नई जिंदगी

मासूमों को मिली नई जिंदगी

गरियाबंद की पांच वर्षीय अंजली सामान्य बच्चों की तरह ही थी, लेकिन वह दूसरे बच्चों की तरह ना तो खेल पाती और ना ही दौड़ पाती थी। थोड़ा खेलने कूदने पर भी उसकी सासें भर जाती। पहले उनके परिवार वालों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब परेशानी बढ़ती गई तब अंजली को उन्होंने डॉक्टर को दिखाया। डाक्टरों ने बताया कि उनकी नन्ही अंजली के दिल में सुराख है तो अंजली के पिता श्री अनिल पांचे की आंखों में अंधेरा छा गया, क्योंकि इस बीमारी का मतलब था डेढ़-दो लाख रूपए का खर्च। इतने पैसों का एक मुश्‍त इंतजाम करना श्री पांचे के बस की बात नहीं थी। हर तरफ से निराष श्री पांचे को जब मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना के बार