भूजल करें पीढ़ियों के लिए सुरक्षित

Radio talk Raman ke Goth reaches villages

भू-जल मूल्यवान प्राकृतिक सम्पदा, आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना होगा’: डॉ. रमन सिंह
 
 भू-जल स्तर की गिरावट को लेकर मुख्यमंत्री ने ‘ रमन के गोठ’ में जतायी गहरी चिंता
गर्मियों में मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए सावधानी बरतनी की नसीहत 
 अम्बेडकर जयंती पर 14 अप्रैल से राज्य में शुरू होगा स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण  
डॉ. रमन सिंह ने ‘ग्राम उदय-भारत उदय’ अभियान में किया सहयोग का आव्हान

रायपुर, 10 अप्रैल 2016 -  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जमीन के नीचे के पानी को बचाने के लिए प्रदेशवासियों से राज्य सरकार के साथ हर संभव सहयोग करने का आव्हान किया है। उन्होंने कहा है कि भू-जल मूल्यावान प्राकृतिक सम्पदा है। हम सबको आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना होगा। 
डॉ. रमन सिंह ने आज सवेरे आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ’ में जनता से यह आव्हान किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी और हिन्दी दोनों ही भाषाओं में जनता को सम्बोधित किया। डॉ. रमन सिंह ने अपनी रेडियो वार्ता की आठवीं कड़ी में छत्तीसगढ़ में भू-जल स्तर में आ रही गिरावट पर गहरी चिंता जतायी और गर्मी के मौसम में संभावित ‘लू’ के प्रकोप और अन्य मौसमी बीमारियों को लेकर भी वे चिंतित नजर आए। उन्होंने लोगों को मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए सावधानी बरतने की भी सलाह दी। 
भू-जल स्तर में गिरावट पर चिन्ता प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि प्रकृति हमें पर्याप्त संसाधन अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए देती है। लोभ की पूर्ति के लिए नहीं। प्रकृति से हमें पीने के लिए और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में भू-जल उपलब्ध है, लेकिन कुछ समय से हम देख रहे हैं कि भू-जल के अविवेकपूर्ण और अत्याधिक दोहन के कारण कई गांवों, मजरों, टोलों में हैण्डपंप और पेयजल के स्त्रोत सूख जाते हैं। यह हम सब के लिए विकट समस्या और चुनौती के रूप में सामने आ रही है। मुख्यमंत्री की यह रेडियो वार्ता राज्य में स्थित आकाशवाणी के सभी केन्द्रों से एक साथ प्रसारित की गई। कई निजी टेलीविजन चैनलों ने भी ‘रमन के गोठ’ का प्रसारण किया। रेडियो वार्ता की आठवीं कड़ी में आज मुख्यमंत्री ने जहां प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्रि, रामनवमीं, संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंती और महावीर जयंती की बधाई दी, वहीं उन्होंने अम्बेडकर जयंती पर 14 अप्रैल से 24 अप्रैल तक राष्ट्रीय स्तर पर शुरू हो रहे ‘ग्राम उदय से भारत उदय अभियान’ के तहत होने वाली विशेष ग्रामसभाओं में ग्रामीणों की अधिक से अधिक भागीदारी का भी आव्हान किया। मुख्यमंत्री आज के रेडियो प्रसारण में  14 अप्रैल से ही प्रदेश भर में सरकारी स्कूलों के सामाजिक अंकेक्षण की शुरूआत करने का भी ऐलान किया। 


उन्होंने भू-जल को एक मूल्यवान प्राकृतिक सम्पदा बताते हुए खास तौर पर किसानों से गर्मियों में धान की खेती नहीं करने और फसलों की सिंचाई के लिए भू-जल के स्थान पर  सतही जल के इस्तेमाल की अपील की। उन्होंने राजनांदगांव जिले का उदाहरण दिया और कहा कि उस जिले में 17 हजार 600 हैंडपम्प है और 31 हजार से भी ज्यादा पावर पम्प। इन पावर पम्पों के चलने पर गांव भू-जल स्तर नीचे आ जाता है। गर्मियों में धान की खेती के लिए पानी की बहुत अधिक लगता है। डॉ. सिंह ने कहा कि एक किलो धान के उत्पादन में तीन हजार लीटर पानी की जरूरत होती है। अगर किसी गांव में ऐसे एक सौ पावर पम्प (नलकूप) चल रहे हो, तो वहां का जल स्तर निश्चित रूप से नीचे चला जाएगा। भू-जल एक मूल्यवान प्राकृतिक सम्पत्ति है, जिसका हमें ऐसा उपयोग करना होगा कि आने वाली पीढ़ियों को भी उपलब्ध रहे। 
डॉ. सिंह ने कहा कि  डॉ. सिंह ने कहा है कि भू-जल के अत्यधिक दोहन के कारण हैण्डपम्पों में फ्लोराइड जैसे रासायनिक तत्व की अधिकता हो जाती है, जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। मुख्यमंत्री ने भू-जल संरक्षण और संवर्धन के लिए बारिश के पानी को बचाने की भी अपील की और कहा कि रेनवॉटर हार्वेटिंग की तकनीक के माध्यम से वाटर रिचार्जिंग की जानी चाहिए। पंचायत भवन, स्कूल भवन और अन्य सरकारी भवनों में भी वाटर हार्वेटिंग संरचना बनाने और इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा की राशि का उपयोग करने की जरूरत पर भी मुख्यमंत्री ने विशेष रूप बल दिया। उन्होंने कहा कि हर गांव में यदि पानी की रिचार्जिंग की व्यवस्था की जाए और गांव का पानी गांव में रोका जाए, इसके लिए बेहतर संरचनाओं का निर्माण हो तो भविष्य में पानी का संकट नहीं झेलना पड़ेगा। 
उन्होंने गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए लोगों को ‘लू’ और पीलिया, उल्टी-दस्त (डायरिया) जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए सावधानी बरतने की नसीहत दी और कहा कि इन बीमारियों के इलाज के लिए मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को तत्काल सूचित करें। इसके अलावा उन्होंने याद दिलाया कि राज्य सरकार ने नागरिकों को स्वास्थ्य से संबंधित निःशुल्क सलाह देने के लिए टोल फ्री नम्बर 104 पर ‘स्वास्थ्य परामर्श सुविधा’ की भी शुरूआत कर दी है। लोगों को इसका लाभ लेना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में 14 अप्रैल से शुरू हो रहे ग्राम उदय-भारत उदय अभियान का उल्लेख करते हुए अभियान के तहत चार चरणों में होने वाली ग्रामसभाओं के बारे मंे भी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायत दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी दूरदर्शन से लोगों को सम्बोधित करेंगे। डॉ. सिंह ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों से ग्रामसभा के आयोजन के बाद उस दिन प्रधानमंत्री के प्रसारण को सुनने की अपील की। 
मुख्यमंत्री ने शिक्षा गुणवत्ता अभियान, स्कूलों के सामाजिक अंकेक्षण और शाला प्रवेश उत्सव का भी उल्लेख किया। डॉ. सिंह ने कहा कि एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक स्कूलों में बच्चे पढ़ने जाएंगे। गर्मियों में उन्हें ’लू’ न लगे इसके लिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ‘लू’ की बीमारी में शरीर में पानी की कमी हो जाती है। स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हैंण्डपम्पों के जरिये होती है,लेकिन अगर कहीं इसमें कोई कठिनाई हो तो ऐसे स्थानों में बच्चों को पानी की बोतल ले जाने के लिए दें और उन्हें अधिक से अधिक पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करें। यह भी सुनिश्चित करें कि बच्चे खाली पेट न रहे। ‘लू’ के लक्षण मिलने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र से सम्पर्क करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन द्वारा पिछले शिक्षा सत्र में शिक्षा गुणवत्ता अभियान चलाया गया था, इस बार स्कूलों के सामाजिक अंकेक्षण से इसकी शुरूआत की जाएगी। सामाजिक अंकेक्षण डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर 14 अप्रैल से शुरू होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि सामाजिक अंकेक्षण के तहत प्रदेशवासी अपने बच्चों के स्कूलों में यह देखेंगे कि कक्षाओं में क्या चल रहा है, शिक्षक रोज पढ़ा रहे हैं या नहीं, बच्चे समझ पा रहे या नहीं, बच्चों में अच्छी आदतों और नैतिक मूल्यों का विकास हो रहा है या नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा - इस बार हमने माताओं को भी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा में सक्रिय सहयोग के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया है। उन्होंने माताओं से आग्रह किया अपने बच्चों की रोज की पढ़ाई के बारे में शिक्षकों से नियमित रूप से जानकारी लें और अच्छा पढ़ाने के लिए भी प्रेरित करें। इसके अलावा अगर माताएं शाला प्रबंध समितियों पर स्कूलों के बेहतर प्रबंधन के लिए दबाव डालना शुरू करें तो वह दिन दूर नहीं जब हम अपने राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता में आशा के अनुरूप सुधार कर पाएंगे। डॉ. रमन सिंह ने अपने रेडियो प्रसारण में कहा कि राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए पुस्तकों का वितरण एक अप्रैल से शुरू कर दिया है। उन्होंने बच्चों के माता-पिता और बड़े भाई-बहनों से आग्रह किया कि वे गर्मी की छुट्टियों में घरों में बच्चों को इन पाठ्य पुस्तकों को पढ़ाएं तो स्कूल जाने की उनकी झिझक समाप्त होगी। 

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