वन क्षेत्रों में लगाए जाएंगे वनोपजों के पौधे
अगले माह रायपुर में होगी राज्य स्तरीय कार्यशाला
रायपुर, 15 जुलाई 2009 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में 44 प्रतिशत वन क्षेत्रों को देखते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत वनवासियों की रोजी-रोटी के स्थायी साधन विकसित करने की जरूरत बताई है।
उन्होंने इसके लिए अधिकारियों को वन क्षेत्रों में बांस, इमली, हर्रा, बहेड़ा, आंवला और तेंदू जैसे उपयोगी प्रजातियों के रोपण के कार्य लेने के भी निर्देश दिए हैं और कहा है कि इसके लिए अगले माह राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित कर एक व्यापक रणनीति और कार्य योजना तैयार की जाए।
डॉ. सिंह ने आज शाम यहां मंत्रालय में राष्ट्रीय रोजगार गारंटी परिषद की बैठक में इस आशय के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में या उनके आस पास स्थित गांवों में जल संरक्षण के लिए तालाब और स्टाप डेम जैसे निर्माण कार्य भी लिए जाने चाहिए, ताकि ग्रामीणों को स्थायी परिसंपत्ति मिले और इनके माध्यम से उन्हें खेती के लिए पर्याप्त पानी दिया जा सके। इससे उन्हें कृषि आधारित रोजगार का एक बेहतर जरिया मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों को चिन्हांकित कर तटबंध निर्माण जैसे कार्य लिए जा सकते हैं। परिषद की बैठक में केन्द्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ के वर्ष 2007-08 के वार्षिक प्रतिवेदन का अनुमोदन भी किया गया, जिसे विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा।
बैठक को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने भी संबोधित किया। बैठक में लोक निर्माण मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, जल संसाधन मंत्री श्री हेमचंद यादव, कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री केदार कश्यप, वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी, राज्य योजना मंडल के उपाध्यक्ष डॉ. डी.एन.तिवारी, मुख्य सचिव श्री पी.जॉय उम्मेन, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री डी.एस.मिश्रा, आयुक्त रोजगार गांरटी श्रीमती रेणू जी पिल्ले, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री सुबोध सिंह सहित राज्य राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी परिषद के सदस्य श्री हिमाशु द्विवेदी, श्री रूद्र अवस्थी, श्रीमती धीरज नेताम, श्री योगेश चन्द्र शर्मा औ श्री अरूण चौबे भी उपस्थित थे।
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