छत्तीसगढ़ राज्य के विकास के लिए राजस्व जुटाने वाला प्रमुख विभाग है वाणिज्यिक कर विभाग : डॉ. रमन सिंह
मुख्यमंत्री द्वारा रायपुर में वाणिज्यिक-कर विभाग के चार नये वृत्त कार्यालयों का शुभारम्भ
विभाग का राजस्व संग्रहण 1186 करोड़ रुपए से बढ़कर 4039 करोड़ रुपए हुआ
रायपुर, 01 जुलाई 2009 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वाणिज्यिक कर विभाग की पुनर्गठन योजना के तहत आज यहां जेल रोड स्थित सांई नगर में विभाग के चार नए वृत्त कार्यालयों का शुभारम्भ किया। ये सभी कार्यालय एक ही भवन में संचालित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर वाणिज्यिक कर विभाग के राजस्व संग्रहण में वर्ष दर वर्ष हो रही उत्तरोत्तर वृध्दि की प्रशंसा करते हुए कहा कि वाणिज्यिक-कर विभाग प्रदेश के विकास के लिए ज्यादा से ज्यादा राजस्व एकत्र करने वाला एक प्रमुख विभाग है। छत्तीसगढ़ जैसे नये और तेजी से विकसित हो रहे राज्य के लिए यह विभाग और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह राज्य शासन को सर्वाधिक राजस्व देने वाले विभागों में से एक है।
वाणिज्यिक कर, राजस्व और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि वाणिज्यिक कर विभाग के काम-काज में कसावट लाने और कर दाताओं की सहूलियत के लिए प्रदेश में आज से विभाग के आठ नये वृत्त कार्यालय प्रारम्भ हो रहे हैं। इससे विभाग की कार्यकुशलता बढ़ने के साथ कर राजस्व संग्रहण की वृध्दि पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
संसदीय सचिव श्री सिध्दनाथ पैकरा, वाणिज्यिक कर विभाग के आयुक्त श्री गणेश शंकर मिश्रा, छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी और वाणिज्यिक कर अभिकरण के अध्यक्ष श्री आर.के. बेहार सहित अनेक जन-प्रतिनिधि और प्रबुध्द नागरिक इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वाणिज्यिक कर विभाग चार हजार 39 करोड़ रुपए कर राजस्व संग्रहण कर रहा है और इसका स्थापना व्यय मात्र 0.41 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 45 प्रतिशत लोग गरीबी की रेखा के नीचे रहते हैं, यहां 32 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजाति और 12 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति वर्ग की है। ऐसे में प्रदेश के दो करोड़ लोगों के सपनों को साकार करने और प्रदेश के विकास के लिए अधिक से अधिक संसाधन उपलब्घ कराने में इस विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अपनी सक्षमता, क्रियाशीलता और पारदर्शिता के साथ काम करते हुए यह विभाग भी प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
वाणिज्यक-कर मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार विभाग द्वारा सरल कर नीति अपनाई गयी और करों की दरें भी कम रखी गयी। पिछले छह वर्षों में किसी भी कर की दर में वृध्दि नहीं की गयी है, अपितु वेट प्रणाली लागू होने के पहले राज्य में कई वस्तुओं के करों की दर देश में सबसे कम रही है। उन्होंने कहा कि विभाग ने कर दाताओं के सम्मान और सुविधाओं का भी हमेशा ध्यान रखा। इसका परिणाम यह रहा की कर अपवंचना में कमी आयी और उद्योग तथा व्यापार जगत के सहयोग से कर संग्रहण में निरंतर वृध्दि हुई। राजस्व संग्रहण और प्रबंधन से जुड़े कई मामलों में छत्तीसगढ़ का स्थान देश में अग्रणी रहा है।
वाणिज्यिक-कर विभाग के आयुक्त श्री जी.एस.मिश्रा ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने जानकारी दी की वर्ष 2001-02 में जहां वाणिज्यिक-कर राजस्व संग्रहण 1186 करोड़ रूपए था, वहीं वर्ष 2008-09 में यह बढ़कर 4039 करोड रूपए हो गया है, जो राज्य के कुल बजट का 24 प्रतिशत और टैक्स बजट का 64 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि उद्योग एवं व्यापार जगत में मंदी के दौर के बावजूद वाणिज्यिक-कर विभाग ने इस वर्ष लक्ष्य से पचास करोड रूपए अधिक राजस्व का संग्रहण किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि विभाग में पंजीकृत व्यवसायिक की संख्या में वर्ष 2002 की तुलना में लगभग दो गुनी वृध्दि हुई है। इस लिए विभाग में प्रशासनिक कसावट लाने के लिए रायपुर में चार, बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग और रायगढ़ में विभाग के एक-एक वृत्त कार्यालय आज से प्रारंभ किए जा रहे हैं।
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