न्यायिक , अभियोजन और पुलिस अधिकारियों का सम्मेलन

न्यायिक अधिकारियों, अभियोजन और पुलिस अधिकारियों का जिला स्तरीय सम्मेलन आयोजित दोषियों को सजा दिलाने निष्पक्ष जांच जरूरी: श्री उबोवेजा

महासमुंद 10 अप्रैल 2016 - जिला मुख्यालय महासमुंद के लभरा स्थित विश्राम भवन में आज न्यायिक अधिकारियों, अभियोजन और पुलिस अधिकारियों की जिला स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। अपराधियों को सजा दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच और साक्ष्य संकलन के वैज्ञानिक तौर-तरीकों सहित इसके विभिन्न आयामों पर सम्मेलन में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। हाई कोर्ट बिलासपुर से आए न्यायाधीश श्री इन्दर सिंह उबोवेजा ने सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए मुख्य वक्ता के रूप में इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी। सम्मेलन का आयोजन राज्य न्यायिक अकादमी और जिला एवं सत्र न्यायाधीश महासमुंद के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
             मुख्य अतिथि की आसंदी से न्यायाधीश श्री उबोवेजा ने कहा कि स्वस्थ समाज निर्माण के लिए सभी के लिए कानून का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि कानून केवल वकील अथवा अदालतों के इस्तेमाल के लिए ही नहीं है बल्कि यह सभी पर समान रूप से लागू होता है। उन्होंने कहा कि जांच एजेन्सी को साक्ष्य संकलन और इसकी तकनीकी पहलुओं का अच्छा जानकार होना चाहिए ताकि दोषी व्यक्ति को न्यायालय द्वारा दण्डित किया जा सके। इसके साथ ही निर्दोष व्यक्ति को अपने को निर्दोष साबित करने का भी अधिकार है। आमतौर पर यह देखा गया है कि अनुसंधान में कुछ कमियों की वजह से दोषी होते हुए भी व्यक्ति छूट जाते हैं। सम्मेलन में आए अधिकारियों को इन कमियों के बारे में विशेष तौर से बताया गया। श्री उबोवेजा ने कहा कि थानों में आए प्रार्थी के साथ सौजन्यता पूर्वक बर्ताव किया जाना चाहिए। इसके साथ किसी भी हालत में बदसलूकी नहीं किया जाना चाहिए। उसके अधिकार की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। किसी भी व्यक्ति को अपमानित करने का अधिकार किसी को नहीं है। कानून के अनुसार प्रशासन चलाने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है, यदि ऐसा नहीं होगा तो समाज में अशान्ति का वातावरण बन सकता है। श्री उबोवेजा ने कहा कि अधिकारियों को कानून की अच्छी जानकारी होनी चाहिए। उन्हें ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ने की आदत बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आपराधिक घटना की जांच के लिए कानून के तहत एजेन्सी निर्धारित किए गए है। इसकी कार्य-प्रणाली में दखल करने का अधिकार किसी अदालत अथवा अन्य किसी भी संस्था को नहीं है। उन्होंने अपराधी को सजा दिलाने के लिए घटना स्थल का नक्शा भी सूझ-बूझ के साथ तैयार करने पर बल दिया।
          जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री ए.के.बेक ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि किसी आपराधिक घटना में विवेचना करने वाले अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी और वफादारी से अपना कार्य करना चाहिए। जिससे लोगों में न्याय के प्रति भरोसा कायम रहे। उन्होंने कहा कि जमाना आज सूचना और संचार क्रांति का है। जरूरत के मुताबिक हमें साक्ष्य के तौर पर इलेक्ट्रानिक फार्मट में भी जानकारी लेना पड़ सकता है। श्री बेक ने कहा कि हमारे समाज में विभिन्न क्षेत्रों में बड़े ही कामयाब लोग हैं, उनके अनुभव का फायदा भी हमें उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम जिनके लिए कार्य करते हैं, उन्हें हमारी कार्य-प्रणाली की समझ भी होनी चाहिए।

जिला कलेक्टर श्री उमेश कुमार अग्रवाल ने आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े अधिकारियों के इस संयुक्त सम्मेलन की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोक सेवकों को अनेक बार कानूनी बारीकियों की जानकारी नहीं रहती है, जिसके कारण अपराधी छूट जाते हैं। इस सम्मेलन में इस संबंध में अच्छा मार्गदर्शन मिलेगा। जिला पुलिस अधीक्षक श्रीमती नेहा चम्पावत ने कहा कि न्याय से जुड़े अधिकारियों में आपसी समन्वय होना जरूरी है। इससे हमें दोषियों को सजा दिलाने में काफी सहायता मिलेगी।

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