भ्रष्टाचार निरोधक इकाई के छापे

छत्तीसगढ़ के कई विभागों के अधिकारियों पर ए सी बी याने एंटी करप्शन ब्यूरो ने कई शहरों में एक साथ छापे मारे।

राजधानी रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और  रायगढ़ के कई अधिकारिओं पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ छापा डाला। 

एंटी करप्शन ब्यूरो के छापे की कार्रवाई बड़े सबेरे शुरू हुई। 
कई विभागों के अधिकारीयों के एक दर्जन से ठिकानों छापा पड़ा और करोडो आय से अधिक संपत्ति मिली। 
स्कूल और उच्च शिक्षा रविशंकर विश्व विद्यालय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, सिंचाई विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम खाद्य अधिकारी एसीबी के छापे के शिकार हुए। 

रविवि के कुलसचिव केके चंद्राकर के हीरापुर स्थित निवास पर जांच के दौरान एसीबी को बैंक में लाकर का पता चला है, जिसकी जांच शनिवार को अवकाश होने के कारण नहीं हो पाई। लॉकर सोमवार को खोले जाएंगे। चंद्राकर के पास 40 लाख की एफडी भी मिली है।

आय से अधिक की संपत्ति अजिर्त करने के मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को अफसरों के घर पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। नागरिक आपूर्ति निगम के ज्वाइंट डायरेक्टर के निवास पर आधे घंटे तक दरवाजा ही नहीं खोला गया।

राजीव गांधी शिक्षा मिशन के ज्वाइंट डायरेक्टर हरेराम शर्मा के विशालनगर स्थित निवास पर जब एसीबी की टीम पहुंची और दरवाजा खटखटाया, तो परिवार के सदस्यों ने दूधवाला समझा और बाहर निकले। वहां पुलिस वाले नजर आए। सकते में आए परिवार ने दरवाजा खोला और एसीबी की टीम जांच में जुट गई। शर्मा द्वारा अपने भाई रामजी शर्मा के कोयले के कारोबार के साथ हैदराबाद की कंपनी में निवेश किए जाने की जानकारी मिली है। - रजनेश सिंह, एसपी एसीबी

अफसरों ने जब कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी, तो दरवाजा खुला, लेकिन घर में किसी तरह के दस्तावेज नहीं मिले। सकते में आई पुलिस ने बारीकी से जांच की, तो तहखानेनुमा कमरे का पता चला जिसमें पांच सूटकेस में दस्तावेज पाए गए। वहीं राजीव गांधी शिक्षा मिशन के ज्वाइंट डायरेक्टर हरेराम शर्मा द्वारा भाई के कारोबार में निवेश किया गया है।

एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम शनिवार सुबह दयामणी मिंज के जलविहार स्थित निवास पर पहुंची। आंधे घंटे इंतजार के बाद जब अधिकारी भीतर पहुंचे, तो उन्हें संपत्ति संबंधी किसी तरह के दस्तावेज नहीं मिले। अफसर इसे लेकर सकते में आ गए थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि घर के भीतर तहखाना है, तो वे जांच के लिए नीचे पहुंचे। वहां करोड़ों के जमीन संबंधी दस्तावेज मिले जो पांच सूटकेस में भरकर वहां छिपा दिए गए थे। मिंज के पास विभिन्न बैंकों में पचास से अधिक खातों का पता चला, जिसमें साठ लाख रुपए मिले हैं। मिंज काफी समय तक रायपुर में खाद्य अधिकारी थीं और कुछ समय तक दुर्ग में रहने के बाद बिलासपुर में पदस्थ थीं। नान में उनकी पदस्थापना कुछ माह पहले हुई थी।

कमरे का पता चला जिसमें पांच सूटकेस में दस्तावेज पाए गए। वहीं राजीव गांधी शिक्षा मिशन के ज्वाइंट डायरेक्टर हरेराम शर्मा द्वारा भाई के कारोबार में निवेश किया गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम शनिवार सुबह दयामणी मिंज के जलविहार स्थित निवास पर पहुंची। आंधे घंटे इंतजार के बाद जब अधिकारी भीतर पहुंचे, तो उन्हें संपत्ति संबंधी किसी तरह के दस्तावेज नहीं मिले। अफसर इसे लेकर सकते में आ गए थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि घर के भीतर तहखाना है, तो वे जांच के लिए नीचे पहुंचे। वहां करोड़ों के जमीन संबंधी दस्तावेज मिले जो पांच सूटकेस में भरकर वहां छिपा दिए गए थे। मिंज के पास विभिन्न बैंकों में पचास से अधिक खातों का पता चला, जिसमें साठ लाख रुपए मिले हैं। मिंज काफी समय तक रायपुर में खाद्य अधिकारी थीं और कुछ समय तक दुर्ग में रहने के बाद बिलासपुर में पदस्थ थीं। नान में उनकी पदस्थापना कुछ माह पहले हुई थी।

 

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