स्वर्गीय श्री स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी : जीवन यात्रा
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठतम साहित्यकार, पत्रकार और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी का आज रायपुर में निधन हो गया। श्री त्रिवेदी का जन्म एक जुलाई 1920 को हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा राजधानी रायपुर के नयापारा स्थित प्राथमिक शाला में और हाईस्कूल की शिक्षा भी रायपुर में ही तत्कालीन लारी स्कूल (वर्तमान में माधवराव सप्रे उच्चतर माध्यमिक विद्यालय) में हुई थी।
श्री त्रिवेदी ने पन्द्रह वर्ष की अपनी किशोरावस्था से ही साहित्य और पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। वे हिन्दी साहित्य मंडल रायपुर की मासिक पत्रिका 'आलोक' के संपादक थे। उन्होंने जून 1942 में श्री केशव प्रसाद वर्मा के साथ रायपुर से जनमानस में राष्ट्रीय चेतना के प्रसार के लिए हिन्दी साप्ताहिक 'अग्रदूत' का संपादन शुरू किया। साहित्य और पत्रकारिता के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में अपनी सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें तत्कालीन अंग्रेज शासकों ने प्रताड़ित और दण्डित भी किया।
स्वर्गीय श्री त्रिवेदी मार्च 1946 में रायपुर के ही साप्ताहिक 'महाकोशल' के सम्पादक बने और पहली जनवरी 1951 में जब 'महाकोशल' का प्रकाशन छत्तीसगढ़ के प्रथम दैनिक समाचार पत्र के रूप में शुरू हुआ तब वे ही इस दैनिक के प्रथम सम्पादक रहे और वर्ष 1954 तक उन्होंने इसके सम्पादन की जिम्मेदारी सम्हाली। स्वर्गीय श्री त्रिवेदी को छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पत्रकारिता का प्रवर्तक भी माना जाता है। तत्कालीन मध्य प्रांत (सी.पी. एण्ड बरार) में वर्ष 1950 के दशक में वहां के तत्कालीन राज्य शासन द्वारा जब जनसम्पर्क विभाग की स्थापना की गयी, तो श्री त्रिवेदी 1954 में उन चार जनसम्पर्क अधिकारियों में से थे जिन्हें इस विभाग के स्थापना के दिनों में शासकीय प्रचार-प्रसार के कार्यों में अपना योगदान देने का अवसर मिला। श्री त्रिवेदी तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार के सूचना एवं प्रकाशन विभाग (वर्तमान जनसम्पर्क विभाग) के उप संचालक के पद से वर्ष 1978 में सेवानिवृत्त हुए और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हीं दिनों एक बार फिर दैनिक 'महाकोशल' रायपुर के सम्पादक बने।
श्री त्रिवेदी ने फरवरी 1983 में 'अग्रदूत' के सलाहकार सम्पादक के रूप में भी कार्य करना शुरू किया। साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में वे जीवन के अंतिम क्षण तक सक्रिय रहे। श्री त्रिवेदी का कहानी संग्रह 'बरसों बाद' और कहानी संग्रह 'नदी का तीसरा किनारा' हिन्दी साहित्य में काफी चर्चित और प्रशंसित हुआ है। स्वर्गीय श्री त्रिवेदी के साहित्य सृजन पर गुरू घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर सहित अनेक विश्वविद्यालयों में शोध कार्य भी हुए हैं। स्वर्गीय श्री त्रिवेदी वर्ष 1951 में जगदलपुर (बस्तर) में आयोजित मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अधिवेशन में सम्मेलन के प्रधानमंत्री भी चुने गए थे। सम्मेलन में वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय श्री पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी को अध्यक्ष निर्वाचित किया गया था। स्वर्गीय श्री त्रिवेदी के ज्येष्ठ सुपुत्र डॉ. सुशील त्रिवेदी, सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी हैं, जो छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम राज्य निर्वाचन आयुक्त भी रह चुके हैं।
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