छत्तीसगढ़ के कलेक्टर मंत्रालय बैठक में

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रालय में कलेक्टरों की समीक्षा बैठक, जनहित के ऐसे कार्य करें जिनसे सरकार की बेहतर छवि बने और लोग आपको भी याद रखें : डॉ. रमन सिंह
मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों से कहा, आम जनता को धैर्य और संवेदनशीलता से सुनें
नये जिलों के गठन की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश, धान खरीदी सहित विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा

रायपुर 21 नवम्बर 2011 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जिला कलेक्टरों को राज्य शासन की नीतियों और योजनाओं के अनुरूप अपने-अपने प्रभार जिलों के विकास के लिए प्राथमिकताओं का निर्धारण करने और उसके अनुरूप परिणाम मूलक काम करने के निर्देश दिए हैं। डॉ. सिंह ने कहा है कि जिले के प्रशासनिक कप्तान के रूप में प्रत्येक कलेक्टर को जनहित के ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनकी बदौलत राज्य सरकार की और भी ज्यादा बेहतर छवि बने और उस जिले के लोग कलेक्टर को भी लम्बे समय तक याद रखें। मुख्यमंत्री आज यहां मंत्रालय में प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों की बैठक (कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस) को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने बैठक में समर्थन मूल्य नीति के तहत किसानों से धान खरीदी व्यवस्था, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, स्कूलों में पेयजल, शौचालय और बिजली की व्यवस्था, राष्ट्रीय आजीविका मिशन के कार्यों सहित राजस्व नक्शों के नवीनीकरण् और अभिलेखों के डिजिटाइजेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जिलों में हो रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। नये जिलों के गठन की तैयारियों के बारे में भी मुख्यमंत्री ने समीक्षा कर इसके लिए प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए।
डॉ. रमन सिंह ने बैठक में कहा कि विगत लगभग आठ वर्ष की विकास यात्रा में छत्तीसगढ़ ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली सहित विकास के अनेक क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान, प्रतिष्ठा और प्रशंसा भी हासिल की है। केन्द्र सरकार के मंत्री और विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी जब छत्तीसगढ़ के जिलों  के दौरा करके वहां संचालित योजनाओं की प्रशंसा करते हैं और हमारे कलेक्टरों की तारीफ करते हैं तो मुझे भी प्रसन्नता होती है। डॉ. रमन सिंह ने आगे कहा कि अब राज्य शासन और प्रशासन एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर है। अगले दो वर्ष विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होंगे। लोग अब हमारी योजनाओं के और भी ज्यादा बेहतर परिणाम चाहते हैं। इन योजनाओं का संपूर्ण पारदर्शिता से क्रियान्वयन सुनिश्चित हो, यह प्रत्येक नागरिक उम्मीद करता है। लोकतंत्र में जनता की उम्मीदों को पूरा करने की हर संभव कोशिश करना हम सब की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से यह भी कहा कि उन्हें जिला स्तर, ब्लाक स्तर और ग्राम स्तर पर भी  आम जनता से नियमित रूप से मिलना चाहिए तथा धैर्य और संवेदनशीलता के साथ जनता को सुनकर लोगों की समस्याओं को तत्परता से हल करने का प्रयास करना चाहिए। कलेक्टर अपने जिले में सभी लोगों की आशाओं का प्रशासनिक केन्द्र बिन्दु होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलेक्टरों पर सभी विभागों के समन्वयकर्ता अधिकारी के रूप में जिले की प्रत्येक शासकीय गतिविधि के नेतृत्व, नियंत्रण और मार्गदर्शन की अहम भूमिका होती है।  इस नाते प्रत्येक कलेक्टर की भूमिका अपने जिले में एक कप्तान की तरह होती है। जिले में जो कुछ भी होता है, चाहे वह अच्छा हो या बुरा सब कुछ कलेक्टर के खाते में जाता है। प्रशासनिक कप्तान के रूप में उसे अच्छे कार्यों के लिए तालियां भी मिलती है और यदि कहीं कुछ बुरा हुआ तो गालियां भी। आम तौर पर कोई भी अधिकारी कलेक्टर के रूप में किसी एक जिले में दोबारा पदस्थ नहीं होता। इसलिए उसे कलेक्टर के रूप में जिस जिले का दायित्व मिला है, वहां शासकीय योजनाओं और नीतियों के अनुरूप जनकल्याण के ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनसे लोगों को लाभ मिले और वहां की जनता उन्हें लम्बे समय तक याद रखे। आम तौर पर लोग बिजली, पानी, सड़क, सिंचाई, स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा तथा राशन व्यवस्था जैसी अपनी दिनचर्या से जुड़ी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण जरूरतों के बारे में आवेदन लेकर प्रशासन के पास पहुंचते हैं। प्रत्येक कलेक्टर में जनता की बातों को सुनने का धैर्य होना चाहिए। जिले के प्रशासनिक मुखिया के नाते उसमें सहनशीलता का गुण भी होना चाहिए। प्रत्येक कलेक्टर को संवेदनशीलता और सूझ-बूझ के साथ काम करना होगा। डॉ. सिंह ने कहा कि कलेक्टरों को जिलों में सभी विभागों के काम-काम की नियमित समीक्षा भी करनी होगी। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से कहा कि वैसे तो प्रत्येक विभाग की योजनाएं काफी महत्वपूर्ण होती है, लेकिन कलेक्टरों को किसी एक ही योजना विशेष या एक ही काम में अपनी पूरी ताकत लगाने के बजाय उनकी समीक्षा और निगरानी के लिए प्राथमिकता तय कर लेनी चाहिए। डॉ. रमन सिंह ने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति शत प्रतिशत ज्ञानी नहीं होता। इसलिए हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि हम जो कुछ भी कर रहे हैं, या हमारी जो कुछ भी व्यक्तिगत सोच है वह अंतिम नहीं है। दूसरों के विचारों और सुझावों को भी ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। हम उनमें से बेहतर विचारों और सुझावों को अपनाते हुए और भी कुछ अच्छा काम कर सकते हैं। मुख्य सचिव श्री पी. जॉय उम्मेन, अपर मुख्य सचिव श्री सुनिल कुमार, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री एन. बैजेन्द्र कुमार, प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग श्री विवेक ढांड, प्रमुख सचिव कृषि विभाग श्री डी.एस. मिश्रा, प्रमुख सचिव लोक निर्माण श्री एम.के. राउत, सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री आर.एस. विश्वकर्मा, सचिव ऊर्जा विभाग श्री अमन कुमार सिंह, संभागीय कमिश्नर रायपुर श्री के.डी.पी. राव, बिलासपुर के श्री आर.पी. जैन, बस्तर संभाग के श्री के. श्रीनिवासुलू और कमिश्नर सरगुजा संभाग श्री एम.एस. पैकरा सहित सभी जिलों के कलेक्टर और विभिन्न विभागों के मंत्रालय स्तर के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

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