नवरात्री में सराफा व्यापारी देवी माँ के शरण पड़े

भारत सरकार के कर से दुखी सोने चांदी हीरे मोती के सराफा कारोबारी माता के शरण में हैं।

हडताल से ठप सराफा व्यापार नवरात्रि में मत भक्ति की ओर मुड़ा।    
सराफा का हड़ताल बहुत दिनों से चल रहा है। 
केंद्र सरकार के कर बढ़ाने से दुखी अपना दुकान और व्यापर बंद करे हुए सराफा व्यापारी नवरात्री में मत के शरण में गुहार लगाकर सरकार की बुद्धि ठीक होने की कामना कर रहें हैं।

आखिर क्या होगा सराफा नवरात्रि का इस साल २०१६ में ?

हीरे और सोने पर एक्साइज ड्यूटी की खिलाफत कर रहे सराफा कारोबारी नवरात्रि के पहले दिन मां महामाया मंदिर पहुंचे।

कारोबारियों ने मातारानी से केंद्र सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। हर साल नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में गहनों की भारी बिक्री होती है। इस साल 40 दिन से हड़ताल की वजह से सराफा कारोबारियों का व्यापार ठप है। यही वजह है, कारोबारियों ने महामाया मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की। छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष तिलोकचंद बरड़िया और रायपुर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हरख मालू ने बताया, गुरुवार को रायपुर में आयोजित महारैली के बाद सभी जिलों में कारोबारी नए सिरे से आंदोलन में जुट गए हैं। अब सिर्फ एक्साइज ड्यूटी हटने के बाद ही सराफा बाजार प्रारंभ होगा। तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने के लिए हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत कर दी गई है। अब तक हजारों कारोबारियों ने अपने हस्ताक्षर कर सर्मथन दिया है। बहुत जल्द इसे राष्ट्रपति को प्रेषित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया, देशभर में कारोबारियों द्वारा लगातार आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन अब तक केंद्र सरकार की ओर से बातचीत की कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई।

सराफा हड़ताल के साथ ही क्रमिक भूख हड़ताल भी लगातार जारी है। रायपुर में अब तक 200 से अधिक कारोबारी आंदोलन के सर्मथन में क्रमिक भूख हड़ताल में भाग ले चुके हैं। शुक्रवार को विजय नायक, भरत संगाणी, जगदीश परमार, शरद सावंत, नाना परमार भूख हड़ताल पर रहे।

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