रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा

रायपुर, 01 जनवरी 2008 - उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, जनशक्ति नियोजन मंत्री श्री हेमचंद यादव ने आज यहां अधिकारियों की समीक्षा बैठक में कहा कि प्रदेश के महाविद्यालयों में रोजगार उपलब्ध कराने वाले विषयों का समावेश करते हुये पाठयक्रम तैयार किया जाना चाहिए। श्री हेमचंद यादव उच्च शिक्षा विभाग एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव श्री पी. रमेश कुमार के साथ विभागीय कार्यों के पिछले वर्षों में प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।

सर्वप्रथम श्री यादव ने प्रदेश के महाविद्यालयों के रिक्त पदों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने रिक्त पदों को यथाशीघ्र भरने के निर्देश दिये। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लगभग सभी पदों के भरे जाने के प्रस्ताव लोक सेवा आयोग को भेजे जा चुके हैं। उनमें विभागीय पदोन्नति तथा सीधी भर्ती (बैकलाक सहित) के पद सम्मिलित है। प्रदेश में केवल दो महाविद्यालय भवनविहीन और भूमिविहीन हैं इनके लिये प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। भूमि उपलब्ध होते ही भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा।

श्री यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बाहुल्य प्रदेश है। अत: इस प्रदेश में शिक्षा के मामले में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना बहुत आवश्यक है। सुदूर अंचलों के महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, तो शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की भरमार है और यह भी ध्यान रखा जाना चाहिये कि शिक्षक समय पर और महाविद्यालयों में उपस्थित होकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें और शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखने के लिये प्रत्येक जिलों में निगरानी कमेटी का गठन किया जाए।

श्री यादव ने कहा कि महाविद्यालयों द्वारा उन्हीं पुस्तकों का क्रय किया जाए जिनके विषय उनके यहां संचालित हैं। शासकीय धनराशि का उपयोग सोच-समझकर किया जाना चाहिए। समीक्षा के दौरान उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री पी.रमेश कुमार ने बताया कि केन्द्र शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को प्रमुखता की सूची में रखते हुये आदिवासी अंचलों में महाविद्यालयों की स्थापना हेतु 10 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। प्रदेश में अभी भी 46 विकासखण्ड मुख्यालय महाविद्यालय विहीन है।

विभाग के सचिव श्री पी. रमेश कुमार ने बताया कि प्रदेश में खेलकूद को बढ़ावा देने के लिये उच्च शिक्षा विभाग एवं खेलकूद विभाग के समन्वय से नया प्लान तैयार किया जा रहा है। इसे अगले शिक्षण सत्र से लागू किया जायेगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के महाविद्यालयों में पहली बार एकेडमिक कैलेण्डर लागू किया गया है।

तकनीकी शिक्षा विभाग के विषय में श्री यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में उन्हीं ट्रेडों को शिक्षा दी जानी चाहिए जिसके उद्योग प्रदेश में स्थापित हैं। जैसे चावल मिलें पूरे प्रदेश में स्थापित है अत: आई.टी.आई. में इन उद्योगों से संबंधित विषयों का समावेश किया जाना चाहिए। समीक्षा बैठक में संयुक्त संचालक श्री सुब्रमणियम ने विभिन्न प्रशासनिक तथा अन्य जानकारियों का विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया। समीक्षा बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव श्री बी.एल.तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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