नरेगा की छत्तीसगढ़ में उपलब्धियाँ

Submitted by Editor on शुक्र, 03/06/2016 - 18:35

 

महात्मा गांधी नरेगा में रोजगार उपलब्ध कराने में छत्तीसगढ़ अन्य प्रदेशों से आगे
महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत छत्तीसगढ़ अन्य प्रदेषों से आगे है। छत्तीसगढ़ में प्रदेष में रोजगार की मांग करने वाले परिवारों को रोजगार प्रदाय किया जा रहा है। रोजगार प्रदाय का प्रतिषत 94.40: रहा। राज्य का यह प्रतिषत आंध्रप्रदेष, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब व उत्तरप्रदेष जैसे राज्यों के समकक्ष है। वहीं बिहार, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक व उड़ीसा जैसे राज्यों से अधिक है। भारत सरकार की वेबसाइट www.nrega.nic.in डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट नरेगा डॉट एनआईसी डॉट इन) पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार योजनांतर्गत प्रदेष में मांग विरूध्द 3,46,368 परिवारों ने 100 दिवस रोजगार पूर्ण किये। 100 दिवस रोजगार पूर्ण करने वाले परिवारों के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य (14: परिवार ), महाराष्ट्र (11: परिवार), राजस्थान (12: परिवार), उत्तरप्रदेष (3: परिवार), पष्चिम बंगाल (5: परिवार), उड़ीसा (9: परिवार), मध्यप्रदेष (6: परिवार), गुजरात (5: परिवार), हिमाचल प्रदेष (10: परिवार), झारखण्ड (6: परिवार), उत्तराखण्ड (7: परिवार) व कर्नाटका (8: परिवार) जैसे राज्यों से अग्रणी है । वहीं दूसरी तरफ 100 दिवस रोजगार पूर्ण करने वाले परिवारों का राष्ट्रीय औसत 10 प्रतिषत है जबकि राज्य का औसत 14 प्रतिषत है।

रोजगार की माँग करने वाले 5.60: श्रमिक, जो काम पर उपस्थित नहीं हुये उन्हें काम उपलब्ध नहीं कराया जा सका। महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत लागू ई-मस्टर रोल प्रणाली में पहले अकुशल श्रम के इच्छुक ग्रामीण श्रमिकों से माँग प्राप्त की जाती है और वास्तविक रुप से जो काम के लिए उपलब्ध होते हैं, उन्हीं के नाम की एण्ट्री रोजगार प्राप्त करने वालों में की जाती है।   राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रति परिवार औसत श्रम दिवस 46 है, जबकि राज्य का प्रति परिवार औसत श्रम दिवस 52 है, जो कि आंध्रप्रदेष, राजस्थान, मध्यप्रदेष, बिहार, महाराष्ट्र, झारखण्ड, उत्तरप्रदेष व पष्चिम बंगाल जैसे राज्यों से अधिक है।

     रोजगार की मांग करने वाले परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केन्द्र सरकार ने सत्र 2013-14 में 1446.02 करोड़ राज्य के लिये स्वीकृत किये और राज्य सरकार के अनुदान सहित अन्य मदों से कुल 2,199.60 करोड़ रूपये की राषि प्राप्त हुई। उपलब्ध राषि के विरूध्द 2072.61 करोड़ रूपये व्यय हुये। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2014-15 में जून माह तक राज्य को केन्द्र सरकार से 844.35 करोड़ रूपये मिले। 19.92 लाख परिवारों द्वारा की गई रोजगार की मांग के विरूध्द 14.98 लाख परिवारों को रोजगार प्राप्त हुये हैं, जिस पर 664.64 करोड़ रूपये व्यय किये जा चुके हैं। वर्ष 2013-14 में 27 लाख परिवारों द्वारा रोजगार की मांग की गई है जिसके विरूध्द 25 लाख 12 हजार परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया।

महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत ग्रामीण परिवारों के आजीविका संवर्धन के लिए उनकी निजी भूमि पर व्यक्तिगत आस्तियाँ जैसे- परती भूमि या बंजर भूमि का विकास, कूप निर्माण, डबरी निर्माण, बागवानी, कुक्कुट(मुर्गीपालन) आश्रय, बकरी आश्रय, सुअर आश्रय, पशु आश्रय, पशुधन के लिए अधोसंरचना का निर्माण एवं मत्स्य पालन के कार्य स्वीकृत किये जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों, खेल मैदान का निर्माण, व्यक्तिगत घरेलू शौचालय, विद्यालय/आंगनबाड़ी शौचालय, गोठान निर्माण जैसे कार्य भी लिये जा रहे हैं। ग्रामीणों के रोजगार की मांग का पंजीयन, षिकायतों का निवारण एवं योजनांतर्गत लिये जा रहे कार्यों के संबंध में भारत सरकार के निर्देषानुसार रोजगार दिवस का आयोजन भी ग्राम पंचायत स्तर पर किया जा रहा है।

पथरीली जमीन पर लिखी विकास की गाथा : महात्मा गांधी नरेगा से ग्राम पंचायत कमरीद की बदली सूरत
कहते हैं जहां पर चाह हो वहां पर राह बनाना आसान होता है। ऐसा ही कुछ जांजगीर-चांपा जिले के जनपद पंचायत पामगढ़ के ग्राम पंचायत कमरीद के लोगों ने कर दिखाया है।
शिवनाथ, महानदी और जोंक नदी के त्रिवेणी संगम पर स्थित शिवरीनारायण की पावनधरा के पास ही ग्राम पंचायत कमरीद और आश्रित ग्राम देवरघटा है। इस गांव में पथरीली जमीन होने के कारण तालाब का निर्माण नही हो पा रहा था। लोगों को निस्तारी के पानी के लिए बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रह था लेकिन गांव के लोगों के साहस और महात्मा गांधी नरेगा के सहयोग से गांव में न केवल तालाब का निर्माण हुआ बल्कि इससे गांव में आर्थिक समृद्धि के द्वार भी खोल दिए है। तालाब के निर्माण जहां लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ वहीं निस्तारी के साथ सिंचाई के लिए भी भरपूर पानी उपलब्ध हो रहा है।
           ग्राम पंचायत कमरीद के सरपंच श्री जगतराम गोंड बताते है कि इस गांव को देवों की भूमि भी कहा जाता है परंतु पथलीरी जमीन होने के कारण तालाब, सड़क और नहर नाली का निर्माण नही हो पा रहा था लेकिन गांवों वालों की दृढ़ इच्छा शक्ति और मनरेगा से गांव में न केवल तालाब बल्कि सड़क व नाली के निर्माण से गांव में आर्थिक समृद्धि के द्वार खोल दिए है।
त्रिवेणी संगम तक बना पहुंच मार्ग
कमरीद ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम देवरघटा में शिवनाथ, महानदी और जोंक नदी के त्रिवेणी संगम तक पहुंच मार्ग नहीं होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। जब मनरेगा से यहां पर मुरमीकरण सड़क का काम हुआ तो लोगों के आवागमन का साधन आसान हो गया। दूर-दूर से लोग यहां पर दर्शन करने पहुंचने लगे। बाद में इस मिट्टीमुरम सड़क पर ही डामरीकरण सड़क के निर्माण से आवागमन और सुलभ हो गया।
       सरपंच ने बताया कि इसी तरह ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत संवरिया तालाब निर्माण, गौठान निर्माण, कमरीद से सबरिया डेरा पहुंच मार्ग, अडबंधा तालाब गहरीकरण, गोपाल आश्रम से देवरघटा पहुंच मार्ग, कमरीद मुख्य मार्ग से गोपाल आश्रम पहुंच मार्ग, मौली तालाब गहरीकरण देवरघटा, रामसागर तालाब गहरीकरण, सबरिया तालाब गहरीकरण व पचरी निर्माण, आश्रम पहुंच मार्ग से देवरघटा पहुंच मार्ग, मउहा तेंडूवाही तालाब गहरीकरण, तेंदुवाही तालाब गहरीकरण, सवरिया डेरा से पैसरघाट पहुंच मार्ग तथा डेरा रोड से श्मशान घाट पहुंच मार्ग का निर्माण कार्य कराया गया है।
 

 

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ग्रामीण भारत नरेगा से संवरता