प्रशासनिक सुधार के लिए बुध्दिजीवियों के सुझाव

केन्द्रीय प्रशासनिक सुधार आयोग के सदस्यों ने बुध्दिज़ीवियों से चर्चा की
मैदानी स्तर पर योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन
प्रशासनिक सुधार का एक मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों की मानसिकता में परिवर्तन - स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पद्मश्री डॉ. महादेव प्रसाद पाण्डेय
वित्तीय भ्रष्टाचार में हुई बढ़ोत्तरी पर चिंता
मैदानी स्तर पर बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं की नियुक्ति
तकनीकी विभागों में विषय विशेषज्ञों को प्रमुख बनाना चाहिए
स्कूलों तथा कॉलेजों में गठित जनभागीदारी समितियों के काम काज को और अधिक पारदर्शी बनाए
जिलों तथा पंचायतों का आकार काफी बड़ा होने के कारण मानव विकास सूचकांक विकसित राज्यों की तुलना में काफी कम

रायपुर, 28 सितंबर 2007 - केन्द्रीय प्रशासनिक सुधार आयोग के सदस्यों ने  आज यहां बुध्दिजीवियों से चर्चा कर प्रशासनिक सुधार के संबंध में सुझाव मांगे। बुध्दिजीवियों ने प्रशासनिक सुधार हेतु मैदानी स्तर पर योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई और जमीनी कार्यकर्ताओं के क्षमता विकास पर बल दिया। बुध्दिजीवियों ने लोकतंत्र की मूल भावना के अनुरूप आम जनता के हितों को सर्वोपरि रखने की जरूरत बताई। उन्होंने जनशिकायत तंत्र को और अधिक प्रभावशाली बनाने पर जोर दिया। चर्चा में केन्द्रीय प्रशासनिक सुधार आयोग के सदस्य श्री ए.पी.मुखर्जी, सदस्य सचिव श्रीमती विनिता राय, पूर्व सचिव रा श्री पी.के.एस.थारकन, संयुक्त सचिव श्री ए.बी.प्रसाद, व श्री पी.एस.खरोला सहित प्रदेश के अनेक प्रतिष्ठित बुध्दिजीवी उपस्थित थे।

       प्रशासनिक आयोग के सदस्यों से चर्चा के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पद्मश्री डॉ. महादेव प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि प्रशासनिक सुधार का एक मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों की मानसिकता में परिवर्तन करना होना चाहिए और यह भावना मजबूत होनी चाहिए कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक तंत्र को संविधान की मूल भावना के अनुसार लोकहित में कार्य करना चाहिए। मुख्य सूचना आयुक्त श्री ए.के.विजयवर्गीय ने अपने सुझाव देते हुए कहा कि मैदानी स्तर पर बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जानी चाहिए, जिससे प्रशासनिक व्यय में कमी की जा सकेगी। उन्होंने निलंबन के मामलों में विभागीय जांच की समयसीमा तय करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग की तरह अन्य विभागों में भी उत्कृष्ट कार्य करने पर नगद प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। राज्य निवार्चन आयुक्त डॉ. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि देश के ग्रामीण विशेष कर आदिवासी क्षेत्रों में नक्सलवाद की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए पंचायत पदाधिकारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण देकर इस चुनौती का सामना करने हेतु सक्षम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाये जाने की वकालत की।

       पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. लक्ष्मण चतुर्वेदी ने मौजूदा व्यवस्था में शामिल बुनियादी बातों के क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था के अन्तर्गत निर्धारित नियम-कायदों का पालन कड़ाई से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधार संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पहले आयोग को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि मौजूदा व्यवस्था के किन-किन क्षेत्रों में कमियां रह गई हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयीन प्रशासन में सुधार हेतु छात्रों से भी सुझाव आमंत्रित किए जाने की आवश्यकता बताई। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि प्रशासनिक तंत्र में फीड-बैक-सिस्ट्म मजबूत होना चाहिए, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की सही जानकारी मिल सके तथा इस आधार पर भविष्य में योजनाओं में परिवर्तन किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों की तरह निचले स्तर के अधिकारियों तथा कर्मचारियों को भी पर्याप्त प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चितरंजन हाजरा ने कहा कि जिला प्रशासन में कलेक्टर पर बहुत अधिक जिम्मेदारियां होती हैं। कलेक्टर को जिला प्रशासन के संचालन के लिए समन्वयक की भूमिका निभानी चाहिए। विकास योजनाओं के लिए सभी विभागों में अलग मुखिया होना चाहिए। साथ ही तकनीकी विभागों में विषय विशेषज्ञों को प्रमुख बनाना चाहिए।

       संचालक हिन्दी ग्रंथ अकादमी श्री रमेश नैयर ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग तथा राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा प्रशासनिक परीक्षाओं में साक्षात्कार पर न्यूनतम अंक रखे जाने चाहिए ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। इसके अलावा चयन समितियों में राजनैतिक व्यक्तियों को सदस्य नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्कूलों तथा कॉलेजों में गठित जनभागीदारी समितियों के काम काज को और अधिक पारदर्शी बनाए जाने पर जोर दिया। मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मुख्य सचिव श्री शरदचंद्र बेहार ने कहा कि आधुनिक व्यवस्था में प्रशासन को चेंज एजेंट के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के चयन के समय अकादमिक उत्कृष्टता के अलावा जनता के प्रति संवेदनशीलता तथा अपने उत्तरदायित्वों के लिए प्रतिबध्दता को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में शीर्ष पदाधिकारियों की नियुक्ति में सत्ताधारी दल की पसंद के अलावा राजनैतिक दलों की सहमति भी ली जानी चाहिए।

       नवभारत के सम्पादक श्री अनल प्रकाश शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे नये राज्यों में जिलों तथा पंचायतों का आकार काफी बड़ा होने के कारण यहां मानव विकास सुचकांक विकसित राज्यों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने प्रशासनिक इकाईयों के न्यायसंगत ढंग से पुनर्गठन किए जाने का सुझाव दिया। श्री शुक्ला ने वित्तीय संसाधनों की बढ़ती उपलब्धता के कारण वित्तीय भ्रष्टाचार में हुई बढ़ोत्तरी पर चिंता जाहिर करते हुए इस पर कड़ाई से नियंत्रण किए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि सूचना तकनीकी का अधिक और पारदर्शी उपयोग करने से प्रशासन में सुधार आएगा। हरिभूमि के सम्पादक श्री हिमांशु द्विवेदी ने राज्यों में शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति राजनैतिक आधार पर किए जाने पर चिंता जाहिर करते हुए राज्यों में केन्द्र सरकार के समान व्यवस्था लागू किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को राजनैतिक कारणों से नहीं हटाया जाना चाहिए। इस अवसर पर अपर संचालक जनसंपर्क श्री आलोक अवस्थी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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