एक हजार करोड़ रूपए से बनेगा राष्ट्रीय संस्थान

जैविक बाधाओं को दूर करने छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय संस्थान

छत्तीसगढ़ में खेती किसानी से संबंधित रोगों, कीड़े-मकोड़ों सहित अन्य जैविक बाधाओं से निपटने एक हजार रूपए करोड़ रूपए की लागत वाला राष्ट्रीय संस्थान स्थापित किया जाएगा। इस संस्थान की स्थापना के लिए केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को सैध्दातिक स्वीकृति भी दे दी गयी है। कृषि संकाय पर यह संस्थान छत्तीसगढ़ का पहला राष्ट्रीय स्तर का संस्थान होगा। यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा स्थापित किया जाएगा।

कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ में मुख्य फसल धान के साथ-साथ विभिन्न फसलों में होने वाले रोगों जैसे गंगई, झुलसा और कीटों के प्रकोप से होने वाली क्षति को नियत्रित करने के लिए यह संस्थान मददगार साबित होगा। इस संस्थान में छत्तीसगढ़ सहित देश में के अन्य राज्यों में भी उगाई जाने वाली विभिन्न फसलों के लिए जैविक रूप से हानिकारक कारणों को पहचान कर उनका नियंत्रण करने के उपाय खोजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि इसके लिए राज्य सरकार की केन्द्र सरकार से सकारात्मक बातचीत चल रही है, और केन्द्र सरकार द्वारा इस संस्थान की स्थापना के लिए सैध्दातिक स्वीकृति भी दे दी गयी हैं इस संस्थान में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक सभी उपाय भी किए जाएंगे। संस्थान की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा रायपुर के पोखरा अथवा भाटापारा-अर्जुनी के कृषि प्रक्षेत्रों को आवंटित करने का प्रस्ताव दिया गया है।

श्री साहू ने बताया कि इस संस्थान की स्थापना से प्रदेश के किसानों सहित कृषि वैज्ञानिकों तथा कृषि संकाय के विद्यार्थियों को भी लाभ होगा। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा वर्ष 2009 में चारा फसलों, गन्ना, औषधीय एवं सुंगधित फसलों, नाइजर, कुक्कट विकास विषय पर अखिल भारतीय स्तर की समन्वित अनुसंधान परियोजनाएं भी प्रारंभ की जा रही है। इसी तारतम्य में रेजिन एवं गम तथा लाख पर भी नेटवर्क प्रोजेक्ट प्रारंभ हो रहे हैं। श्री साहू ने बताया कि प्रदेश में फसल बहु-विविधिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगदी फसलों और अन्तरवर्ती खेती को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है।

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