नक्सल प्रभावित इलाकों में सौर ऊर्जा से भी प्रकाश व्यवस्था

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित आदिवासी बहुल बस्तर अंचल के दूर-दराज के इलाकों के अनेक स्थानों पर सौर ऊर्जा प्रणाली पर आधारित फोटो वोल्टाईक संयंत्र लगा कर भी प्रकाश की व्यवस्था की जा रही है। पिछले दो वर्षो में नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवारों के लिए लगाए गए राहत शिविरों सहित विभिन्न पुलिस थानों और पुलिस कैम्पों में एक करोड़ 45 लाख रूपये की लागत से 44 स्थलों में 480 सोलर स्ट्रीट लाईट संयंत्र स्थापित करके प्रकाश व्यवस्था की गयी है।

छत्ताीसगढ़ राज्य अक्षय उर्जा विकास एजेंसी(क्रेडा)के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि वर्ष 2006-07 में एक करोड़ एक लाख 35 हजार रूपये की लागत से 22 स्थानों में 342 सोलर स्ट्रीट लाईट संयंत्रों के माध्यम से प्रकाश व्यवस्था की गई है। इन स्थलों में बीजापुर जिले के बीजापुर विकासखंड के ग्राम कासोली, जांगला, कोंटा, बीजापुर, गंगालूर, चेरपाल, नयापारा(बीजापुर), भैरमगढ़ विकासखण्ड के ग्राम नेलसनार, भैरमगढ़, माटवाड़ा, कुटरू, मिरतुर फरसेगढ़ बेदरे, उसूर विकासखंड स्थित ग्राम आवापल्ली, बांसागुडा, उसूर, दक्षिण बस्तर (दन्तेवाड़ा) जिले के कोंटा विकासखंड के ग्राम दोरनापाल, एर्राबोर, इंजरम, पोलमपल्ली और मरईगुड़ा शामिल है।

वर्ष 2007-08 में 44 लाख 11 हजार रूपये की लागत से 22 स्थलों में 138 सोलर स्ट्रीट लाईट संयंत्र स्थापित किए गए। इनमें नवगठित बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के ग्राम फरसेगढ़, रानीबोदली, गुदमा, करकेली, बांगापाल, जैवारम, बोदली, पिनकोंडा, बीजापुर विकासखंड स्थित ग्राम तोयेनार, पामलवाया, गंगालूर, उसूर विकासखंड के मुख्यालय उसूर और पामेड़, भोपालपट्टनम विकासखंड के ग्राम भद्राकाली, तारलागुड़ा, दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले के कोंटा विकासखंड स्थित ग्राम बंडा, पोलमपल्ली, मरईगुड़ा भेज्जी, जगरगुण्डा, कुआकोंडा विकासखंड स्थित पालनार और अरनपुर ग्राम शामिल है।

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