विश्व आदिवासी दिवस पर मुख्यमंत्री ने दी बधाई

आदिवासियों की तरक्की और खुशहाली के लिए सरकार वचनबद्ध: डॉ. रमन सिंह

रायपुर, 08 अगस्त 2017 - छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कल नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज सहित सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी है। डॉ. सिंह ने विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर आज यहां जारी बधाई संदेश में आदिवासी समाज की तरक्की और खुशहाली की कामना की है। 
डॉ. सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं के जरिये छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की तरक्की और खुशहाली के लिए वचनबद्ध है और इस दिशा में राज्य के आदवासी बहुल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, दूर संचार और कौशल उन्नयन सहित सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा - सरगुजा और उत्तर क्षेत्र तथा बस्तर और दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरणों का गठन किया गया है। इन प्राधिकरणों के जरिये अनुसूचित जनजाति बहुल इलाकों में वहां के जनप्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श कर विकास और निर्माण के कार्य निरंतर करवाए जा रहे हैं। बस्तर और सरगुजा में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इन्हीं प्राधिकरणों में प्राप्त सुझावों के आधार पर की गई है। उन्होंने कहा - नक्सल हिंसा पीड़ित जिलों के बच्चों को शिक्षा की बेहतर सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना का संचालन किया जा रहा है और इसके अंतर्गत 11वीं और 12वीं के बच्चों के लिए सभी पांच संभागीय मुख्यालयों में प्रयास आवासीय विद्यालयों की स्थापना की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा - इन विद्यालयों के बच्चों को बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों तथा आई.आई.टी. जैसे राष्ट्रीय स्तर के उच्च तकनीकी शिक्षा संस्थानों में प्रवेश मिला है। दंतेवाड़ा जिले के ग्राम जांवगा में पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर एजुकेशन सिटी की स्थापना की गई है। उसी तर्ज पर सुकमा जिले में भी एजुकेशन सिटी परिसर विकसित किया गया है। नक्सल प्रभावित जिलों के विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिए ब्याज मुक्त ऋण सुविधा दी जा रही है। पूरे प्रदेश में प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के जरिये तेन्दूपत्ता संग्रहण में लगे तेरह लाख 60 हजार परिवारों के लिए इस वर्ष संग्रहण दर 1500 रूपए से बढ़ाकर 1800 रूपए प्रति मानक बोरा कर दिया गया है। बड़ी संख्या में इसका लाभ आदिवासी परिवारों को भी मिल रहा है। आदिवासी किसानों को सौर सुजला योजना के तहत पांच हार्स पावर के साढ़े चार लाख रूपए कीमत का सोलर सिंचाई पम्प सिर्फ 10 हजार रूपए में और तीन हार्स पावर का साढ़े तीन लाख रूपए का सोलर पम्प केवल सात हजार 500 रूपए के अंशदान पर दिया जा रहा है। डॉ. सिंह ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी राज्य सरकार की वचनबद्धता प्रकट की है। उन्होंने इस अवसर पर समाज के सभी लोगों के स्वस्थ, सुदीर्घ और खुशहाल जीवन की कामना की है।

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