छत्‍तीसगढ़ में गरीबी दूर करने के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण

छत्तीसगढ़ के लिये केन्द्रीय विश्वविद्यालय
शैक्षणिक विकास भी आवश्यक - डॉ. मुंगेकर
चार सालों में छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा का विस्तार
देश में साक्षरता बढ़ी है, लेकिन उसके अनुपात में गुणवत्ता नहीं
गुणात्मक सुधार और रोजगारोन्मुखी शिक्षा से गरीबी दूर होगी
अधोसंरचना विकास के साथ ही शिक्षकों और महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण

रायपुर, 22 फरवरी 2008 - शिक्षा के प्रति उदासीनता को चुनौती देते हुए एक कार्यशाला केन्द्रीय योजना आयोग के सदस्य डॉ. भालचन्द्र मुंगेकर की अगुवायी में सम्‍पन्‍न हुई।

कार्यशाला में उठे हुए मुद्दों पर सटिक क्रियांन्‍वयन छत्‍तीसगढ़ को वैश्विक परिदृश्‍य मे महत्‍वपूर्ण स्‍थान दिला सकता है। मुंबई विश्‍वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति एवं आज देश की योजना का खाका खीचने का कार्य करने वाले वाले डॉ मुंगेकर ने माना कि देश के विकास के लिए अकेले आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है। सामाजिक और शैक्षणिक विकास भी आवश्यक है। आर्थिक विकास तो विकास का केवल एक भाग है। डॉ. मुंगेकर आज यहां सांईस कॉलेज में 'शैक्षणिक सुधार' विषय पर उच्च शिक्षा विभाग तथा पं. रविशंकर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे, जिसके  मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी थे।

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना शिक्षा पंचवर्षीय योजना है। इसमें देश के लिए सात आई.आई.टी., सात आई.आई.आई.एम. और केन्द्रीय विश्वविद्यालय का प्रावधान किया गया है, और एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के लिये है।

डॉ. मुंगेकर ने संतुलित विकास पर जोर देते हुए कहा कि असंतुलित विकास किसी भी दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। क्षेत्रीय असंतुलन के कारण ही छत्तीसगढ़ जैसे नये राज्य का जन्म हुआ है। उन्होंने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए संतुलित विकास आवश्यक है। योजना आयोग का गठन क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए ही हुआ है। डॉ. मुंगेकर ने कहा कि आजादी के बाद देश का विकास तेजी से हुआ है। सन् 1991 के बाद विकास की रफ्तार तेज हुई है। पहले जहां 3 से 4 प्रतिशत विकास दर हासिल होती थी आज हम 9 प्रतिशत तक विकास दर हासिल कर रहे हैं। भारत और चीन ही ऐसे देश हैं जहां की अर्थव्यवस्था तेजी से विकास कर रही है। उन्होंने गरीबी दूर करने के लिए शिक्षा को महत्वूपर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार और रोजगारोन्मुखी शिक्षा के माध्यम से गरीबी को दूर किया जा सकता है। इसमें अधोसंरचना विकास के साथ ही शिक्षकों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। शिक्षकों को आज अभिभावक की भूमिका निभाने की जरूरत है। उन्होंने विकास में महिलाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

      उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी ने कहा कि अनेक कमियों के बावजूद छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में काफी विस्तार हुआ है। राज्य बनने के समय छत्तीसगढ़ में शिक्षा का विकास दर 1.5 प्रतिशत था जो पिछले चार सालों में बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार हुआ है।  हर साल लक्ष्य तय कर महाविद्यालयों को अपग्रेड किया जा रहा है। रोजगारोन्मुखी नये पाठयक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। डॉ. बांधी ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय नियामक आयोग का गठन किया गया है। शिक्षकों के रिफ्रेशर कोर्स के लिए एकेडमिक ट्रेनिंग सेंन्टर की स्थापना की गई है। इसी तरह जो विद्यार्थी किसी कारणवश पढ़ाई नहीं कर पाते, उनके लिए पंडित सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। डॉ. बांधी ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य में शिक्षा के विस्तार के लिए योजना आयोग को भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने का आग्रह  डॉ. मुंगेकर से किया।

      सचिव उच्च शिक्षा श्री के. डी. पी. राव ने कहा कि राज्य में शिक्षा का स्तर बढ़ा है।  रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में अठारह महाविद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई हो रही है। नये-नये विश्वविद्यालय खोले जा रहे हैं। अधिकांश स्नातक पाठयक्रम रोजगारन्मुखी है।

पं. रविशंकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. लक्ष्मण चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षा का विस्तार निचले स्तर तक हो। प्राथमिक शिक्षा की बुनियाद ही ठोस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर साल बजट में शिक्षा के लिए करोड़ों रूपये का प्रावधान होता है, इसका योजनाबध्द ढंग से समुचित उपयोग होना चाहिए।

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि आज हमें सामाजिक अधोसंरचना को नये सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिक  स्तर पर ध्यान केन्द्रित करना आवश्यक है।
वरिष्ठ पत्रकार श्री रमेश नैय्यर ने कहा कि देश में साक्षरता बढ़ी है, लेकिन उसके अनुपात में गुणवत्ता नहीं। आज भी देश में 30 करोड़ लोग अशिक्षित है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा की बुनियाद को ठीक करना होगा।

विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.एस.के. वर्मा ने अंत में आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर शिक्षाविद्, गणमान्य नागरिक और महाविद्यालय के प्राध्यापकगण उपस्थित थे।

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