शरद पूर्णिमा

पूनों आई है चँदनियाँ में रात नहाई

पूनो आई है ।
चंदा दुल्हन सा लागे,
तारों की चूनर ओढ़े
लगे गगन न चाँदी की,
गागर लुढ़काई ॥ पूनो ..............

तार खिंचे चमकीले सुन्दर,
धरती अंबर जोड़े,
पवन नशीले मतवारे ने
वीणा है बजाई ॥ पूनो ..............

ठहरे पानी की चादर पर,
अंबर विहंस उतर आया ॥
चतुर चितेरे ने चंदा की,
चिंतवन है चुराई ॥ पूनो ..............

ऐसे मीठे मधुमौसम में
मधुबन महक गया
लगे कन्हैया ने कूंजों से
टेर लगाई ॥ पूनो ..............