कृषि, ऊर्जा, खनिज और उद्योग में सबसे विकसित राज्य

टैक्स-फ्री राज्य बनने की सारी संभावनाएं मौजूद हैं छत्तीसगढ़ में: डॉ. रमन सिंह
नक्सल प्रभावित इलाकों में भी विकास की ललक बढ़ी  
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय प्रशासनिक सुधार आयोग से कहा

छत्तीसगढ़ अगले दस साल में कृषि, ऊर्जा, खनिज और उद्योग के क्षेत्र में देश का सबसे विकसित राज्य बन जाएगा। इतना ही नही बल्कि यदि लौह अयस्क, कोयला और बॉक्साइट जैसे खनिजों की रायल्टी हमें बाजार मूल्य पर मिलने लगे और प्रदेश की हीरा खदानों में उत्खनन शुरू हो जाए तो छत्तीसगढ़ हर साल दस हजार से पन्द्रह हजार करोड़ का राजस्व अर्जित करते हुए स्वयं को टैक्स-फ्री मुक्त राज्य के रूप में भी विकसित कर लेगा। इसकी सारी संभावनाएं हमारे यहां मौजूद हैं।

रायपुर, 28 सितंबर 2007 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह कल देर रात यहां अपने आवासीय कार्यालय में केन्द्रीय प्रशासनिक सुधार आयोग के सदस्यों और अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। आयोग के सदस्य श्री ए.पी. मुखर्जी और सदस्य सचिव सुश्री विनीता राय ने मुख्यमंत्री को छत्तीसगढ़ के अपने दौरे के अनुभवों की जानकारी दी। प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री जवाहर श्रीवास्तव भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर कहा कि राज्य के आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन को आम जनता के और अधिक नजदीक ले जाकर ग्रामीणों को विकास योजनाओं का समुचित लाभ दिलाने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के प्रशासनिक प्रयासों से अब सरगुजा और बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों का नक्सलियों से मोहभंग हो चुका है। इन क्षेत्रों के आदिवासी ग्रामीणों द्वारा सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई सुविधाओं की मांग राज्य सरकार से की जा रही है, जो विकास के प्रति उनकी ललक को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री ने आयोग के प्रतिनिधियों को राज्य शासन द्वारा संचालित ग्राम सुराज अभियान सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। डॉ. सिंह ने उन्हें बताया कि छत्तीसगढ़ में किसानों को सिर्फ छह प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण दिया जा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने राष्ट्रीय नीति बनने से पहले अपने राज्य के लिए ऊर्जा, खनिज और पुनर्वास नीतियों का निर्माण किया है। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ प्रवास के लिए आयोग के प्रतिनिधियों को धन्यवाद दिया और कहा कि प्रशासनिक सुधारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण में उनका यह प्रवास काफी उपयोगी और महत्वपूर्ण साबित होगा।

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