रायपुर, 08 अक्टूबर 2009 - राज्य निर्माण की नवमी वर्षगाठ पर छत्तीसगढ़ में आगामी एक नवम्बर से शुरू हो रहे शिशु संरक्षण माह के दौरान बाल लकवा के प्रकरणों की भी खोज की जाएगी। इस संबंध में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा सभी मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों को विस्तृत निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों से कहा गया है कि वे शिशु संरक्षण माह के दौरान बच्चों और गर्भवती माताओं के नियमित टीकाकरण के साथ ही विकासखंड और सेक्टर स्तर बाल लकवा का पता लगाएं। यदि कहीं बाल लकवा के प्रकरण पाए जाते हैं, तो उसकी सूचना तत्काल स्वास्थ्य संचालनालय को दें। इसके साथ ही कृमि प्रकोप वाले बच्चों की भी पहचान करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारियों से कहा गया है कि जिन विकासखंडों और सेक्टर में बाल लकवा की जानकारी निर्धारित मापदण्डों के अनुरूप नहीं है, उन विकासखंडों और सेक्टर के स्वास्थ्य कर्मियों को चेतावनी दिया जाए। इसके साथ ही क्षेत्र में पांच वर्ष तक के नव आगन्तुक बच्चों को पोलियो ड्रॉप शिशु संरक्षण माह के दौरान पिलाया जाना सुनिश्चित करें।
मैदानी अमले को यह भी निर्देशित किया जाए कि वे क्षेत्र की जनसंख्या और प्रभावितों के आधार पर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करें, ताकि पल्स पोलियो टीकाकरण के दौरान उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जा सके। मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा गया है कि शिशु संरक्षण माह के दौरान कृमि प्रकोप वाले बच्चों को इस बीमारी के लक्षण के आधार पर पहचान करें। कृमि रोग के समय समान्यत: बच्चों में विटामिन की कमी के अलावा रक्त अल्पता, कुपोषण और मल के साथ कृमि का उत्सर्जन होता है। ऐसे लक्षण वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें अलग-अलग आयु वर्ग के लिए निर्धारित खुराक के अनुसार कृमिनाशक दवाई का वितरण सुनिश्चित करें।
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