चाऊंर वाले बाबा से गरीबों को राहत की उम्मीद

छत्‍तीसगढ़ रायपुर, 07 जुलाई 2009 - प्रदेश के गरीबों के लिए 8 जुलाई से नए स्वरूप में शुरू हो रही मुख्यमंत्री खाद्यान सहायता योजना का शहरी गरीबों को भी बेसब्री से इंतजार है।

शहर के झुग्गी बस्तियों में रह रहे श्री श्याम तांडी, श्री श्याम लाल सोना, श्रीमती इंदु बघेल, श्रीमती गनेशिया बाई जैसे दर्जनों लोगों ने आज बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें आठ जुलाई का इंतजार है, जब गरीबों को तीन रूपए के बजाय दो रूपए किलो चावंल मिलेगा। उन्होंने कहा कि चाऊंर वाले बाबा ने गरीबों को सस्ता चावल देकर पुण्य का काम किया है, नमक भी अब मुफ्त मिलेगा, इससे उनके खाने का स्वाद बढ़ जाएगा।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री खाद्यान योजना 8 जुलाई से नए स्वरूप में शुरू की जा रही है, जिसमें प्रदेश के लगभग 30 लाख गरीब परिवारों को दो रूपए प्रति किलो और लगभग सात लाख 19 हजार अति गरीब परिवारों को एक रूपए किलो में चावंल का वितरण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री खाद्यान सहायता योजना के संबंध में आज रायपुर के कुकुरबेड़ा, भवानीनगर कोटा और श्रीनगर गुढ़ियारी के लोगों से बातचीत की गई। इन सभी बस्तियों के लोग इस योजना के बारे में काफी जागरूक दिखे। इन बस्तियों के लगभग सभी लोगों ने अपने पुराने राशन कार्ड पर दो रूपए और एक रूपए प्रति किलो चावल की मोहर लगवा ली है।

चावल ही सबसे बड़ा सहारा

कुकुरबेड़ा निवासी श्री श्याम तांडी ने बताया कि उनके परिवार के लिए चाऊंर वाले बाबा का चावल ही सबसे बड़ा सहारा है। उन्होंने बताया कि अब तक तीन रूपए में 35 किलो चावल मिलता था, सात सदस्यीय परिवार को यह चावल लगभग पन्द्रह दिन चलता है, अब दो रूपए किलो में चावल मिलने पर थोड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि वे रिक्शा चलाकर अपने परिवार की गुजर-बसर करते हैं, आटो और सिटी बस चलने के कारण उनकी आमदनी भी कम हो गई है। अब मुख्यमंत्री खाद्यान सहायता से मिलने वाला चावल ही उनका बड़ा सहारा है।

अब फांके की नौबत नहीं आती

कुकुरबेड़ा के ही श्री श्यामलाल सोना मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। कभी-कभी मजदूरी नहीं मिलने पर उनके परिवार को भूखे रहने की नौबत आ जाती थी, लेकिन जब से मुख्यमंत्री खाद्यान सहायता योजना का चावंल मिलना शुरू हुआ है, तब से उनके परिवार के सामने कभी फंाके की नौबत नहीं आई । उन्होंने बताया कि सस्ता चांवल मिलने से कुछ पैसे बच जाते हैं, इससे वह अपने बच्चे को आठवीं में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले बाजार से उन्हें पन्द्रह से सोलह रूपए में चावंल खरीदना पड़ता था, राशन दुकान से सस्ता चावल मिलने पर उन्हें प्रति किलो चौदह-पन्द्रह रूपए की बचत हो जाती है।

जरूरत के लिए पैसे बचाने लगी है इंदु बघेल

कुकुरबेड़ा की ही श्रीमती इंदु बघेल दूसरे के घरों में चौका बर्तन करती है। उनके पति श्री राजिम बघेल होटल में मिस्त्री का काम करते हैं। श्रीमती इंदु बघेल ने बताया कि पहले उनका पूरा पैसा राशन खरीदने में ही चला जाता था। पिछले डेढ साल से उन्हे तीन रूपए में चावंल मिलने से वह चौका बर्तन से मिलने वाला कुछ पैसा अपने दूसरे जरूरतों के लिए बचा लेती हैं। उन्होने बताया कि राशन दुकान से तीन रूपए में मिलने वाला चावल पूरे महीने नहीं चलता। दस से बारह दिनों के लिए उन्हें बाजार से 18 से 20 रूपए प्रति किलो के हिसाब से चावल खरीदना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अब दो रूपए किलो में चावल मिलने से थोड़ी राहत और मिलेगी।

दो रूपए किलो में चावल मिलने की खबर से श्रीमती राजेश्री और गनेशिया बाई भी संतुष्ट है। कुकुरबेड़ा की श्रीमती राजेश्री के पति का हाल ही में निधन हो गया है। उन्होंने बताया कि अब तो मुख्यमंत्री सहायता का चावल ही उनका सहारा है। श्रीमती राजेश्री दूसरों के घर में चौका-बर्तन करके अपने परिवार का भरण-पोषण करती है। विकलांग श्रीमती गनेशिया बाई को भी मुख्यमंत्री खाद्यान सहायता से मिलने वाले चावल का बहुत सहारा है। कुकुरबेड़ा के ही श्री मुकुदर तांडी और श्रीमती बरजो सागर भी सस्ता चावल मिलने से खुश है।

भवानी नगर कोटा की श्रीमती मोती ने बताया कि रोजी-मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही है। उन्होंने बताया कि जब से तीन रूपए किलो में चावल मिलना शुरू हुआ है, तब से उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। पहले मजदूरी से मिलने वाली एक बड़ी राशि चावल खरीदने में खत्म हो जाती थी। भवानीनगर कोटा निवासी राजकपूर साहू भी मुख्यमंत्री खाद्यान सहायता योजना को गरीबों के लिए अब तक चलाई गई सबसे बड़ी और कल्याणकारी योजना मानते हैं। उन्होंने कहा कि आज के महंगाई के जमाने में इतना सस्ता चावल और कहीं नहीं मिल सकता। श्रीनगर गुढ़ियारी की श्रीमती दुलारी बाई भी सस्ते चावल को गरीबों के लिए वरदान मानती है। उनका कहना है कि इससे बढ़कर सरकार की और कोई योजना नहीं हो सकती।

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