मूल पाठ रमन के गोठ 21वीं कड़ी रेडियो प्रसारण

क्या आप रमण गोठ सुनने से चुक गये? आपके लिए खास प्रस्तुति - ‘रमन के गोठ’ : रेडियो आकाशवाणी से प्रसारित विशेष कार्यक्रम दिनांक 14 मई, 2017, समय प्रातः 10.45 से 11.05 बजे का शब्दशः आलेख

श्रोताओं नमस्कार! (पुरूष उद्घोषक) - आकाशवाणी के विशेष प्रसारण ‘रमन के गोठ’ में हम, सभी श्रोताओं का हार्दिक स्वागत करते हैं, अभिनंदन करते हैं। कार्यक्रम की इक्कीसवीं कड़़ी के लिए आकाशवाणी के स्टुडियो में माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी पधार चुके हैं।
डॉक्टर साहब नमस्कार, बहुत-बहुत स्वागत है इस कार्यक्रम में।
मुख्यमंत्री जी

धन्यवाद। आपका भी और अपने रेडियो व टीवी सेट् पर के सामने बैठकर मुझे सुन रहे श्रोताओं का भी। 
जम्मो संगी-जहुंरिया, सियान-जवान, महतारी-बहिनी मन ला जय जोहार।
महिला उद्घोषक

मुख्यमंत्री जी, इस वर्ष छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा कक्षा दसवीं और कक्षा बारहवीं के नतीजे समय पर घोषित कर दिए गए हैं। समय पर नतीजे घोषित होने पर बधाई। इस बार के नतीजे बताते हैं कि ग्रामीण अंचलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के जो प्रयास किए जा रहे हैं, वे सफल हो रहे हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी क्या आपने भी इस तरह से विश्लेषण किया है और इस पर आपकी क्या राय है ?
मुख्यमंत्री जी

इस साल के नतीजे विगत वर्ष से बेहतर हैं। ज्यादा संख्या में बच्चे पास हुए हैं। ज्यादा घरों में खुशियां आई हैं, इसके लिए बच्चों, पालकों और सभी टीचर्स को मैं बधाई देता हूॅ। किसी कारण से जो बच्चे पास नहीं हो पाए या अपेक्षित अंक नहीं पा सके, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है बल्कि ज्यादा तैयारी से आगे परीक्षा दें और अच्छे से पास हों। 
मेरा मानना है कि ऐसी कोई परीक्षा जिंदगी की आखिरी परीक्षा नहीं होती। आगे अनेक अवसर मिलते हैं, जब आप स्वयं को साबित कर सकते हैं। इसलिए बच्चे और उनके माता-पिता किसी तरह का दबाव या शर्म महसूस न करें बल्कि सामान्य रूप से रहते हुए बच्चों का मनोबल बढ़ाएं और आगे की तैयारी करें। 
कक्षा बारहवीं में इस बार अव्वल पांच जिलों में बालोद, मुंगेली, कांकेर, बेमेतरा तथा कबीरधाम का नाम है। इन सभी जिलों में शहर बहुत छोटे हैं और इनकी संख्या भी बहुत कम है। गांव अधिक हैं। अतः टॉप फाइव में इन जिलों के आने का मतलब है, गांवों में शिक्षा के स्तर में सुधार।
मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि 27 में से 23 जिलों में लड़कियां आगे हैं। कोण्डागांव, कोरिया, नारायणपुर और सुकमा जिले में लड़के अधिक से संख्या में पास हुए हैं, बाकी सभी जिलों में लड़कियां अधिक संख्या में पास हुईं है। इसका मतलब यह है कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के हमारे प्रयास सफल हो रहे हैं, इस उपलब्धि के लिए मैं आज बेटियों को, उनके पालकों को, उनके स्कूल के, शिक्षक-शिक्षिकाओं को, सभी को बधाई देता हूं।
कक्षा दसवीं के नतीजे भी इसी पैटर्न पर आए हैं। 
कक्षा दसवीं में दंतेवाड़ा, कबीरधाम, कांकेर, जशपुर तथा बालोद जिले टॉप फाइव में है।
कक्षा दसवीं में सिर्फ पांच जिले ऐसे हैं, जहां थोड़ी अधिक संख्या में लड़के पास हुए हैं। ये जिले हैं नारायणपुर, कोण्डागांव, बीजापुर, सुकमा और बलरामपुर। शेष सभी 22 जिलों में लड़कियां अधिक संख्या में पास हुईं है।
दोनों बोर्ड परीक्षाओं मंे जहां पास होने वाली लड़कियों की संख्या लड़कों से थोड़ा कम है, वे आदिवासी बहुल जिले हैं।
इससे भी यह स्पष्ट हो रहा है कि आदिवासी अंचलों में थोड़ी और मेहनत की जाए, तो यहां भी पास होने वाली लड़कियों की संख्या
अधिक हो जाएगी। अभी हालांकि कांटे का मुकाबला है।
कोई आश्चर्य नहीं है कि अगले साल सभी 27 जिलों में लड़कियां ही बाजी मार लें। इस तरह हम स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री जी के आव्हान-‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ को सफल बना रहे हैं। यह ऐसी मजबूत बुनियाद है, जिस पर शिक्षित छत्तीसगढ़ का सपना पूरा करना संभव होगा।
पुरूष उद्घोषक

माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय प्रधानमंत्री जी का ‘स्वच्छ भारत’ के आव्हान से शहरों और गांवों की तस्वीर बदल रही है। हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर कराए गए ‘स्वच्छता सर्वेक्षण’ के नतीजे आए हैं। इसमें छत्तीसगढ़ से ‘अंबिकापुर’ शहर देश में अव्वल आया है। छत्तीसगढ़ में आपने ‘स्वच्छता मिशन’ को हाथों-हाथ लिया है और इसे पूरी प्राथमिकता दी है, लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, आपका क्या मत है?
माननीय मुख्यमंत्री

सबसे पहले तो मैं अंबिकापुर के प्रशासन और जनता को साधुवाद देता हूं, धन्यवाद देता हूं, बधाई देता हूं कि आपने छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया। दो लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में अंबिकापुर को प्रथम स्थान मिलना वास्तव में बड़ी उपलब्धि है। ऐसे सर्वे और रैंकिंग से बेहतर तरीके से काम करने की प्रेरणा हमें मिलती है और जहां कुछ कमियां हैं, उसमें सुधार करने का रास्ता बनता है।
अन्य शहरों को सफलता नहीं मिलने के बहुत से कारण हो सकते हैं। मेरा मानना है कि अभी हम प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। हमने राष्ट्रीय लक्ष्य 2019 के मुकाबले एक वर्ष पहले 2 अक्टूबर 2018 तक छत्तीसगढ़ को स्वच्छता मिशन के मापदण्डों के अनुरूप स्वच्छ बनाने का लक्ष्य रखा है और इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
‘स्वच्छता सर्वेक्षण’ एक आईना है, जो बीच के अंतराल में हमें सचेत करता है कि देश और प्रदेशों की तैयारी कैसी है और किस तरह तेजी से आगे बढ़ना है।
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में मैं यह कहना चाहता हूं कि हम प्रदेश में स्वच्छता की अधोसंरचना और संस्कार निर्माण के लिए एक बेहतर लड़ाई लड़ रहे हैं। राज्य की सामाजिक-आर्थिक-भौगोलिक परिस्थितियों तथा विरासत में मिली समस्याओं को हल करते हुए हमें एक साथ अनेक क्षेत्रों में काम करना पड़ रहा है, जिसके कारण हमें कोई भी सफलता साधारण प्रयासों से नहीं मिलती। हमें असाधारण प्रयास करने पड़ते हैं।
हालांकि अंबिकापुर स्वयं भी इन्हीं समस्याओं से जूझता हुआ आगे बढ़ा है। अंबिकापुर का टीमवर्क, ‘स्वच्छ अंबिकापुर मिशन सहकारी समिति’, महिला सदस्यों द्वारा घर-घर जाकर कचरा संग्रहित करने की प्रणाली, बैटरी-चलित और मानव चलित रिक्शा का उपयोग, अलग-अलग क्षेत्रों में 17 ठोस अपशिष्ट पदार्थों का संचालन, केन्द्र में गीला और सूखा कचरा पृथक करने का काम, पृथक किए गए कचरे को बेचने की प्रणाली का विकास, इस कार्य में संलग्न महिला सदस्यों को ‘यूजर चार्ज’ के रूप में शुल्क की प्राप्ति, स्वच्छता की आदत बनाने कीलिए प्रभावपूर्ण जन-जागरण अभियान आदि का काफी योगदान अंबिकापुर की सफलता में रहा है।
मैं चाहूंगा कि हमारे अन्य शहर अंबिकापुर को ‘रोल-मॉडल’ बनाएं और उनसे सबक लें। यद्यपि हर शहर की विशिष्ट संरचना, परिस्थितियां, समस्याएं, मानव संसाधन, सामाजिक संगठन, प्रशासनिक अमले में प्रेरणा का स्तर तथा इसके बीच से निकलने वाले समाधान होते हैं, जिसके अनुरूप हर जिले, हर शहर को मौलिक प्रयास करने चाहिए।
मेरा मानना है कि अभी किसी को निराश नहीं होना है बल्कि यह प्रेरणा लेना है, जो काम अंबिकापुर में हो सकता है, वह दूसरे शहरों में क्यों नहीं हो सकता और स्वयं अंबिकापुर को अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी है। 
मैं अंतरराष्ट्रीय गायत्री परिवार के संस्थापक, महान चिंतक, आचार्य श्रीराम शर्मा जी के विचार आपके साथ साझा करना चाहता हूं-उन्होंने कहा था-‘‘असफलता यह सिद्ध करती है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नहीं हुआ।’’ इसलिए प्रयासों में कोई कोताही नहीं होना चाहिए।
महिला उद्घोषक

माननीय मुख्यमंत्री जी, आज नतीजों की चर्चा चल पड़ी है। तो एक सबसे बड़े नतीजे के बारे में आपके विचार साझा करने का मन हो रहा है। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 26 मई 2014 को एक ऐतिहासिक नतीजा आया था, देश की जनता ने वर्ष 2014 में हुए आम चुनाव में प्रचण्ड बहुमत से जनादेश देकर माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी को भारत के प्रधानमंत्री के पद पर आसीन किया था। माननीय मोदी जी के प्रधानमंत्रित्व का तीसरा वर्ष इस माह पूरा होगा। इन तीन वर्षों में माननीय मोदी जी की योजनाओं और उपलब्धियों पर आपके विचार, हमारे श्रोता सुनना चाहते हैं। 
मुख्यमंत्री जी

आपको याद होगा कि 26 मई 2014 के पहले देश किस आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और विकास संबंधी समस्याओं से घिरा हुआ था। ‘अनिर्णय’ व ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ का बोलबाला था। भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या बन गई थी। वास्तव में माननीय मोदी जी को मिला जनादेश, देश को समस्याओं के दलदल से बाहर निकालने का जनादेश था। भारत-माता का गौरव लौटाने का जनादेश था।
माननीय मोदी जी ने आते ही एक के बाद एक महत्वपूर्ण फैसले लिए, जिसके कारण भारत सरकार के माथे से ‘अनिर्णय’ और ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ का कलंक मिट गया।
मोदी जी ने अपने आचार-व्यवहार, कठोर-मेहनत और दूरदर्शी निर्णयों से सरकार की ऐसी छवि बनाई कि उसकी धाक देश और दुनिया में जम गई। उनकी कर्मठता का ओज, उनकी वाणी में दिखाई पड़ता है। और हर विषय पर स्पष्ट पारदर्शी, ईमानदार तथा जनहितकारी सोच के साथ, हर फैसले को दृढ़ता से लागू करने की मजबूत इच्छाशक्ति के कारण, वे विश्वास के प्रतीक बन गए।
मोदी जी ने भारत के संसाधनों और संभावनाओं की अलख जगाने के लिए अनेक देशों का दौरा किया, जिससे उन देशों की सरकारों के साथ ही भारतवंशियों को ही विश्वास में लेने का रास्ता बना और इस तरह अल्प कार्यकाल में ही माननीय मोदी जी दुनिया भर में भारतीय अस्मिता, भारतीय संभावनाओं, भारतीय अवसरों के प्रतीक बन गए।
हमारा संविधान, हमारे महान लोकतंत्र की आत्मा है। माननीय मोदी जी ने संविधान की भावनाओं के अनुरूप राज्यों को उनका हक, हिस्सा और भागीदारी दिलाने की पहल की। योजना आयोग को समाप्त किया और नीति आयोग का गठन किया ताकि राज्य सरकारों को संविधान की भावनाओं के अनुरूप विभिन्न राज्यों को सक्रिय रूप से ‘टीम इंडिया’ का सदस्य बनाया जा सके और ‘सहकारी संघवाद’ को मजबूत बनाने की दिशा में अनेक निर्णय लिए।
राज्यों को मिलने वाले राजस्व को 32 से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया गया तथा राज्यों को अपने जरूरत के हिसाब से खर्च करने का अधिकार दिया गया।
बरसों से लंबित खनिज नीति को पूर्णता देकर इसे लागू कराया, साथ ही खनिजों की नीलामी से राज्यों को आर्थिक संसाधन देने का रास्ता बनाया गया। 
संविधान और सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप ‘‘एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार’’ की व्यवस्था लागू करने के लिए ‘जीएसटी कानून‘ को संसद के दोनों सदनों से पारित कराया। इस तरह देश में कर सुधारों के माध्यम से आर्थिक क्रांति का एक नया दौर शुरू हुआ है।
‘जीएसटी’ से संबंधित निर्णय लेने के लिए जो ‘जीएसटी परिषद’ का गठन किया गया है, उसमें भी राज्यों को भागीदारी दी गई है। साथ ही कर राजस्व में राज्य की भागीदारी भी बढ़ाई गई है।
मोदी जी की दृढ़ इच्छा शक्ति से अपने देश की 86 प्रतिशत मुद्रा का ‘विमुद्रीकरण’ करने के मामले में, भारत दुनिया का पहला देश बन गया है।
‘विमुद्रीकरण’ के माध्यम से कालाधन, जाली नोट, आतंकवाद, नक्सलवाद के खिलाफ भी ठोस कदम उठाया जाना संभव हुआ है। 
‘विमुद्रीकरण’ के माध्यम से देशभक्ति, ईमानदारी का वातावरण निर्मित हुआ, जिससे मेहनतकश जनता को यह विश्वास हुआ है कि सरकार, उनकी ईमानदारी की कद्र करती है और उन्हें ईमानदारी का लाभ मिलेगा।
‘विमुद्रीकरण’ के परिणामस्वरूप बैंकों ने आवास ऋणों की ब्याज दरें घटाई, वहीं कैशलेस सोसायटी के निर्माण की दिशा में तेज गति से प्रगति हुई है।
माननीय मोदी जी ने विदेश नीति और रक्षा नीति के बीच के घालमेल को समाप्त करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि हम पड़ोसियों के साथ शांति से रहना चाहते हैं, लेकिन सीमाओं की सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते।
‘सर्जिकल स्ट्राइक’ तथा सेना का मनोबल बढ़ाने से देशवासियों का मनोबल बढ़ा है और आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेन्स‘ की नीति माननीय मोदी जी की दृढ़ता की प्रतीक बन गई है।
चुनाव सुधारों और राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को लेकर पारदर्शिता का निर्णय देश को राजनीतिक शुचिता के मार्ग पर आगे बढ़ाएगा। 
पुरूष उद्घोषक

डॉ. साहब,निश्चित तौर पर माननीय प्रधानमंत्री जी के फैसलों ने भारत की छवि उज्ज्वल की है, वहीं देश को आर्थिक सुदृढ़ता प्रदान की है। उनके फैसलों से राज्यों का मान-सम्मान, पूछ-परख बढ़ी है और वे ‘टीम इंडिया’ के सदस्य के रूप में गौरवान्वित हो रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार के निर्णयों से आम जनता को किस प्रकार लाभ मिल रहा है।
मुख्यमंत्री जी

प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी के करिश्माई नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि उनकी सोच, उनका चिंतन और उनके फैसले आम जनता को लाभ पहुंचाने के लिए ही होते हैं।
जो बातें हमें छोटी-छोटी दिखती हैं, उसका कितना बड़ा महत्व हो सकता है, यह बात मोदी जी बेहतर ढंग से जानते हैं, समझते हैं और ऐसे विषयों को जन-आंदोलन का रूप दे देते हैं।
माननीय मोदी जी ने ऐसी-ऐसी योजनाएं लागू की हैं, जिससे समाज का कोई भी वर्ग और जनता की कोई जरूरत अछूती न रह जाए। इसीलिए ‘सबका साथ-सबका विकास’ हमारा मूलमंत्र है।
पं. दीनदयाल उपाध्याय शताब्दी वर्ष के अवसर पर यह निर्णय लिया गया है कि ‘लक्ष्य अंत्योदय-प्रण अंत्योदय-पथ अंत्योदय’ सरकार की नीति-रीति का मार्ग दर्शक सिद्धांत होगा।
अर्थात समाज की अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने और उसका जीवन संवारने के लिए दृढ़ संकल्प और प्रतिबद्धता के रास्ते पर चलना है। 
कौन सोच सकता था कि शहरी गरीब हों या गांव हो या वन अंचल में झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के पास अपना बैंक खाता होगा। लेकिन    ‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ ने तीन साल के भीतर, करोड़ों लोगों का यह सपने पूरा कर दिया। इस योजना के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ जनता को देने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है।
कैशलेस लेनदेन के लिए ‘भीम एप’ बहुत लोकप्रिय हो रहा है। करोड़ों लोगों ने इसे डाउनलोड किया है और उपयोग कर रहे हैं।
जनधन खाता, आधार कार्ड तथा मोबाइल को आपस में जोड़कर पारदर्शी और त्रुटिहीन भुगतान की ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिससे कि किसी तरह का फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा और कोई पात्र हितग्राही लाभ से वंचित नहीं रहेगा।
माननीय प्रधानमंत्री जी ने लक्ष्य दिया है कि सन् 2022 तक प्रत्येक भारतवासी के सिर पर अपनी छत की छाया हो, इसके लिए उन्होंने ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ लागू की है और अत्यंत आकर्षक सब्सिडी दी है, जिससे काफी रियायती दर पर गरीबों को मकान मिल सकेगा।
 देश में ऐसे युवाओं की संख्या बहुत है, जो उच्च शिक्षित नहीं हैं और हुनर नहीं होने के कारण अपनी आजीविका का अच्छा जरिया नहीं अपना पाए। इस कमी को समाप्त करने के लिए ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना‘ के माध्यम से अपने आसपास की आबादी, उद्योग, व्यवसाय आदि के लिए उपयोगी रोजगार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने में सबसे बड़ी बाधा स्वयं की पूंजी नहीं होना तथा बैंक से लोन लेने के लिए गारंटी की व्यवस्था नहीं होना है। इस समस्या के समाधान हेतु ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ शुरू की गई है ताकि युवा ’’जॉब सीकर’’ नहीं ‘‘जॉब क्रियेटर’’ बने।
मेक इन इंडिया/डिजिटल इंडिया/स्टार्ट-अप इंडिया/स्टैण्ड-अप इंडिया-जैसे अभियानों के कारण विभिन्न राज्यों में ऐसी औद्योगिक नीतियां बनीं हैं, जिसके निवेशक आकर्षित हों। रोजगार के अवसर बढ़ें और जीवन स्तर उन्नयन के रास्ते बनें।
देश में आजादी के सात दशकों में भी महिलाओं को ऐसा जीवन स्तर नहीं मिल पाया, जिसमें कि महिलाएं स्वस्थ रह सकें। माननीय प्रधानमंत्री जी ने करोड़ांे गरीब महिलाओं को धुआं मुक्त रसोई का उपहार देने के लिए ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ लागू की है।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना/प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना-देश में करोड़ों लोगों के लिए नई आशा की किरण है, जिन्हें वृद्धावस्था में, अपनी पारिवारिक, सामाजिक परिस्थितियों के कारण आर्थिक संसाधन हमें जूझना पड़ता है। ऐसे लोगों को नियमित आय का जरिया दिलाने हेतु काफी रियायती दरों पर निवेश करने से निश्चित मासिक पेंशन दिलाने की व्यवस्था की गई है।
हमारे देश में किसानों को सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके अलावा पकी फसल को आग, बाढ़ तथा अन्य अनिश्चिता का सामना करना पड़ता है। इससे निपटने के लिए देश के इतिहास में पहली बार सबसे रियायती प्रीमियम पर सबसे ज्यादा लाभ देने वाली योजना में ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ लागू की गई है। 
स्वायल हेल्थ कार्ड योजना/प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना/प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि/सांसद आदर्श ग्राम/प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना/प्रधानमंत्री जन औषधि/मिशन इन्द्रधनुष/ दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति/ ग्रामीण कौशल्या योजना/श्रमेव जयते योजना/स्मार्ट सिटी/ अमृत/प्रसाद/ह्ृदय योजना/रुर्बन मिशन आदि दर्जनों योजनाएं हैं, जिससे प्रत्येक भारतीय का सशक्तीकरण हो रहा है। 
उन्होंने ऐसे भारत की संरचना तैयार कर दी है, जिसमें दुनिया की अर्थव्यवस्था से मुकाबला करने की क्षमता हो। हर भारतीय का आर्थिक स्वावलम्बन हो, स्वस्थ और खुशहाल जीवन की गारंटी हो, महिलाओं को पूरा सम्मान मिले। युवाओं का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित हो। सड़क, रेल, टेलीकॉम, बिजली, पानी, चिकित्सा, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं पर सबका हक हो।
महिला उद्घोषक

श्रोताओं! आपकी प्रतिक्रियाएं हमें आपके पत्र, सोशल मीडिया- फेसबुक, ट्विटर के साथ SMS से भी बड़ी संख्या में मिल रही हैं। इसके लिए आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद।
आगे भी आप अपने मोबाइल के मेसेज बॉक्स में RKG के बाद स्पेस लेकर अपने विचार लिखकर 7668-500-500 नम्बर पर भेजते रहिए और संदेश के अंत में अपना नाम और पता लिखना ना भूलें।
मुख्यमंत्री जी

सोशल मीडिया तथा पत्रों के माध्यम से बहुत से श्रोताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। 
सिरवाबांधा जिला बेमेतरा निवासी श्री भुवन दास जांगड़े ने एक बहुत अच्छा पत्र लिखा है। उस पत्र को मैं पढ़कर सुनाता हूं-
अभी गर्मी का मौसम और शादी का सीजन है। आपसे अनुरोध है कि कार्यक्रम में आप शादी का जिक्र जरूर करें और उसमें माता-पिता, वर-वधुओं से आग्रह करें कि शादी में कम से कम खर्च करे। ज्यादा तड़क-भड़क न हो। ज्यादा खर्च न हो। पानी का कम उपयोग करें। भोजन की बर्बादी न करें। दहेज न लें और न ही दें । सही उम्र में शादी हो। सामूहिक आदर्श विवाह करें। मैं जांगड़े जी की सभी बातों से सहमत हूं, इसलिए उनका पूरा पत्र पढ़ दिया कि आप लोग इन सभी बातों का ध्यान रखें।
अन्य श्रोताओं अवधेश शास्त्री, सुरेन्द्र हंसपाल, मुकेश बैसवाड़े, सीमा साहू, ध्रुव महंत, उमेन्द्र निषाद, मुकेश वैष्णव ने भी अच्छे सुझाव दिए हैं। मैं सभी सुझावों को संबंधित विभागों में भेज रहा हूं, ताकि उन पर कार्यवाही हो सके। 
आप सभी को धन्यवाद, जय हिंद, जय छत्तीसगढ़
 

पुरूष उद्घोषक

और श्रोताओं, अब बारी है ‘क्विज’ की। 
बारहवें ‘क्विज’ का प्रश्न था-
 ‘लोक सुराज अभियान-2017’ में माननीय मुख्यमंत्री जी ने पहला रात्रि विश्राम कहां किया ? 
 जिसका सही जवाब है - (A) सुकमा
सबसे जल्दी जिन पांच श्रोताओं ने सही जवाब भेजे हैं, उनके नाम हैं- 
1.    श्री जनक लाल सोनवानी, ग्राम भर्रीटोली, जिला राजनांदगांव
2.    श्री महाबल बघेल, हथनीपारा, भाटापारा, जिला बलौदाबाजार  
3.    श्री गुलशन महंत, ग्राम मोहतरा, जिला बलौदाबाजार
4.    सुश्री लालिमा बघेल, रायपुर
5.    सुश्री भारती साहू, पोंड़ी, जिला कोरबा
महिला उद्घोषक

और श्रोताओं अब समय है तेरहवंे क्विज का सवाल है-
वर्ष 2017 को पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का कौन सा वर्ष मनाया जा रहा है ? 
इसका सही जवाब   A. स्वर्ण जयंती वर्ष
                            B.  शताब्दी वर्ष
इनमें से कोई एक है।

अपना जवाब देने के लिए, अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में QA लिखें और स्पेस देकर  A या B जो भी आपको सही लगे, वह एक अक्षर लिखकर 7668-500-500 नम्बर पर भेज दें। साथ में अपना नाम और पता अवश्य लिखें।
आप सब ‘रमन के गोठ’ सुनते रहिए और अपनी प्रतिक्रियाओं  से हमें अवगत कराते रहिए। इसी के साथ आज के अंक का हम यहीं समापन करते हैं। अगले अंक में 11 जून को होगी आपसे फिर मुलाकात। तब-तक के लिए दीजिए हमें इजाजत। नमस्कार।

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