प्रदेश होगा कुपोषण मुक्त

छत्तीसगढ़ में गंभीर कुपोषित 21 हजार बच्चों को गोद लिया गया
कुपोषण मुक्ति पर अधिकारियों की दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
जन सहयोग से प्रदेश होगा कुपोषण मुक्त : सुश्री लता उसेण्डी

रायपुर, 01 जुलाई 2009 - शून्य से पांच वर्ष तक आयु समूह के छत्तीसगढ़ में गंभीर कुपोषित बच्चों के बेहतर इलाज और देख-भाल के लिए राज्य शासन की पहल पर उन्हें गोद लेने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

लगभग एक महीने पहले विगत छह जून से शुरू हुए इस अभियान के तहत समाज-सेवी संगठनों और सेवा-भावी नागरिकों द्वारा अब तक इक्कीस हजार बच्चों को गोद लिया जा चुका है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने स्वयं ऐसे दस बच्चों को गोद लेकर समाज में एक उदाहरण पेश किया है।

यह जानकारी आज यहां महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री सुश्री लता उसेण्डी ने दी। सुश्री उसेण्डी राजधानी रायपुर के नजदीक राज्य ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्थान (निमोरा) में 'कुपोषण-मुक्ति' विषय पर आयोजित प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुभारंभ कर रही थीं। यह दो दिवसीय प्रशिक्षण महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों के लिए आयोजित किया गया है। प्रशिक्षण का शुभांरभ करते हुए विभागीय मंत्री सुश्री लता उसेण्डी ने कहा कि यद्यपि प्रदेश में कुपोषण की दर को 30 प्रतिशत तक लाना अत्यंत चुनौतिपूर्ण कार्य है, परंतु समाज के शिक्षित और जागरूक नागरिक, समाजसेवी संस्था, गैर सरकारी संगठन, पंचायती राज संस्थायें सहित जनप्रतिनिधि भी इस अभियान से जुड़े और हितग्राहियों को अधिक से अधिक संख्या में आंगनबाड़ी केन्द्रों से जोड़े तो इस लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

उन्होंने अधिकारियों को गंभीरतापूर्वक प्रशिक्षण लेकर कुपोषण से मुक्ति के लिए कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए। सुश्री उसेंडी ने कहा कि पिछली माह की छह तारीख को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अगुवाई में कुपोषण मुक्ति रैली का सफल आयोजन किया गया। जिसके तहत गंभीर कुपोषित बच्चों के बेहतर इलाज के लिए समाज सेवी संस्थाओं और नागरिकों द्वारा विगत एक माह में 21 हजार बच्चों को गोद लिया गया। इनमें से दस बच्चों को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने गोद लिया है। कुपोषण मुक्ति अभियान को कार्यरूप देने के लिए ही आज यहां प्रशिक्षिण का कार्यक्रम रखा गया है। उन्होंने प्रदेश भर से आए मास्टर ट्रेनरों को ध्यानपूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए कहा। इस प्रशिक्षण में प्रदेश के प्रत्येक परियोजना से एक अधिकारी का चयन किया गया है। दो दिनों में चार बैचों में लगभग 160 अधिकारियों को मास्टर ट्रेनरों के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में केयर संस्थान के द्वारा सहयोग किया जा रहा है। संस्था के सहयोग से ट्रेनिंग माडयूल एवं प्रशिक्षण सामग्री तैयार की गयी है। ये मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण प्राप्त कर जिला स्तर अथवा परियोजना स्तर पर गोद लेने वाले व्यक्ति को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में बताया गया कि कुपोषण वह स्थिति है, जो शरीर के लिए एक या अधिक पोषक तत्वों के न मिल पाने के कारण उत्पन्न होती है। आहार में पोषक तत्व पर्याप्त न होने या शरीर को ये पोषक तत्व न मिल पाने या बार-बार संक्रमण होने या चयापचय संबंधी अन्य कारणों से ऐसा हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि एन.एफ.एच.एस-3 के आकड़ों के अनुसार प्रदेश में 0-6 आयु समूह के 52 प्रतिशत बच्चे कुपोषित है। प्रदेश की शिशु मृत्यु दर 59 है। छत्तीसगढ़ के लिए निर्धारित दशाब्दी विकास लक्ष्य के अनुसार 11 वीं पंचवर्षीय योजना की समाप्ति तक कुपोषण की दर 30 प्रतिशत तक लाना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ही गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को गोद लेने की अवधारणा प्रारंभ की गयी है। गोद लेने वाले अभिभावकों द्वारा इन बच्चों की देखभाल, उनके स्वास्थ्य परीक्षण, उनका वजन लेने, उनके शारीरिक विकास की निगरानी, पोषण आहार उपलब्धता और उसी बच्चों हेतु पोषण आहार का उपयोग सुनिश्चित करने में परिवार के सहायक की भूमिका अदा की जाएगी। कार्यक्रम में सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग श्री एस.के. बेहार, संचालक एआरसी सुश्री अर्चना राना सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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