स्थायी लोक अदालत

रायपुर, 07 अक्टूबर 2009 - छत्तीसगढ़ में जन-उपयोगी सेवाओं से संबंधित विगत दो वर्ष में एक हजार 175 स्थायी लोक अदालतें आयोजित की गई है। इनमें अब तक दस हजार 319 प्रकरण निराकृत किए गए हैं। जिससे प्रदेश के बीस हजार 816 व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं। उन्हें मुआवजा राशि के रूप में 55 लाख 32 हजार 280 रूपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई है।

उल्लेखनीय है कि राज्य के तीन जिला मुख्यालय रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर में फरवरी 2007 से जन उपयोगी सेवाओं के लिए स्थायी लोक अदालतें स्थापित की गई है। बिलासपुर की स्थायी लोक अदालत में कोरबा और जांजगीर-चांपा, रायपुर की स्थायी लोक अदालत में महासमुन्द और धमतरी तथा जगदलपुर की स्थायी लोक अदालत में दंतेवाड़ा और कांकेर जिले शामिल है।

अंबिकापुर और दुर्ग जिले में स्थायी लोक अदालत गठन भी प्रस्तावित है। स्थायी जनउपयोगी लोक अदालतों में परिवहन, दूरभाष सेवा, किसी संस्थान के द्वारा बिजली, पानी और प्रकाश की आपूर्ति, सार्वजनिक साफ-सफाई, स्वच्छता प्रणाली, चिकित्सालय, बीमा संबंधी विवादों को आपसी सुलह समझौते से निपटाने के लिए और सुलह नहीं हो पाने की स्थिति में सरल प्रक्रिया से गुणदोष के आधार पर निराकरण के लिए स्थापित की गई है।

इन अदालतों में न्याय शुल्क की आवश्यकता नहीं है। पक्षकार भी बिना किसी अभिभाषक की सहायता के स्वयं अपने मामले में पैरवी कर सकता है। लोक अदालत का फैसला अंतिम होता है, इसकी कोई अपील नहीं होती है।

Comments

Post new comment

The content of this field is kept private and will not be shown publicly.