मौसमी बीमारियों की रोकथाम और उपचार

रायपुर, 10 अप्रैल 2017 - स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को गर्मियों में संक्रामक मौसमी बीमारियों की रोकथाम ओरं उपचार के लिए सकारात्मक पहल करने के निर्देश दिए है। विभाग ने इस दिशा में विभाग के मैदानी अमले कोे मुख्यालय में नियमित रूप से रहकर क्षेत्र की स्थिति पर निगरानी रखने को कहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उपस्वास्थ्य केन्द्रों के अलावा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों के पास पर्याप्त मात्रा में जीवनरक्षक दवाईयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। इसके साथ ही सूचना तंत्र विकसित कर मौसमी बीमारियों पर सतत् निगरानी रखी जाय। संचालक स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा इस संबंध में प्रदेश के सभी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र भी जारी कर दिया गया है।
    विभाग ने  मौसमी बीमारियों के रोकथाम और उपचार के लिए चिकित्सा अधिकारियों को कार्ययोजना  तैयार रखने को कहा है, ताकि आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराया जा सके।  अंदरूनी क्षेत्रों के गांवों पर भी ग्रीष्मकालीन बीमारियों के रोकथाम एवं उपचार के लिए प्राथमिकता के तौर पर नजर रखने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा है कि मैदानी स्वास्थ्य अमलों  द्वारा नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण कर मौसमी बीमारी की स्थिति पर निगरानी रखी जाये और जानकारी मिलने पर तत्काल चिकित्सा दल के माध्यम से सहायता सुलभ कराया जायेे। उन्होंने कहा कि अंदरूनी क्षेत्र के बसाहटों में चिकित्सा सुविधा मुहैया कराकर, क्षेत्र के ग्रामीणों को स्वास्थ्य शिक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी दी जाये। जिसके तहत शुद्ध पेयजल का उपयोग, गरम एवं ताजा भोजन का सेवन, स्वच्छता एवं साफ-सफाई तथा बीमार होने पर तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र में उपचार कराये जाने का परामर्श ग्रामीणों को दिया जाये। मौसमी बीमारी की सूचना प्राप्त करने के लिए सूचना तंत्र विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि इस दिशा में स्वास्थ्य शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास इत्यादि विभागों के मैदानी अमले के साथ ही पंचायत पदाधिकारियों का सहयोग लिया जाये। जिससे मौसमी बीमारी की सूचना मिलने पर तत्काल प्रभावित क्षेत्र को सहायता सुलभ करायी जा सके।
 

लू के लक्षण और बचने के उपाय-
 ग्रीष्म ऋतु में गर्मी के कारण लू लगने की संभावना रहती है। यह कभी कभी जानलेवा भी साबित हो सकती है, लेकिन कुछ सरल उपाय का पालन कर लू से बचा जा सकता है। इसके लक्षण बहुत तेज बुखार, पसीना न निकालना, सर मे दर्द, हाथ पैर में दर्द, त्वचा का लाल होना, चक्कर आना, बेहोशी इत्यादि है। लू से बचने के उपाय जहां तक संभव हो दोपहर के धूप में निकलने से बचे, दोपहर मे अगर धूप में निकलना जरूरी हो तो खाली पेट घर से बाहर न निकले, शरीर को पूरी तरह ढकने वाले सफेद या हल्के रंग के सूती कपड़ा पहने, सिर और चेहरे को भी कपड़े से ढक कर रखे, आंखो के बचाव के लिये धूप का चश्मा उपयोग कर सकते है। दोपहर की गर्मी में अधिक शारीरिक श्रम से बचे और यदि धूप में कार्य  करना अनिवार्य हो तो हर आधे घंटे के बाद 10 मिनट के लिये छांव मे आराम करे, पानी एवं अन्य तरल पदार्थाें का अधिक से अधिक सेवन करे।  मादक पदार्थों के सेवन से बचे । चाय अथवा  काफी का अधिक सेवन न करे। उपरोक्त इन उपायो का पालन कर  लू से बचा जा सकता है।  

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