अम्बेडकर अस्पताल में तृतीय लिंग समुदाय विशेष ओपीडी शुरू

तृतीय लिंग समुदाय को मुख्य धारा से जोड़ने सरकार की संवेदनशील पहल, समाज कल्याण सचिव की अध्यक्षता में बैठक आयोजित, कौशल उन्नयन के जरिए रोजगार से जोड़ने का भी प्रयास जारी

रायपुर, 07 अक्टूबर 2017 - राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में निवास कर रहे तृतीय लिंग समुदाय के लोगों को सामाजिक-आर्थिक विकास की मुख्य धारा से जोड़ने और उनके लिए शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, आवास, स्वास्थ्य सुविधा, कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार, राशनकार्ड आदि की बेहतर व्यवस्था करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इस सिलसिले में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ. एम. गीता, समाज कल्याण विभाग के संचालक डॉ. संजय अलंग, संचालक नगरीय प्रशासन श्री निरंजन दास और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

समाज कल्याण सचिव श्री बोरा ने कहा कि तृतीय लिंग समुदाय को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने और इस समुदाय के प्रति सरकार के सभी विभागों को अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्कूल-कॉलेजों के दाखिले के आवेदन फार्मों सहित सरकारी योजनाओं के आवेदन फार्मों में भी पुरूष, महिला के साथ-साथ एक कॉलम तृतीय लिंग का भी होना चाहिए, ताकि उन्हें भी चिन्हांकित कर शासकीय सुविधाओं और योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर के तीसरे तल में प्रत्येक गुरूवार को सवेरे 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक तृतीय लिंग समुदाय के मरीजों के लिए ओपीडी का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें मुफ्त ऑपरेशन की भी सुविधा दी जा रही है। राज्य के सभी जिलों में समाज कल्याण विभाग द्वारा सर्वेक्षण किया गया है और अब तक इस समुदाय के लगभग तीन हजार लोगों की पहचान कर सर्वे प्रपत्र भरवाया जा चुका है। इनमें से 338 लोगों को पहचान पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।
समाज कल्याण सचिव श्री बोरा ने बैठक में कहा कि प्राथमिक स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों की पहचान अगर तृतीय लिंग के बच्चे के रूप में होती है शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन किसी भी स्थिति में नहीं होना चाहिए और ऐसे बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का भेद भाव नहीं किया जाना चाहिए। इस वर्ग के बच्चों को प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान कर उनमें हीन भावना दूर करते हुए सकारात्मक सोच विकसित करने की भी जरूरत है। बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य सरकार के कौशल विकास विभाग द्वारा तृतीय लिंग समुदाय के लोगों को विभिन्न व्यवसायों में कौशल उन्नयन का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राज्य शहरी विकास अभिकरण, दीनदयाल अंत्योदय योजना और शहरी आजीविका मिशन के तहत अब तक इस समुदाय के 38 लोगों को ब्यूटी थेरेपी और हेयर स्टायलिंग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। बैठक में पुलिस अधिकारियों से यह अपेक्षा की गई कि वे जिला स्तर पर तृतीय लिंग समुदाय के प्रति मैदानी पुलिस अमले को अधिक संवेदनशील बनाने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित करे। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग को इस समुदाय के लोगों के लिए आवास, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, राशनकार्ड, मनरेगा में रोजगार आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में तृतीय लिंग समुदाय की बेहतरी के लिए सभी संबंधित विभागों में किए जा रहे उपायों की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि तृतीय लिंग समुदाय को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए राज्य शासन द्वारा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती रमशीला साहू की अध्यक्षता में तृतीय लिंग कल्याण बोर्ड का गठन किया गया है, जिसमें समाज कल्याण विभाग की ओर से प्रमुख सचिव अथवा सचिव, तृतीय लिंग वर्ग के चार और समाज सेवी संस्थाओं के एक प्रतिनिधि सहित कुल 16 सदस्य शामिल हैं। बोर्ड द्वारा एक नोडल एजेंसी के रूप में अपनी भूमिका निभाई जा रही है। राज्य में प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार तृतीय लिंग समुदाय के लोगों की संख्या लगभग तीन हजार है। प्रदेश भर में तृतीय लिंग समुदाय के लोगों की पहचान और उनके लिए कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा सभी जिलों में जिला स्तर पर कलेक्टर अथवा अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति का भी गठन किया गया है।

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