भारत के उनसठवें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आप सभी को बधाइयां और शुभकामनाएं

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2008 के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित परेड में श्री ई.एस.एल नरसिम्‍हन महामहिम राज्‍यपाल, छत्‍तीसगढ़ का उद्बोधन एवं अन्‍य
Speech of Shri ESL Narsimhan, H. E. Governor, Chhattisgarh in Parade organised at Capital Raipur on Republic Day 26 January 2008 and other coverage.

राज्य के 49 विकासखण्ड बनेंगे तहसील, एक अप्रैल से राज्य में कमिश्नर प्रणाली प्रारम्भ होगी, सभी वर्ग की हाईस्कूल छात्राओं को मिलेगी साइकिलें

उनसठवें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आज 26 जनवरी 2008 को प्रदेश की राजधानी रायपुर के पुलिस परेड़ ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में प्रदेश के राज्यपाल श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन ने देश के सभी विभूतियों को नमन करते हुए कहा कि उनके त्याग, तपस्या, चिंतन, प्रत्यक्ष या परोक्ष योगदान के कारण भारत विश्व में बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के 49 विकासखण्डों को 26 जनवरी 2008 से तहसील बनाया रहा है और आगामी एक अप्रैल सन् दो हजार आठ से राज्य में कमिश्नर प्रणाली पुन: प्रारम्भ की जाएगी। इसके अंतर्गत जगदलपुर, रायपुर, बिलासपुर एवं सरगुजा में कमिश्नर कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने अपने संदेश में बताया कि राज्य में करीब 14 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमितिकरण का लाभ दिया गया है। इसी तरह 30 हजार शिक्षाकर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया जारी है, जो अपने आप में किसी भर्ती अभियान की विशालतम संख्या है।

श्री नरसिम्हन ने जनता के नाम अपने संदेश में आगे कहा कि गणतंत्र की सफलता और सार्थकता पर गौरव करने का यह महान अवसर है। जब हम राष्ट्रीय पर्व की बात करते हैं तो सबसे पहले हमें भारत माता के उन महान सपूतों का पावन स्मरण हो आता है, जिन्होंने देश को आजादी दिलाई, जिन्होंने बाहरी और आंतरिक चुनौतियों से आजाद भारत की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय गणतंत्र ने अपनी भूमिका का निर्वाह भली-भांति किया है, जिससे आम जनता की आस्था भारतीय संविधान और लोकतंत्र के प्रति मजबूत हुई है। सम्पूर्ण भारतवर्ष को जिस संघीय ढांचे के तहत अपनी भूमिका का निर्वाह करना पड़ता है, उसमें हर राज्य का अहम योगदान दर्ज होता है। छत्तीसगढ़ राज्य को बने अभी मात्र सात वर्ष ही हुए हैं, फिर भी यह प्रदेश अपनी विशेष परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार कार्य करते हुए भारत के विकास मानचित्र में अपनी विशेष जगह बनाने में सफल रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि अपने राज्य के संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, निवासियों के स्वाभिमान में वृध्दि और कमजोर तबकों को बेहतर जिन्दगी देने के लिए राज्य सरकार द्वारा सही दिशा में सही कदम उठाए गए हैं। बाबा गुरू घासीदास जी का संदेश दूर-दूर तक पहुंचाने के लिए कुतुबमीनार से ऊंचे जैतखम्भ का निर्माण गिरौदपुरी धाम में शुरू कर दिया गया है। गुरू बाबा घासीदास सतनाम पंथ के संस्थापक तो हैं ही, उन्होंने ढाई सौ वर्ष पहले सत्य-अहिंसा, 'मनखे-मनखे एक' का संदेश दिया था, जिसकी जरूरत बाद में पूरी दुनिया ने महसूस की। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में बरसों पुरानी समस्याओं से पीड़ित गरीब जनता की तकलीफें दूर करने का एक बहुत बड़ा अभियान छेड़ा है। यह अभियान किसी एक विभाग, किसी एक कार्य, किसी एक योजना में सिमटा नहीं है, बल्कि अनेक मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि किसी भी समाज में नागरिकाें की सबसे बड़ी जरूरत भूख शांत करने की होती है। सभ्य समाज चाहे विकास के कितने भी कीर्तिमान गिना ले, लेकिन यदि उस राज्य में किसी को भूखा रहने की मजबूरी हो तो इसे बड़ी कमी के रूप में ही देखा जाएगा। इसलिए राज्य सरकार ने अपने संसाधनों और जात-पात की सीमाओं से ऊपर उठकर यह निर्णय लिया कि वह हर जरूरतमंद गरीब परिवार को प्रतिमास पैंतीस किलो चावल तीन रूपए किलो के नाममात्र दाम पर उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भूख के कुचक्र को तोड़ने हेतु उठाए गए इस कारगर कदम से 'चावल' प्रत्येक गरीब व्यक्ति की क्रय शक्ति के भीतर पहुंच गया है। यह योजना पूरी दृढ़ता के साथ शुरू कर दी गई है। उन्होंने राज्य की जनता से अपील की कि इस योजना को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए उपायों पर गौर करें। गरीबों के लिए लागू की गई इस जनहितकारी योजना को सफल बनाने में आम जनता को कुछ समय और कुछ विचार अवश्य देना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि खाद्यान्न सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ में अनेक बुनियादी उपाय किए गए हैं। विगत दो वर्षों में चौदह हजार छह सौ अड़तालीस आंगनवाड़ी केन्द्रों की मंजूरी देने से राज्य में लगभग पैंतीस हजार आंगनवाड़ी केन्द्रों का नेटवर्क स्थापित हो जाएगा। कुपोषण के खिलाफ आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से सत्ताइस लाख महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा के दायरे में लिया गया है। अड़तीस लाख से अधिक स्कूली बच्चों को गरम मध्यान्ह भोजन देने के काम में भी ममता और भागीदारी बढ़ाने के लिए पंचायतों, महिला स्व-सहायता समूहों आदि का सहयोग मिलना सराहनीय है।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि सिर पर छत होने की बुनियादी जरूरत को भी छत्तीसगढ़ सरकार ने गंभीरता से समझा और गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले आवासहीन परिवारों का चिन्हांकन 'दीनदयाल आवास योजना' के अंतर्गत किया गया। अठ्ठासी हजार से अधिक बीपीएल परिवारों को नौ सौ वर्ग फीट जमीन का आवासीय पट्टा देने की महत्वपूर्ण योजना शुरू की गई है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा गरीबों के लिए क्रियान्वित की जा रही 'अटल आवास योजना', 'दीनदयाल आवास योजना', 'कुशाभाऊ ठाकरे योजना', आदि के माध्यम से हजारों गरीब परिवारों को अच्छे पक्के मकान काफी सस्ती दरों पर दिए जा रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि छोटी प्रशासनिक इकाइयों के जरिए अधिकारों के विकेन्द्रीकरण और प्रशासन को जनता के निकट पहुंचाने की सोच को आगे बढ़ाते हुए विशाल आदिवासी अंचल बस्तर में दो नए जिले नारायणपुर और बीजापुर शुरू कर दिए गए हैं। हर दो पंचायत के पीछे एक पटवारी हल्का गठित करने के लिए एक हजार आठ सौ बीस नए पटवारी हल्के गठित किए गए हैं।

राज्यपाल ने कहा कि गरीबी की मजबूरियों का निजात जितनी जल्दी हो, उतनी ही जल्दी विकास की दर बढ़ाई जा सकती है। जब-तक गरीब लोगों की क्रय शक्ति नहीं बढ़ेगी, तब-तक वे विकास की दर बढ़ाने में अपना योगदान दर्ज नहीं कर पाएंगे। प्रसन्नता का विषय है कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने विशेष योजनाएं लागू की हैं। उन्होंने कहा कि मैं कुछ ऐसी योजनाओं का जिक्र करना चाहूंगा, जिनका लाभ सीधे गांव, गरीब, किसानों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कृषि ऋण की दरों में निरंतर कमी लाते हुए किसानों को सन् दो हजार छह-सात में सात प्रतिशत और फिर सन् दो हजार सात-आठ में छह प्रतिशत पर ऋण दिया गया। इससे दस लाख अस्सी हजार किसानों को लगभग नौ सौ चौबीस करोड़ रूपए मिले। यह राशि पहले के वर्षों की तुलना में दोगुनी रही। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य उदारतापूर्वक करने से किसान भाई प्रतिवर्ष लगभग छत्तीस लाख मीट्रिक टन धान का सही दाम पा रहे हैं और कम्प्यूटराइज्ड व्यवस्था हो जाने से भुगतान भी तत्काल हो रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि गरीब बुनकरों का ऋण माफ करने से एक सौ चालीस सोसायटियों से दस हजार सात सौ सदस्यों को लाभ मिला है। इन्हें ग्यारह करोड़ तीस लाख रूपए ऋण माफी की राहत दी गई है। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीणों को नक्शा, खसरा और खतौनी की कम्प्यूटरीकृत प्रतियां नि:शुल्क देने का इंतजाम कर दिया गया है। किसानों को सिंचाई कर की बकाया पचास प्रतिशत राशि पटाने पर पचास प्रतिशत की माफी दी जा रही है।

श्री नरसिम्हन ने कहा गरीबी उन्मूलन का सबसे सीधा रिश्ता रोजगार के अवसरों से होता है। प्रसन्नता का विषय है कि छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर नौकरियों और स्वरोजगार के दरवाजे खोले गए हैं। शिक्षा कर्मियों, पुलिस कर्मियों सहित हजारों पदों पर भर्ती के लिए शासकीय विभागों, निगमों, मण्डलों में आवश्यक कदम उठाने से राज्य में एक नई उमंग दिखाई पड़ती है। करीब चौदह हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमितिकरण का लाभ दिया गया है। रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कई रणनीतिक उपाय भी किए गए। सरकारी पदों पर भर्ती से प्रतिबंध हटाना, बेरोजगार इंजीनियरों को बिना निविदा के निश्चित राशि का निर्माण कार्य प्रदान किया जाना, नए उद्योगों में स्थानीय लोगों की भर्ती की अनिवार्य शर्त जैसे उपायों से छत्तीसगढ़ में रोजगार के अवसर बड़े पैमाने पर बढ़े हैं।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि अशिक्षित या असंगठित क्षेत्र में भी रोजी-रोटी की समस्या का निदान पूरी तत्परता से किया जा रहा है। नवगठित बीजापुर और नारायणपुर सहित छत्तीसगढ़ के सत्रह जिलों में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत करीब अट्ठाइस लाख परिवारों का पंजीयन कर उन्हें परिवार रोजगार कार्ड दिए गए हैं। मांग के आधार पर करीब पन्द्रह लाख परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। लगभग छह सौ पनचानबे लाख मानवदिवस रोजगार के अवसर सृजित किए गए हैं। एक अप्रैल सन् दो हजार आठ से दुर्ग जिला भी इस योजना में शामिल हो जाएगा।

राज्यपाल ने कहा कि नवा अंजोर परियोजना अपने एक लाख परिवारों को लाभान्वित करने के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है और अभी तक सतहत्तर हजार पांच सौ परिवारों को लाभ पहुंचाया जा चुका है। नगरीय निकायों में हाट बाजार की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। जिसके तहत नगर-निगमों को एक करोड़, नगर पालिका को सत्तर लाख, नगर पंचायतों को चालीस लाख रूपए की राशि दी जा रही है। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं में छोटे कारोबार करने वालों के लिए दुकानों से लेकर गुमटियों तक पन्द्रह हजार से अधिक कार्यस्थलों का निर्माण किया जा रहा है। युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिससे हजारों की संख्या में प्रशिक्षित युवा अपना स्वयं का कारोबार कर पाएंगे।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षाकर्मियों की भर्ती में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के लिए नियमों में संशोधन किया गया है। फिलहाल तीस हजार शिक्षाकर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया जारी है, जो अपने आप में किसी भर्ती अभियान की विशालतम संख्या होगी। राज्यपाल ने कहा कि विभिन्न स्तरों के उद्योगों में चालीस हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। निजी क्षेत्र में पूंजीनिवेश से स्थानीय आबादी को होने वाले लाभ का यह एक अच्छा उदाहरण है।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि किसानों को एक लाख नए सिंचाई पम्प कनेक्शन देने की दिशा में उपलब्धि पचहत्तर हजार पंपों तक पहुंच चुकी है। आठ लाख से अधिक एकलबत्ती कनेक्शनधारियों को नि:शुल्क बिजली प्रदाय की जा रही है। करीब तेरह लाख तेन्दूपत्ता संग्राहकों को नि:शुल्क चरण पादुका प्रदान की जाती है। अब ये चरण पादुकाएं प्राथमिकता से महिलाओं को देने का निर्णय लिया गया है।

श्री नरसिम्हन ने कहा स्कूली शिक्षा को व्यापक बनाने के लिए अड़तालीस लाख स्कूली छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पाठय पुस्तकें दी जा रही हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति की पैंसठ हजार हाईस्कूल छात्राओं को नि:शुल्क सायकलें दी गई हैं और अब इस योजना से भी जाति-वर्ग का बंधन समाप्त कर दिया गया है। अब इस योजना का लाभ सभी जाति, वर्ग की गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाली छात्राओं को दिया जाएगा। प्राथमिक स्तर पर अनुसूचित जाति, जनजाति के छह लाख तिरसठ हजार बच्चाें को नि:शुल्क गणवेश प्रदान किया गया है।

उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ में विशेष महत्व दिया गया है। गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाकर चार सौ तिरानबे करोड़ रूपए की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बीपीएल परिवारों हेतु चार लाख तथा एपीएल परिवारों हेतु तीन लाख शौचालय निर्मित किए जा चुके हैं। सोलह हजार स्कूलों एवं चार हजार एक सौ तिरपन आंगनवाड़ी केन्द्राें में शौचालयों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। अगले कुछ महीनों में ही राज्य के समस्त स्कूलाें में बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बन जाएंगे। इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ के गांवों में स्वच्छता और बेहतर स्वास्थ्य का वातावरण बन रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि विकास के बड़े-बड़े कामों के बारे में तो आप सब अक्सर सुनते ही रहते हैं और ऐसे कीर्तिमानों की वजह से अब छत्तीसगढ़ का नाम भी देश के नक्शे में दिखाई पड़ने लगा है। औद्योगिक विकास की बात हो, बिजली और सिंचाई के क्षेत्र में उपलब्धियों की बात हो, बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों के छत्तीसगढ़ में आने की चर्चा हो, यह सब बातें अपनी जगह सही हैं। लेकिन आज उन बातों का जिक्र करना ज्यादा जरूरी है, जिसमें एक-एक छोटे-छोटे फैसले से हजारों-लाखों लोगों की जिन्दगी में सकारात्मक बदलाव दिख रहा है। गण-तंत्र की मजबूती के लिए ऐसे कामों का विशेष महत्व है, जिसे छोटा समझकर छोड़ देने की परिपाटी लम्बे समय तक इस देश में रही है।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि मैं 'सलवा जुड़ूम' रूपी उस दीपक को प्रणाम करना चाहता हूं, जिसने नक्सलवादी तूफान का सामना करने की रोशनी छत्तीसगढ़ को दी। अब यह दीप, मशालों का रूप ले चुका है। बस्तर के आदिवासी अंचल में नक्सलवादी आतंकवाद के खिलाफ जो निर्णायक संग्राम ग्रामवासियों ने छेड़ा है, वह आजाद भारत में गणतंत्र की रक्षा का सबसे बड़ा अभियान है। सलवा जुड़ूम में नक्सली हिंसा से शहीद हुए वीरों को श्रध्दा सुमन अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी कुर्बानी खाली नहीं जाएगी। दूसरी आजादी के लिए आदिवासी भाई-बहनों का, हिंसक तत्वों के विरूध्द अभियान, नैतिकता की जीत के रूप में इतिहास में दर्ज होगा। 'सलवा जुड़ूम' में शामिल लोगों और नक्सल प्रभावित आबादी का मनोबल बढ़ाना सिर्फ राज्य सरकार का नहीं बल्कि राज्य के सभी निवासियों कार् कत्तव्य है। राज्यपाल ने प्रदेश के सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे गणतंत्र की मजबूती का संकल्प दोहराएं।

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