नशा मुक्ति के लिए पुलिस प्रशिक्षण

नशे की लत परिवार और समाज के लिए घातक: डी.जी.पी. : ‘‘पुलिस अधिकारी एन.डी.पी.एस. एक्ट के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें’’
रायपुर 25 अप्रैल 2018 - पुलिस महानिदेशक श्री ए0एन0 उपाध्याय ने आज पुलिस मुख्यालय नया रायपुर में एन. डी. पी. एस. एक्ट 1985 (नारकोटिक्स ड्रग्स एण्ड साईकोट्रापिक संस्टेन्स अधिनियम) केे अन्तर्गत प्रभावी कार्यवाही विषय पर विभागीय अधिकारियों के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया। दो दिवसीय कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और पुलिस निरीक्षक हिस्स ले रहे है। पुलिस महानिदेशक ने शुभारंभ सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि नशे की लत एक ऐसी बुराई है, जो व्यक्ति के स्वयं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के साथ-साथ उसके परिवार, समाज और देश के लिए भी घातक है।
    श्री उपाध्याय ने  पुलिस थाना प्रभारी से लेकर जिला पुलिस अधीक्षक तक सभी अधिकारी यह सुनिश्चित कर ले कि उनके क्षेत्रों में नशे की सामग्रियों का अवैध भण्डारण तथा अवैध परिवहन नही होने देना है इसके लिये कठोरतम वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित करें, क्योंकि नशीली वस्तुओं का सेवन जहां व्यक्ति के स्वयं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, वहीं किसी व्यक्ति के नशे की आदत से परिवार और समाज के लिए भी घातक है, इन्ही सभी बातों को ध्यान में रखकर भारत सरकार ने एन.डी.पी.एस. एक्ट में सभी प्रावधान किये हैं और नशीली वस्तुओं के व्यवसाय की रोकथाम तथा अपराधी को पकड़ने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहन हेतु पुरस्कारों का भी प्रावधान किया गया है। नशे का कारोबार एक गंभीर समस्या है शासन द्वारा समय-समय पर आवश्यक कानून बनाये जाते हैं लेकिन उन कानूनों को लागू करना तथा अपराध की रोकथाम और अपराधी को न्यायालय की ओर से कड़ी सजा दिलवाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पुलिस की है।
    श्री उपाध्याय ने यह भी कहा कि पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर आयोजित कार्यशालाओं के माध्यम से पुलिस अधिकारियों को अपने कार्य में अधिक दक्ष बनाया जाता है और विवेचना के दौरान आपके कार्यों में आने वाली कठिनाईयों और शंकाओं का समाधान किया जाता है अतः समस्त अधिकारी अपने-अपने जिम्मेदारियों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करें।
    अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध अनुशंधान विभाग) श्री आर0 के0 विज ने प्रशिक्षण कार्यशाला में उपस्थित पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुये चिंता व्यक्त किया कि राज्य में एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत पकड़े गये अपराधियों के सजा की दर अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत सजा की दर बढ़ाने के लिए कानूनी बारीकियों को बताया। श्री विज ने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस बड़े-बड़े अपराधों को हल करने और अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाने में काफी आगे है साथ ही उन्होंने इस कानून के तहत मादक पदार्थों की जप्ती, सैम्पालिंग, भण्डारण, सुरक्षित रख-रखाव और साक्ष्यों के संग्रहण की बारीकियों को विस्तार पूर्वक समझाया। श्री विज ने अधिकारियों को बताया कि इस कानून के तहत अपराधियों के मृत्यु दण्ड तक का प्रावधान है,  अगर कोई व्यक्ति नशीली दवाओं के सेवन का आदि है तो पुलिस को उसे मुक्ति दिलाने का भी प्रयास करना चाहिये। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री विज ने स्कूली बच्चों और युवाओं को नशे की लत से दूर रखने के लिये पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों और कॉलेजों में नशे के विरूद्ध जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिये।
    सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री गिरजाशंकर जायसवाल ने प्रशिक्षण कार्यशाला की आवश्यकता और रूपरेखा पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय अपराध अनुसंधान विभाग की ओर से प्रकाशित मार्गदर्शिका पुस्तिका का विमोचन पुलिस महानिदेशक श्री ए.0 एन0 उपाध्याय, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री आर0 के0 विज ने किया।
    इस कार्यशाआ में सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश श्री रघुवीर सिंह ने एन.डी.पी.एस एक्ट अधिनियम एवं संशोधन विषय पर अपना व्याख्यान दिया। इस कार्यशाला का समापन 26 अप्रैल 2018 को होगा।

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