक्टेयर से बढ़कर दो लाख 50 हजार हेक्टयर हो गया है अर्थात इसमें 441 प्रतिशत की वृद्धि रिकार्ड की गई है। बीज उत्पादन 45 हजार क्विंटल से बढ़कर एक लाख 50 हजार क्विंटल और प्रमाणित बीज वितरण का आंकड़ा 73 हजार क्विंटल से बढ़कर 12 लाख क्विंटल तक पहुंच गया है। बीज उत्पादन का रकबा 2462 हेक्टेयर से बढ़कर 46 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। खेती के लिए खाद वितरण सात लाख मीटरिक टन से बढ़कर 14 लाख मीटरिक टन हो गया है। इस प्रकार इसमें 103 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उद्यानिकी फसलों का उत्पादन 18 लाख मीटरिक टन से बढ़कर 100 लाख मीटरिक टन तक पहुंच गया है। इसमें 460 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया - वर्ष 2003-04 की स्थिति में अनुदान पर सिंचाई पम्प वितरण शून्य था, जो आज बढ़कर दो लाख 09 हजार तक पहुंच गया है। सूक्ष्म सिंचाई का रकबा शून्य हेक्टेयर से बढ़कर 80 हजार 615 हेक्टेयर तक विस्तारित हुआ है। मछली बीजों का उत्पादन 37 करोड़ से बढ़कर 198 करोड़ तक पहुंचा है । अर्थात इसमें 438 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मछली उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल  है। हमारे यहां कुल मछली उत्पादन एक लाख दस हजार मीटरिक टन से बढ़कर तीन लाख 75 हजार मीटरिक टन हो गया है। इसमें 241 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। डॉ. सिंह ने कहा-राज्य सरकार खेती-किसानी की शिक्षा पर भी काफी ध्यान दे रही है। प्रदेश के युवाओं में खेती के लिए रूझान बढ़ा है। राज्य में सरकारी कृषि कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर 17 और निजी कृषि महाविद्यालयों की संख्या शून्य से बढ़कर 15, शासकीय उद्यानिकी कॉलेजों की संख्या शून्य से बढ़कर दो, शासकीय कृषि इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या भी शून्य से बढ़कर दो हो गई है। राज्य के कृषि कॉलेजों में सीटों की संख्या 276 से बढ़कर दो हजार 825 तक पहुंच गई है। कृषि विज्ञान केन्द्रों की संख्या चार से बढ़कर बीस हो गई है। प्रदेश में कृषि प्रशिक्षण अकादमी की स्थापना की गई है। किसान खेती के लिए जरूरी उपकरण किराए भी ले सकें, इसके लिए राज्य में 782 कृषि यंत्र सेवा केन्द्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया-प्रदेश के 92 विकासखण्डों में शहीद वीरनारायण सिंह बहुउद्देशीय कृषक सेवा केन्द्र और 360 कृषक सूचना केन्द्र स्थापित किए गए हैं। मिट्टी परीक्षण के लिए 26 स्थायी और 174 मिनी प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है। राज्य ने मिट्टी परीक्षण के बाद किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड देने का एक बड़ा कीर्तिमान बनाया है।  किसानों को लक्ष्य से 112 प्रतिशत अधिक, अर्थात 43 लाख 38 हजार स्वायल हेल्थकार्ड बांटे जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने सदन को बताया: इस वजह से अल्प सूचना पर बुलाया गया विशेष सत्र

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां विधानसभा में धान बोनस के लिए अल्प सूचना पर एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की वजह बताते हुए कहा- अध्यक्ष महोदय, चूंकि यह सत्र अल्प सूचना पर बुलाया गया है, इसलिए मैं इसकी भूमिका पर कुछ बोलना चाहता हूं कि यह सत्र बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी? एक दिन का यह सत्र क्यों आवश्यक था? अध्यक्ष महोदय, क्योंकि आकस्मिकता अग्रिम में अधिकतम 100 करोड़ रूपए का व्यय किया जा सकता है, लेकिन यहां 2100 करोड़ रूपए का व्यय अनुमानित है। इसलिए विधानसभा का यह विशेष सत्र बुलाया गया है। चूंकि यह छत्तीसगढ़ के किसानों से जुड़ा विषय है और प्रदेश के अन्न दाता इंतजार कर रहे थे कि कब उन्हें अनुदान की राशि, बोनस के रूप में मिले। 
मुख्यमंत्री ने कहा-देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि सब कुछ इंतजार किया जा सकता है, लेकिन खेती इंतजार नहीं कर सकती। बारिश में थोड़ी चूक हो जाए, बारिश न हो तो किसानों के जीवन में परेशानी आती है। डॉ. सिंह ने कहा-इस बार नवरात्रि किसानों के लिए अच्छा संदेश लेकर आयी है, जो बारिश हुई है, उसका असर भी छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा-मुझे लगता है कि आज जब पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्य चर्चा करेंगे तो खेती को लाभदायक कैसे बनाया जाए यह मूल विषय रहेगा। डॉ. सिंह ने राज्य में विद्युत सुविधाओं के विस्तार पर भी प्रकाश डाला और कहा-इसका लाभ किसानों को मिल रहा है। जब छत्तीसगढ़ सरकार बनी, उस समय 75 हजार किसानों के पास ही पम्प कनेक्शन थे, आज यह संख्या बढ़कर चार लाख 25 हजार तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ने कहा-दीपावली से पहले हम अपने किसानों के चेहरों पर मुस्कान देखना चाहते हैं। उनकी बेहतरी के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसके परिणाम स्वरूप खेती के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसमें कृषि जगत के योगदान को देखते हुए भी इस वृद्धि का लाभ किसानों को बोनस के रूप में मिलना चाहिए। हमारी सरकार किसानों के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ी है।

अंत्योदय और एकात्म मानववाद के प्रवर्तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में उनके जीवन पर केन्द्रित महानाट्य ‘गाथा पंडित दीनदयाल’ लाईट एवं साउण्ड शो का मंचन आज रात यहां मेडिकल कॉलेज के सभागार में किया गया। कार्यक्रम में  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह  मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल ने की। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने नाटक के समापन पर कलाकारों को मंच पर सम्मानित किया। डॉ. सिंह और श्री अग्रवाल सहित सभी अतिथियों ने महानाट्य के प्रारंभ होने के पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। नाटक का मंचन नागपुर की ‘प्रयास बहुउद्देशीय संस्था’ के कलाकारों ने किया। इस महानाट्य के मुख्य मार्गदर्शक श्री जयप्रकाश गुप्ता और आकल्पक श्री शक्ति सिंह ठाकुर थे। जनसंपर्क विभाग के संचालक सह संयुक्त सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस, गृह मंत्री श्री रामसेवक पैकरा, कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, राजस्व मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रमशीला साहू, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री भईयालाल राजवाड़े और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक, सहित अनेक विधायक, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे। 

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