फल और सब्जी क्षेत्र में बड़ी संभावना

कृषि मंत्री, श्री शरद पवार ने उद्यान कृषि के समक्ष आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए निजी क्षेत्र और सरकारी एजेंसियों को मिलकर काम करने के लिए कहा है ताकि इस क्षेत्र की क्षमता का पूरा फायदा उठाया जा सके ।

फल और सब्जी क्षेत्र में बड़ी संभावना किन्तु बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता

फल और सब्जी समिति का उद्धाटन करते हुए श्री पवार ने कहा पिछले कुछ वर्षों में फसल विविधीकरण पर दबाव ने उद्यान कृषि उत्पादन 185.2 मी. टन तक तेज बढावा दिया है । तथापि, उन्होंने कहा , आपूर्ति कड़ी में बड़ेद्ग विखंडन, निम्न उत्पादकता स्तर, अपर्याप्त भण्डारण शीत भंडारों और परिवहन की बुनियादी सुविधाओं की कमी, संभारततंत्र और आपूर्ति कड़ी के प्रबंधन की कमियों के कारण फसल के बाद बड़े पैमाने पर नुकसान के लिए बाध्य है ।

इन समस्याओं के परिणामस्वरूप बहुत थोड़ा मूल्य वर्धन होता है, उदाहरण के लिए निर्यात और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में । इस संबंध में चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा अमेरिका में 65 प्रतिशत, ब्राजील में 70 प्रतिशत, फिलीपीन्स में 78 प्रतिशत, दक्षिण अफ्रीका में 80 प्रतिशत और मलेशिया में 83 प्रतिशत की तुलना में भारत में उत्पादित फलों और सब्जियों का 2 प्रतिशत से भी कम प्रसंस्करण किया जाता है । आंतरिक और बाह्य बाजार और प्रसंस्करण करने वाले उद्योगों के तेजी से विस्तार के कारण ऐसी तकनीकों को विकसित किया जाना आवश्यक है जिससे फसल के बाद के नुक्सानों को कम किया जा सके । मूल्यवर्धन और उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके ।

श्री पवार ने राष्ट्रीय उद्यान कृषि के तहत प्रयोग और प्रावधानों और आईसीए आर और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के अनुसंधान तथा अवसंरचना का प्रयोग करते हुए आधुनिक प्रौद्योगकी को अपनाने के लिए कहा । उन्होंने कहा प्रसंस्करण करने वाले उद्योग और निर्यात की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पादन कार्यक्रम के आयोजन पर विशेष जोर देने के साथ विशेष रूप से अवसंरचना, विपणन और अनुसंधान तथा विकास के क्षेत्र में निजी निवेश को बढावा देने की आवश्यकता है ।

समिति को संबोधित करते हुए कृषि एवं सहकारिता सचिव, डा0 पी के मिश्र ने कहा कि कृषि पिछले 3 सालों में पुनर्जीवित और द्वितीय हरित क्रांति के लिए संतुलित दिखाई देती है । उद्यान कृषि इस क्रांति में विशेष रूप से सहयोग करेगी । उन्होंने कहा इसके लिए उत्पादकता, गुणवत्ता जागरूकता और फसल के बाद नुकसान में कमी को आवश्यकता पर जोर देना होगा ।

दो दिन की समिति का आयोजन सीआईआई और कृषि मंत्रालय द्वारा किया गया । उद्योगों, केन्द्र और राज्य सरकारों, कृषि संवर्धन एजेंसियों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने समिति में भाग लिया ।

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