शक्ति की भक्ति में डूबे नवरात्रि के नज़ारे

चैत्र नवरात्रि की सतरंगी छटा

आकाशवाणी चौक स्थित काली मंदिर ट्रस्ट के सचिव डीके दुबे ने बताया कि मंदिर में परंपरानुसार ज्योति जलाई गई। मंदिर में पहले दिन की ही भांति दूसरे दिन भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर में लगभग 3401 ज्योति कलश जली हैं। मंदिर में पंचमी को कन्या भोज का आयोजन किया जाएगा। अष्टमी 14 अप्रैल को मनाई जाएगी।

पुरानीबस्ती स्थित शीतला मंदिर के पुजारी नीरज सैनी ने बताया कि इस बार मंदिर में लगभग 900 ज्योति जली हैं।

बीरगांव स्थित बंजारी माई मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हरीश भाई जोशी ने बताया कि इस बार भी मंदिर में लगभग 8 हजार मनोकामना ज्योति कलश जले हैं। रविवि परिसर स्थित बंजारी धाम मंदिर के पुजारी भगवान तिवारी ने बताया कि मंदिर में लगभग 1600 ज्योति जली हैं। बंधवापारा स्थित सतबहनिया मंदिर के पुजारी उमेश पांडेय ने बताया कि मंदिर में चैत्र नवरात्रि में इस बार 120 एवं 125 के करीब मनोकामना ज्योति कलश स्थापित हैं। कंकाली मंदिर भी रोशनी से जगमगा रहा है।

मां दुर्गा भवानी की भक्ति एवं आराधना का पावन पर्व चैत्र नवरात्रि की सतरंगी छटा राजधानी में देखते बन रही है। नवरात्रि के पहले दिन जहां भक्त माता के अलौकिक एवं आकर्षक स्वरूप को करीब से निहारने उनके दरबार में उमड़े, वहीं दूसरे दिन शनिवार को भी भजन एवं जसगीतों से राजधानी गुंजायमान रही।

यह भक्तिमय नजारा राजधानी के सर्वाधिक प्राचीन मंदिर राजराजेश्वरी महामाया मंदिर सहित अन्य मंदिरों में रहा। राजधानी के र्शी राजराजेश्वरी महामाया मंदिर, शीतला मंदिर, काली माता मंदिर, दंतेश्वरी मंदिर, बंजारी धाम मंदिर, बीरगांव बंजारी माई मंदिर, कंकाली मंदिर एवं सिद्धेश्वरी मंदिर सहित समस्त देवी मंदिरों में मनोकामना ज्योति कलश एवं माता के अलौकिक स्वरूप को देखने भक्त दूसरे दिन भी मंदिरों में उमड़े। नवरात्रि के दूसरे दिन माता के दूसरे रूप ब्रम्हचारिणी की विधि-विधान से पूजा की गई।

महामाया मंदिर के पुजारी मनोज शुक्ला ने बताया, प्राचीन मंदिर होने के कारण यहां माता के भक्तों की अपार भीड़ उमड़ रही है। मंदिर में सुबह 4 बजे से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर में दूसरे दिन ब्रम्हचारिणी की पूजा की गई। मंदिर में सुबह 4 बजे माता के भव्य र्शृंगार के बाद 8 बजे उनकी आरती की गई। वहीं दोपहर 12.30 बजे आरती के बाद 1.30 बजे भोग आारती की गई। धूप को देखते हुए भीड़ कुछ कम रही, लेकिन शाम को जबर्दस्त भीड़ हुई। मंदिर में शाम 5 बजे शंभू सोनकर जस नारायण पार्टी का भजन एवं जसगीत हुआ। 9 बजे जस गणराज सत्संग द्वारा भजन व जसगीत प्रस्तुत किया गया। रविवार को तृतीया एवं चतुर्थी की तिथि एक ही दिन पड़ रही है। 11 अप्रैल को पंचमी मनाई जाएगी, तो 14 अप्रैल को अष्टमी पर मंदिर में शाम 5 बजे से हवन होगा। 8 बजे पूर्णाहुति होगी एवं 15 अप्रैल को मंदिर में रामनवमी पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। 14 की रात्रि ही ज्योति कलश का विसर्जन होगा।

हिन्दी