छत्तीसगढ़ विधानसभा
पावस सत्र के प्रथम दिवस पर दिवंगतों को दी गयी विनम्र श्रध्दांजलि
रायपुर, 20 जुलाई 2009 - छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के प्रथम दिवस पर आज सदन में विगत कुछ महीनों पहले दिवंगत हुए पूर्व विधायकों-श्रीमती कलावती मेहता, श्री मदन गोपाल सिंह, श्री बलबीर खनूजा, श्री रामलाल चन्द्राकर और श्री याकूब राजवानी सहित राज्य और देश के प्रसिध्द नाटय निदेशक श्री हबीब तनवीर को भी विनम्र श्रध्दांजलि अर्पित की गयी।
सदन में राजनांदगांव के पुलिस अधीक्षक श्री विनोद कुमार चौबे समेत राज्य पुलिस के उन जांबाज शहीदों को भी याद किया गया, जिन्होंने विगत 12 जुलाई को जिले के कोरकोट्टी (मदनबाड़ा) के जंगलों में हिंसक नक्सलियों का मुकाबला करते हुए जनता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
सदन की कार्रवाई शुरू होते ही अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने निधन उल्लेख करते हुए सभी दिवंगत पूर्व विधायकों सहित रंगकर्मी स्वर्गीय श्री हबीब तनवीर का जीवन परिचय प्रस्तुत किया और 12 जुलाई की नक्सल हिंसा का सामना करते हुए शहीद पुलिस अधीक्षक और जवानों की शहादत का उल्लेख किया। अध्यक्ष ने शोक प्रस्ताव रखा, जिस पर सभी सदस्यों ने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगतों को श्रध्दांजलि दी।
मुख्यमंत्री और सदन के नेता डॉ. रमन सिंह, नेताप्रतिपक्ष श्री रविन्द्र चौबे और सदस्य श्री दूजराम बौध्द ने दिवंगतों के प्रति अपने शोकोद्गार व्यक्त किए। डॉ. रमन सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वर्गीय श्रीमती कलावती मेहता अविभाजित मध्यप्रदेश की विधानसभा में वर्ष 1985 में छत्तीसगढ़ भाटापारा से विधायक थीं। उनके पति स्वर्गीय श्री शिवलाल मेहता भी विधानसभा के सदस्य रह चुके थे। श्रीमती मेहता अत्यंत सहज-सरल स्वभाव की महिला थीं, जिन्होंने समाज सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य माना। उनके निधन से हम सबने छत्तीसगढ़ की पुरानी पीढ़ी की एक ऐसी अनुभवी नेता को खो दिया है, जिनके पास स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा का एक लम्बा अनुभव था।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सरगुजा जिले के अम्बिकापुर क्षेत्र के पूर्व विधायक स्वर्गीय श्री मदन गोपाल सिंह सरल स्वभाव के कर्मठ आदिवासी नेता थे। 27 वर्षों के शिक्षकीय जीवन के बाद तत्कालीन मध्यप्रदेश और वर्तमान छत्तीसगढ़ विधानसभा को मिलाकर श्री सिंह लगातार पांच बार विधायक निर्वाचित हुए। यह उनकी कर्मठता और लोकप्रियता का एक बड़ा उदाहरण है। अध्यक्ष महोदय, वर्ष 1990 से 1992 और 1993 से 1998 तक जब कवर्धा की जनता ने मुझे मध्यप्रदेश की विधानसभा में भेजा, तो वहां सदन में मुझे स्वर्गीय श्री मदन गोपाल सिंह के साथ भी बैठने, काम करने और उनके व्यक्तित्व और विचारों से परिचित होने का मौका मिला। सरगुजा अंचल के सहज-सरल आदिवासी किसानों और मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए वे हमेशा चिंतित और सक्रिय रहा करते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री बलबीर खनूजा ने जनता से जुड़कर हमेशा सिध्दांतों की राजनीति की। वे वर्ष 1985 में मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। मुझे भी आज जनता ने उस क्षेत्र से अपना प्रतिनिधि बनाकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्य की सेवा करने का अवसर दिया है। स्वर्गीय श्री खनूजा के साथ मेरे वर्षों पुराने संबंध थे। मैंने उन्हें हमेशा स्थानीय जनता के लिए काम करने वाले एक समाज सेवक के रूप में देखा। श्री खनूजा उच्च शिक्षित अग्रणी श्रमिक नेता थे। उन्होंने राजनांदगांव के तत्कालीन बी.एन.सी. कपड़ा मिल मजदूरों को संगठित कर उनके अधिकारों के लिए रचनात्मक संघर्ष किया। राजनांदगांव के विधायक के रूप में स्वर्गीय श्री खनूजा वहां के प्रत्येक नागरिक के सुख-दुख में उनके साथ रहा करते थे। खेलकूद, पत्रकारिता और साहित्यिक गतिविधियों में भी उन्हें काफी दिलचस्पी थी। श्री खनूजा के निधन से राजनांदगांव के लोगों ने अपने एक शुभचिंतक और समाज सेवक को खो दिया है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि स्वर्गीय श्री रामलाल चन्द्राकर छत्तीसगढ़ की पुरानी पीढ़ी के अत्यंत सम्मानित नेताओं में से थे। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया और 1975 में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए भी वे जेल में रहे। उन्होंने आजीवन छत्तीसगढ़ के किसानों और मजदूरों की भलाई के लिए हर प्रकार के जन आंदोलन में हिस्सा लिया। सहकारिता आंदोलन के माध्यम से उन्होंने किसानों की बेहतरी के लिए काम किया। वर्ष 1977 में मंदिर हसौद से विधायक निर्वाचित हो कर वे तत्कालीन मध्यप्रदेश विधानसभा में पहुंचे, जहां उन्होंने छत्तीसगढ़ के किसानों की आवाज बुलंद की और सखलेचा जी के मंत्री मंडल में सहकारिता राज्य मंत्री रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय श्री याकूब रजवानी ने 1977 में महासमुंद से विधायक निर्वाचित होकर मध्यप्रदेश विधानसभा में अपने निर्वाचन के साथ समूचे छत्तीसगढ़ की भलाई के लिए काम किया। समाज में व्याप्त भेद-भाव, जात-पात जैसी कुरीतियों के खिलाफ जन-जागरण करते हुए उन्होंने आजीवन सामाजिक समरसता के लिए काम किया। स्वर्गीय श्री याकूब रजवानी ने भी आपात काल के दौरान 1975 में जेल की यातना सही। वर्ष 1977 में विधायक निर्वाचित होने के बाद उन्हें 1978 में मध्यप्रदेश में श्री वीरेन्द्र कुमार सखलेचा के मंत्री मंडल में लिया गया, जहां उन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता का भी परिचय दिया।
डॉ. रमन सिंह ने पद्म विभूषण और पद्मश्री अलंकरण तथा संगीत नाटक अकादमी के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय श्री हबीब तनवीर को श्रध्दांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे छत्तीसगढ़ महतारी के एक ऐसे सपूत थे, जो देश में रंगमंच की दुनिया में अपने जीवन काल में ही एक प्रेरणादायक व्यक्ति बन गए थे। स्वर्गीय श्री तनवीर जी ने 'चरणदास चोर' और 'बहादुर कलारिन' जैसे लोकप्रिय नाटकों के माध्यम से छत्तीसगढ़ के आम आदमी की भावनाओं को अपनी आवाज दी। समाज की नब्ज पर उनकी अच्छी पकड़ थी। उनके नाटक 'चरणदास चोर' को आज से 27 वर्ष पहले 1982 में एडिनबर्ग के अन्तर्राष्ट्रीय नाटय महोत्सव में भी अपार लोकप्रियता मिली और इस नाटक को वहां पुरस्कृत भी किया गया। उन्होंने 'फुटपाथ' और 'गांधी' जैसी फिल्मों में भी अपनी अद्भूत प्रतिभा का परिचय दिया। अध्यक्ष जी, स्वर्गीय श्री हबीब तनवीर ने छत्तीसगढ़ के दूर-दराज गांवों में रहने वाले गुमनाम कलाकारों को अपने नाटकों के माध्यम से शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचाया। उनके निधन से मैं तो कहूंगा कि छत्तीसगढ़ी और हिन्दी रंगमंच के एक सुनहरे अध्याय का अंत हो गया है।
मुख्यमंत्री ने राजनांदगांव जिले के ग्राम कोरकोट्टी के पास मदनवाड़ा के जंगलों में विगत 12 जुलाई को पुलिस अधीक्षक श्री विनोद चौबे और उनके सहयोगी बहादुर पुलिस जवानों की शहादत का उल्लेख करते हुए सदन में कहा कि इन शहीदों ने नक्सलियों का मुकाबला करते हुए छत्तीसगढ़ की आम जनता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है। हम सब उनकी इस वीरता और शहादत को हृदय की गहराईयों से प्रणाम करते हैं। स्वर्गीय श्री विनोद चौबे अत्यंत कर्मठ, अनुभवी और मेहनती अधिकारी थे। वे छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए एक निधि की तरह थे। उनके नेतृत्व में हमारे वीर जवानों ने नक्सलियों के खिलाफ जारी संघर्ष में अदम्य साहस का परिचय दिया। स्वर्गीय श्री विनोद चौबे इस संघर्ष में अपने पुलिस जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए जीवन के अंतिम क्षण तक उनके साथ रहे।
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