परिवर्तन अभियान है लोक सुराज

रमन के गोठ की 20वीं कड़ी : समाज में परिवर्तन लाने का अभियान लोक सुराज : डॉ. रमन सिंह

मुख्यमंत्री ने प्रदेश वासियों को दिया भरोसा
रद्दी की टोकरी में नहीं जाएंगे 28 लाख आवेदन, सबका हुआ कम्प्यूटरीकरण,
समस्याओं की जड़ तक पहुंच कर एक -एक समस्या का करेंगे निराकरण
मुख्य सचिव स्वयं करेंगे निगरानी

शहादत की ऐसी सड़कें, जिनका कोई वर्णन नहीं हुआ

रायपुर, 09 अप्रैल 2017 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि - लोक सुराज अभियान समाज में परिवर्तन लाने का अभियान है। उन्होंने आज सवेरे आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ’ में प्रदेश वासियों को विश्वास दिलाया कि लोक सुराज अभियान में प्राप्त 28 लाख आवेदन पत्रों को शिविरों के बाद रद्दी की टोकरी में नहीं फेका जाएगा, बल्कि उनका शत-प्रतिशत कम्प्यूटीकरण किया गया है डाटा बेस बनाया है और उनको साल भर फॉलों किया जाएगा, मुख्य  सचिव स्वयं इसकी निगरानी करेंगे, ताकि हम समस्याओं की जड़ तक जाएं और पात्रता रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इसका लाभ मिल सके। एक-एक विषय के जितने भी आवेदन आए हैं, उनका हम समय पर निराकरण करने का प्रयास करेंगे। डॉ. रमन सिंह ने श्रोताओं से कहा लोक सुराज अभियान को प्रदेशवासियों का जर्बदस्त रिस्पांस मिल रहा है। मैं लगातार 20 मई तक आपके बीच रहूंगा। आपके गांव, आपके मोहल्ले में, आपके किसी ग्रामीण अंचल में, किसी शिविर में आपसे मुलाकात होगी। 

डॉ. सिंह ने कहा - सन् 2003 के आखिरी माह में हमारी सरकार बनी और हमने 2005 से ही ग्राम सुराज अभियान शुरू कर दिया था, ताकि हम लोग सचमुच जनता की वास्तविक तकलीफो और आवश्यकताओं को प्रत्यक्ष और समक्ष सकें और उनके निदान के लिए कारगर प्रयास कर सकें। जब ग्राम सुराज अभियान का लाभ जनता को मिलने लगा तो शहरी क्षेत्रों से भी यह मांग उठी की शहरों में भी ऐसा अभियान चलाया जाना चाहिए। फिर हमने नगर सुराज अभियान संचालित किया। फिर हमने नगर सुराज अभियान भी चलाया, लेकिन एक साल में दो अलग-अलग समय पर दो अभियान चलाने से पूरे प्रशासन को एक साथ लेकर चलने और नियमित काम-काज के समन्वय में दिक्कत होती थी, इसलिए तब हमने निर्णय लिया कि दोनों अभियानों को मिलाकर एक व्यापक अभियान लोक सुराज के नाम से चलाया जाए। 
उन्होंने कहा - इस वर्ष अभियान की शुरूआत नये तरीके से की गई। पहले चरण में 26 फरवरी से 28 फरवरी तक जनता से आवेदन लिए गए। इसके लिए पूरे प्रदेश में शिविर लगाए गए और समाधान पेटी की भी व्यवस्था की गई। ऑन लाइन आवेदन करने की भी सुविधा दी गई। इस तरह सरकार ने स्वयं लोगों के गांव, घर तक पहुंच कर आवेदन लिए। इस प्रकार जनता लोक सुराज अभियान के केन्द्र में आ गई। अभियान का स्वरूप ’ऊपर से नीचे’ के बदले ’नीचे से ऊपर’ हो गया है। हमारे अधिकारी-कर्मचारी, विधायक, सांसद और मंत्रीगण ब्लाक और जिला स्तर पर जनता के बीच जाकर लोगों को राज्य और केन्द्र की प्रमुख योजनाओं की जानकारी देते हैं। प्रत्येक 10 ग्राम पंचायतों के बीच एक समाधान शिविर हो रहा है। मैं स्वयं 20 मई तक यात्रा में रहूंगा। जिलों के समाधान शिविरों में जा रहा हूं औचक निरीक्षण भी कर रहा हूं। शाम 6 बजे से 8 बजे तक समीक्षा बैठक कर रहा हूं, उसके बाद रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक उस जिले के विभिन्न प्रतिनिधि मंडलों से मिल रहा हॅूं। इस प्रकार उस पूरे जिले की अंदर की जानकारी, विकास कार्यों की जरूरत और क्या ‘मिसिंग लिंक’ है, उसकी जानकारी मिल जाती है। 
 

इन अभियानों से मिलता है फीडबैक  
उन्होंने कहा -इस प्रकार के अभियानों से सरकार को अपनी योजनाओं के बारे में फीड बैक मिलता है कि छत्तीसगढ़ की सबसे ज्वलंत समस्याएं क्या हैं? विगत तेरह साल में ग्राम सुराज और लोक सुराज अभियानों से जितनी कल्याणकारी योजनाओं का जन्म हुआ, उनकी व्यापकता इतनी है कि आज बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग, वहां के मुख्यमंत्री और मंत्रीगण और अधिकारी छत्तीसगढ़ आकर उनका अध्ययन करते हैं। ये एक बड़ी सफलता है और यह छत्तीसगढ़ की जनता की सफलता है, जिसने इन अभियानों के माध्यम से मुझे बहुत कुछ सिखाया है। जनता से सीखकर मैं अभियान को आगे बढ़ाने में लगा हूं। उन्होंने उम्मीद जतायी कि जनता की सोच को योजनाओं के रूप में ढालने में  धरातल पर उन्हें सफलता मिलेगी।  
 

रेडियो श्रोताओं से मुख्यमंत्री की अपील : प्रेरक बनकर जनता को योजनाओं का लाभ दिलाएं

डॉ. रमन सिंह ने अपने रेडियो प्रसारण में चार प्रमुख योजनाओं - प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, सौर सुजला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का जिक्र करते हुए रेडियो श्रोताओं से इन योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने में सहयोग का आव्हान किया। उन्होंने कहा श्रोतागण जनता के बीच न केवल श्रोता की हैसियत से बल्कि एक प्रेरक की भूमिका में जाएं और लोगों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें।  
 

गरीबों को सिर्फ 40 रूपए में चार हजार का रसोई गैस कनेक्शन
मुख्यमंत्री ने उज्ज्वला योजना को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की संवेदनशील सोच का परिचायक बताया और कहा कि छत्तीसगढ़ में इस योजना के तहत 35 लाख गरीब परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य है, अब तक 10 लाख परिवारों को दिया जा चुका है और आने वाले समय में 25 लाख परिवारों तक जाना है। इस योजना में हम लोग गरीब परिवारों को सिर्फ 200 रूपए कीमत में, इस 200 रूपए में से भी 160 रूपए हितग्राही को वापस हो जाता है। इस प्रकार उसे सिर्फ 40 रूपए में 4000 हजार रूपए का रसोई गैस कनेक्शन और डबल बर्नर चूल्हा मिल जाता है। इस योजना के जरिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की जो सोच है, हर घर तक इतनी बड़ी बचत होगी।  छत्तीसगढ़ में दो करोड़ से ज्यादा पेड़ कटने से बचेंगे और पर्यावरण बेहतर होगा, महिलाओं को जो सबसे बड़ी दिक्कत है, धुंए की वजह से खांसते-खांसते उनको श्वांस की, दमे की और टी.बी. की बीमारी हो जाती है, उससे मुक्ति का एक उपाय उन्होंने (प्रधानमंत्री ने) किया है। 
डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इस योजना का जबर्दस्त रिस्पांस है। इसमें डेढ़ लाख रूपए से ज्यादा की योजना का लाभ सीधे हम  गांव वालों को दे रहे हैं। पहली बार ऐसा हो रहा है कि इतनी अच्छी कीमत मंे, एक लाख 30 हजार रूपए की राशि हम उनको देते हैं, उसमें 12 हजार रूपए शौचालय निर्माण  के लिए देते हैं। स्वयं का मकान बनाने के लिए मनरेगा के तहत 100 दिन काम करने पर उन्हें उसका भुगतान भी हम करते हैं। बनाने वाला और उसका परिवार इतना खुश है, जब मैं गांव में जाकर मिलता हूं, अपने हाथ से वो ईंट रखते हैं, मैंने भी जाकर उनके साथ ईंटे रखने का काम किया, तो यह समाज से जुड़ने का काम है। जो आज तक कच्चे मकान में रहते हैं, उनके लिए एक पक्के मकान, पक्के कमरे की व्यवस्था हो रही है।  हम लोगों ने इस योजना में दो लाख हितग्राहियों के लक्ष्य को बढ़ाकर छह लाख कर दिया है। 
 

सौर सुजला योजना : किसानों को जीवन भर बिजली बिल पटाने की जरूरत नहीं
डॉ. सिंह सौर सुजला योजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह योजना ऐसे अविद्युतीकृत इलाकों में, जहां सिंचाई के साधन नहीं है, वहां के किसानों के लिए काफी उपयोगी है। बलरामपुर, बीजापुर, सुकमा या  दूरस्थ कोई इलाका, वहां विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग, बीपीएल श्रेणी के परिवार, छोटे और मध्यम किसान सभी इसका लाभ ले सकते हैं। इस योजना में चार-साढ़े चार लाख रूपए का सोलर सिंचाई पम्प मात्र दस हजार, 15 हजार और 18 हजार रूपए में दिया जा रहा है। इसमें किसान को जीवन भर बिजली का बिल पटाने की जरूरत नहीं होगी। उसे अपने एक एकड़ या दो एकड़ बाडी में सिंचाई कर सकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार मार्च 2018 तक छत्तीसगढ़ के 66 हजार पारों, मजरों-टोलों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण करने जा रही है। 
डॉ. सिंह ने कहा - मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में हमने स्मार्ट कार्ड की राशि इस वर्ष 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दी है। एक गरीब परिवार की जेब में अगर स्मार्ट कार्ड हो तो उसके अंदर  बड़ा आत्म विश्वास आता है। यह एक यूनिवर्सल स्वास्थ्य योजना है। मैं गांव वालों को बताता हूं और हाथ ऊंचा करवाता हूं कि कितने लोगों का स्मार्ट बना है। मुख्यमंत्री ने रेडियो श्रोताओं से कहा - मैं आपके माध्यम से, रेडियो के माध्यम से मुझे सुनने वाले श्रोताओं को, जो बड़े ध्यान से मेरी बात सुनते हैं, मैं आपकों प्रेरित करता हॅंू। आप अपने गांव में, अपने घर में, सबको इन योजनाओं के बारे में बताएंगे तो बहुत बड़ा काम करेंगे। जनता के बीच न केवल श्रोता की हैसियत से बल्कि प्रेरेक के रूप में आपकी भूमिका हो जाएगी। मैं जानता हूं कि मुझे सुनने वाले लोग सरकार की इन अच्छी योजनाओं को जनता तक ले जाने में मुझे मदद करेंगे। यह मेरा माध्यम है, जिसके जरिये अंतिम व्यक्ति तक पहुंच कर मैं इस बात को कहना चाहता हूं और आप मुझे जुड़े हुए हैं। 
 

सुकमा-बीजापुर में रात बिताना वहां के लोगों से सीधे जुड़ने का अवसर

डॉ. रमन सिंह ने अपनी रेडियो वार्ता में इस बार के लोक सुराज अभियान के अपने अब तक के अनुभवों को श्रोताओं के साथ साझा किया। उन्होंने नक्सल प्रभावित सघन वन क्षेत्र वाले सुकमा और बीजापुर जिलों में रात बिताने के बारे में कहा कि इससे वहां के लोगों के साथ सीधे जुड़ने का अवसर मिलता है। डॉ. सिंह ने सुकमा जिले में दोरनापाल - पोड़िया-कालीमेटा मार्ग पर शबरी नदी में निर्मित 500 मीटर लंबे पुल के लोकार्पण के दौरान जनता के उत्साह को भी ‘रमन के गोठ’ में विशेष रूप से याद किया। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ और ओड़िशा को जोड़ने वाले इस पुल के  लोकार्पण में काफी संख्या में दोनों राज्यों के लोग आए थे। मुख्यमंत्री ने कहा - ओड़िशा के चार-पांच हजार लोग भी पुल को पार करके आ रहे थे, नाच रहे थे, खुशियां मना रहे थे और किसी सड़क या पुल के उद्घाटन में एक साथ जश्न का ऐसा माहौल मैने विगत तेरह-चौदह साल की अपनी इस राजनीतिक यात्रा में पहले कभी नहीं देखा था। उस क्षेत्र के लिए एक नई सड़क और पुल का निर्माण, विकास का इतना बड़ा पुल बना है, जो उस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बदल देगा, सोच को बदल देगा। मैंने 11 करोड़ की लागत से इस पुल का निर्माण पूर्ण होने पर वहां के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा सुरक्षा बलों और पुलिस केे जवानों को बुलाकर धन्यवाद दिया। शांति तभी आएगी, जब विकास होगा। उस दिशा में इस ब्रिज ने (पुल ने) कमाल किया। ऐसे निर्माण कार्य एक संदेश देकर जनता के मन में विश्वास पैदा करेंगे।

दुनिया के इतिहास में शहादत की ऐसी सड़कें, जिनका कहीं कोई वर्णन आज तक नहीं हुआ होगा

डॉ. रमन सिंह ने कहा - आप कल्पना करेंगे कि बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिलों में जो सड़कें बनती हैं वो सामान्य दिशा-दशा में बनने वाली सड़कें नहीं होती। वहां कई ऐसी सड़कें हैं, जिनके निर्माण में हमारे बारह-बारह जवानों ने अपनी शहादत दी है। उन सड़कों का महत्व हिन्दुस्तान की और दुनिया कि किसी भी सड़क से अलग हैं, वो दुनिया के इतिहास की ऐसी सड़कें है जिनका वर्णन कहीं आज तक नहीं किया गया होगा, जिनके निर्माण में इतनी बड़ी कुर्बानी हुई। 
 डॉ. सिंह ने इस बार के लोक सुराज अभियान में सुकमा में रात रूकने के बाद सड़क मार्ग से केरलापाल में आयोजित समाधान शिविर की अपनी यात्रा को भी याद किया और कहा - केरलापाल वो जगह है, जहां अलेक्स पॉल मेनन (तत्कालीन कलेक्टर) का अपहरण हुआ था उठाकर ले गए थे। उस सड़क पर कार से मेरी यात्रा को लेकर अधिकारियों को भी इस बात का भय था कि इस सड़क से मै। कैसे जा रहा हूं। लेकिन मैंने कहा कि मैं केरलापाल  जरूर जाऊंगा और वहां के लोगों से मिलूंगा। केरलापाल के समाधान शिविर में हजारों लोगों की उपस्थिति में विकास के प्रति सड़क, पुल-पुलिया के प्रति जो मांग मैंने देखी, तो मुझे लगा कि बस्तर बदल रहा है, सुकमा, बीजापुर बदल रहा है। अब वहां का एक-एक व्यक्ति विकास से जुड़ रहा है, योजनाओं से जुड़ रहा है और सरकार से जुड़ रहा है और यही हम चाहते थे। मुख्यमंत्री ने कहा शांति तभी आएगी जब विकास होगा और उस दिशा में इस ब्रिज (पुल) ने कमला कर दिया। उस क्षेत्र के जवानों ने कमाल कर दिया। ऐसे निर्माण कार्य एक संदेश देकर लोगों के मन में विश्वास पैदा करेंगे। 

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