कार्यशाला पुस्तक वाचन 2009

पुस्तक वाचन अभियान पर तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न
अभियान गांव-गांव तक पहुंचना चाहिए : संचालक लोक शिक्षण श्री पिस्दा
रायपुर, 04 जुलाई 2009 - छत्तीसगढ़ में वाचन संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से इस वर्ष भी प्रदेश व्यापी पुस्तक वाचन अभियान का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान की सफलता के लिए तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

इसी सिलसिले में राजधानी रायपुर में वाचन गुणवत्ता पर तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रदेश के सोलह जिलों की जिला साक्षरता समितियों के सचिव, परियोजना निदेशक तथा एक-एक महिला एवं पुरूष स्रोत व्यक्ति शामिल हुए। कार्यशाला में वाचन, गुणवत्ता और अभियान की महत्ता पर विशेष रूप से चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त पुस्तक वाचन अभियान के लिए गठित कोर ग्रुप की बैठक में लिए गए निर्णयों के संबंध में भी कार्यशाला के प्रतिभागियों के बीच सामूहिक चर्चा की गई।

कार्यशाला में प्रतिभागियों के 6 समूह बनाए गए थे। कार्यशाला के दौरान गुणवत्तापूर्ण वाचन, वाचन अभियान में साहित्यकारों की सहभागिता, अभियान के माध्यम से शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने, वाचन क्लबों के गठन सहित पुस्तक वाचन दिवस 8 और 9 अगस्त 2009 को होने वाले कार्यक्रमों के संबंध में विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण एवं राज्य संसाधन केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला के समापन समारोह में संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय तथा संचालक, राजीव गांधी शिक्षा मिशन श्री के.आर. पिस्दा ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा से लोक कल्याण हो, ऐसी शिक्षा की आज जरूरत है। पठन-पाठन में लोगों की भागीदारी होनी चाहिए। इसके साथ ही राज्य में वाचन संस्कृति को प्रोत्साहित करने आयोजित होने वाले पुस्तक वाचन अभियान में गुणवत्ता पूर्ण वाचन के लिए अच्छी पुस्तकें पढ़ने को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने आगे कहा कि यह अभियान केवल कागजों तक ही सीमित न रहे बल्कि जमीनी स्तर तक इसका संदेश पहुंचे। अभियान का उद्देश्य गांव-गांव तक पहुंचना चाहिए तभी यह सार्थक होगा। श्री पिस्दा ने कहा कि इसके लिए उचित वातावरण तैयार करना आवश्यक है। वाचन अभियान का उद्देश्य रिकार्ड बनाना न होकर गुणवत्तापूर्ण वाचन होना चाहिए। किताबों की उपलब्धता एवं उसके प्रकार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
राज्य वाचन प्रभारी श्री प्रशांत पाण्डेय ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि इस वर्ष प्रदेश व्यापी वाचन गुणवत्ता अभियान के स्वरूप में परिवर्तन किया गया है। अब पुस्तक वाचन, वाचकों एवं पुस्तकों की संख्या पर केन्द्रित न होकर वाचन गुणवत्ता पर केन्द्रित होगा। कार्यशाला में श्री तुहिन देव ने अपने उद्बोधन में कहा कि वाचन संस्कृति के विकास के लिए साक्षरता कौशल को मजबूत बनाने और अर्जित ज्ञान का विस्तार करने से लोगों में पठन-पाठन के प्रति रूझान पैदा होगी। राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के परियोजना निदेशक श्री दिनेश टांक ने अभियान की शुरूआत और इस वर्ष आयोजित अभियान के बारे में प्रकाश डाला। इससे पूर्व महासमुंद की श्रीमती सरिता तिवारी, कोरिया की श्रीमती रेखा यादव, जांजगीर-चांपा जिले के श्री ओमप्रकाश शर्मा एवं दंतेवाड़ा जिले के श्री श्रीनिवास ने तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यशाला में राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के श्री शैलेन्द्र वर्मा, श्री पुरूषोत्तम चन्द्राकर, श्री डेकेश्वर वर्मा, सुश्री ऊषा रावल एवं राज्य संसाधन केन्द्र के श्रीमती आरती श्रीवास, श्रीमती ऊषा उलैया का विशेष सहयोग रहा। कार्यशाला के समापन समारोह का संचालन राज्य संसाधन केन्द्र की सुश्री सोनम एवं आभार प्रदर्शन डॉ. मनीषा वत्स ने किया।

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