छत्तीसगढ़ बहुत जल्द बनेगा कुपोषण मुक्त राज्य - आंगनबाड़ी केन्द्रों में पूरक पोषण आहार कार्यक्रम
हर दिन लगभग 25 लाख हितग्राहियों को पौष्टिक आहार
इनमें 19.77 लाख बच्चे और 5.18 लाख माताएं शामिल
पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता बढ़ाने राशि भी बढ़ाई गई
छत्तीसगढ़ रायपुर, 09 जुलाई 2009 छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त राज्य के रूप में नई पहचान दिलाने के लिए राज्य शासन द्वारा प्रदेश के लगभग 34 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों में ''पूरक पोषण आहार कार्यक्रम'' चलाया जा रहा है। इसके उत्साहजनक नतीजे देखे जा रहे हैं। बच्चों में कुपोषण की दर वर्ष 1998 की 61 प्रतिशत की तुलना में घटकर अब केवल 52 प्रतिशत के आस-पास रह गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इसे आगामी वर्ष 2015 तक और भी कम करते हुए 30 प्रतिशत के आस-पास लाने का लक्ष्य घोषित किया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री लता उसेण्डी ने कहा है कि राज्य को इस लक्ष्य तक पहुंचाने में पूरक पोषण आहार कार्यक्रम की बहुत बड़ी भूमिका होगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस कार्यक्रम के तहत् आंगनबाड़ी केन्द्रों में प्रतिदिन लगभग 25 लाख हितग्राहियों को पूरक पोषण आहार दिया जा रहा है। इनमें 6 माह से 06 वर्ष के लगभग 19 लाख 77 हजार बच्चे और पांच लाख 18 हजार गर्भवती और शिशुवती माताएं शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के तहत 03 वर्ष से 06 वर्ष तक आयु समूह के बच्चों को गर्म पके हुए भोजन के रूप में चावल, सब्जी और मिश्रित दाल सहित सोयाबीन और गुड़ दिया जाता है, जबकि 06 माह से 03 वर्ष तक के बच्चों सहित गर्भवती और शिशुवती माताओं के लिए चावल, दाल, सोयाबीन और गुड़ सप्ताह में एक दिन ''टेक होम'' (घर ले जाओ) राशन पध्दति से वितरित किया जाता है। आंगनबाड़ी केन्द्रों में संचालित पूरक पोषण आहार कार्यक्रम की गुणवत्ता में और अधिक सुधार के लिये मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुरूप प्रति व्यक्ति स्वीकृत राशि में वृध्दि की गयी है। अब 06 वर्ष तक के सुपोषित बच्चों के लिए दो रूपए के स्थान पर चार रूपए और कुपोषित बच्चों के लिए दो रूपए 70 पैसे के स्थान पर छह रूपये का पौष्टिक आहार तथा गर्भवती और शिशुवती माताओं के लिए दो रूपए 30 पैसे के स्थान पर पांच रूपये प्रति हितग्राही प्रतिदिन के मान से पोषण आहार देने की व्यवस्था की गयी है। पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के सुचारू रूप से संचालन के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों को चालू वित्तीय वर्ष 2009-10 में 123 करोड़ 45 लाख रूपए का आवंटन जारी किया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के तहत सर्वाधिक हितग्राही सरगुजा जिले में लाभान्वित हो रहे हैं। सरगुजा जिले के चार हजार 325 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 6 माह से 6 वर्ष तक आयु समूह के 2,58,352 बच्चों तथा 79865 गर्भवती और शिशुवती माताओं को पूरक पोषण आहार दिया जा रहा है। रायपुर जिले के 3640 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 265380 बच्चों समेत और 68816 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं इस कार्यक्रम का लाभ उठा रही हैं। बिलासपुर जिले के 2825 आंगनबाड़ी केन्द्रों मे 229871 बच्चों और 64470 गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को पूरक पोषण आहार दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम के हितग्राहियों में दुर्ग जिले के 2919 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 176137 बच्चे और 42858 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं, राजनांदगांव जिले के 1707 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 120657 बच्चे और 27239 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं, बस्तर जिले के 2652 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 119856 बच्चे और 27752 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं, रायगढ़ जिले के 2122 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 105761 बच्चे और 30238 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं, जांजगीर-चांपा जिले के 1489 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 98254 बच्चे और 23521 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं, कोरबा जिले के 1661 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 94695 बच्चे और 21937 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं शामिल हैं। इसी कड़ी में महासमुन्द जिले के 1455 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 87802 बच्चों और 20425 गर्भवती और शिशुवती माताओं को पौष्टिक आहार दिया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि जशपुर जिले के 1945 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 78438 बच्चे और 18781 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं, दक्षिण बस्तर (दन्तेवाड़ा) जिले के 1136 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 65579 बच्चे और 25788 शिशुवती एवं गर्भवती माताएं, कबीरधाम (कवर्धा) जिले के 1243 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 69407 बच्चे और 18725 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं, उत्तर बस्तर (कांकेर) जिले के 1416 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 62790 बच्चे और 14261 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं इस कार्यक्रम के हितग्राहियों में शामिल हैं। पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के तहत धमतरी जिले के 894 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 55204 बच्चों और 13581 गर्भवती और शिशुवती माताओं को प्रतिदिन पौष्टिक आहार मिल रहा है। कोरिया जिले के 1193 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 52232 बच्चे और 12271 शिशुवती एवं गर्भवती माताएं, बीजापुर जिले के 564 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 26080 बच्चे और 6146 शिशुवती एवं गर्भवती माताएं तथा नारायणपुर जिले के 284 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 10423 बच्चे और 1921 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं शासन की इस महत्वपूर्ण योजना के हितग्राहियों में शामिल हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि कुपोषण मुक्ति और नशामुक्ति के लिए प्रतिबध्द छत्ताीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की संयुक्त भागीदारी से पिछले माह की छह तारीख को प्रदेश भर में विशाल जन-जागरण रैलियों का आयोजन किया था। मुख्यमंत्री के आव्हान पर अब तक राज्य के 21 हजार गंभीर कुपोषित बच्चों को जागरूक नागरिकों और समाजसेवी संस्थाओं द्वारा गोद लेकर उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जिम्मेदारी ली गई है। इनमें से 10 बच्चों को स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने गोद लिया है। राज्य सरकार द्वारा इस अवसर पर प्रदेश के गंभीर कुपोषित बच्चों के बेहतर और नि:शुल्क इलाज के लिए 'मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना' की भी शुरूआत की गई। इस योजना के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों द्वारा गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को निकटवर्ती स्वास्थ्य केन्द्र भेजे जाने पर नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण करने तथा अस्पतालों की अनुशंसा पर उन्हें निजी अस्पतालों में भी जांच और इलाज के लिए भेजा जा सकेगा। ऐसे बच्चों के लिए जरूरत पड़ने पर बाजार से दवा खरीदकर भी उपलब्ध कराई जाएगी।
Comments
Post new comment