परिणाम मूलक वन कार्य योजना

वन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
छत्‍तीसगढ़ रायपुर, 10 जुलाई 2009 - छत्‍तीसगढ़ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वनों के विकास और संरक्षण के लिए वन विभाग को अपनी विभागीय कार्य-योजना को और भी ज्यादा परिणाम-मूलक बनाने के निर्देश दिए है। डॉ. सिंह ने विभाग के अधिकारियों से कहा है कि वन प्रबंधन समितियों के खाते की राशि से समितियों द्वारा सुझाए गए रोजगार मूलक कार्यों को प्राथमिकता से संचालित किया जाए।

डॉ. सिंह ने कहा कि छत्‍तीसगढ़ वन से अधिक रोजगार देने वाली जैसे बांस, महुआ, आंवला आदि स्थानीय प्रजातियों के संवर्धन को बढ़ावा दिया जाए। इन प्रजातियों से वनवासियों का गहरा संबंध रहा है। उन्होंने अनुसंधान और विकास के लिए प्रदेश में तीन टिशू कल्चर प्रयोगशाला खोलने के निर्देश दिए। डॉ. सिंह ने उक्त निर्देश आज यहां मंत्रालय में छत्‍तीसगढ़ वन विभाग की गतिविधियों की समीक्षा के दौरान दिए।

बैठक में छत्‍तीसगढ़ वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी, मुख्य सचिव श्री पी.जॉय उम्मेन, अपर मुख्य सचिव वन श्री सरजियस मिंज सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनों के समुचित प्रबंधन और संरक्षण के साथ-साथ वन्य प्राणियों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। वन क्षेत्रों में छोटे-छोटे गङ्ढे आदि बनाकर और वन ग्रामों में तालाब खोदकर जल संरक्षण के कार्य के साथ-साथ वन्य प्राणियों को भी पीने का पानी मिल जाएगा और वे अवैध शिकार से भी बचेंगे। उन्होंने सभी वन क्षेत्रों में आदर्श नर्सरी स्थापित करने के निर्देश दिए। डॉ. सिंह ने वन क्षेत्रों में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अधिक से अधिक कार्य कराने के निर्देश दिए। अभी तक वन विभाग द्वारा 409 करोड़ से अधिक के नौ हजार 918 कार्य स्वीकृत कराए गए हैं, जिनसे 2 करोड़ 75 लाख रोजगार मानव दिवस निर्मित हुआ है। मुख्यमंत्री ने हरियाली विहीन पहाड़ियों में हरियाली लाने के लिए योजनाबध्द तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य की 7887 वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से वनोपज का संग्रहण किया जाता है। इससे प्राप्त राशि का 15 प्रतिशत लाभांश के रूप में समितियों को दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने इस राशि से रोजगार मूलक कार्य जैसे लाख उत्पादन, मधुमक्खी पालन आदि कार्य कराने के निर्देश दिए। इन समितियों के पास वर्तमान में 36 करोड़ राशि शेष है। अधिकारियाें ने बताया कि अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के तहत वन भूमि क्षेत्र से 1.17 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। जिनमें से लगभग 65 हजार वनवासियों को वन अधिकार मान्यता प्रमाण पत्र दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने वैकल्पिक वृक्षारोपण मद (ब्।डच्।) के तहत राज्य स्तरीय शासी निकाय का गठन भारत सरकार के निर्देशाें के अनुसार तुरंत किए जाने के निर्देश दिए। इस राशि के उपयोग के लिए राज्य शासन द्वारा भारत शासन को 884 करोड़ का प्रस्ताव जमा किया गया है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री आर.के.शर्मा ने बैठक में बताया कि प्रदेश में प्रति वर्ष लगभग एक करोड़ पांच लाख बांस का उत्पादन होता है। इस उत्पाद के विक्रय से राज्य को पिछले वर्ष 311 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति वर्ष लगभग 55 लाख बांस रियायती दरों पर बसोड़ों को और निस्तारी के लिए दिए गए। उन्होंने बताया कि पिछले चार सालों में गैर वन क्षेत्रों में किसानों को नीलगिरी, करंज, नीम और ऑवला के 52 लाख पौधे दिए गए हैं। अन्य योजना में भू-स्वामियों को एक हजार पौधे की सीमा तक एक रूपए प्रति पौधा की रियायती दर पर पिछले चार सालों में 99 लाख पौधे दिए जा चुके हैं। गत दो वर्षों में विभागीय मद से कुल सौ किलोमीटर पथ वृक्षारोपण का कार्य किया गया। राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत गत दो सालों में 817 किलोमीटर पथ वृक्षारोपण किया गया।

राज्य के 425 वन ग्रामों में 80 लाख 20 हजार खर्च कर अनेक विकास कार्य किए गए, जिसमें पहुंच मार्ग का निर्माण, पूल-पुलिया का निर्माण, स्टाप डेम, हैंड पम्प आदि कार्य किए गए। वर्ष 2006-07 से प्रारंभ बांस मिशन के तहत राज्य में 55 बांस आधारित प्रसंस्करण केन्द्र खोले गए हैं। 2008-09 में ढाई हजार हेक्टेयर में बांस रोपण किया गया। उन्हाेंने बताया कि विभाग में कम्प्यूटर नेटवर्किंग सुविधा तथा इन्ट्रानेट की सुविधा उपलब्ध है। जी.आई.एस. और रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग कर वन क्षेत्राें का मानचित्र बनाया जा रहा है। प्रदेश के वन क्षेत्रों में आग लगने की घटना के रोक थाम के लिए फायर अलर्ट सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत किसी भी जंगल में आग लगने पर संबंधित वन मंडल में सूचना प्राप्त हो जाती है। राज्य के जगदलपुर, सक्ती और महासमुंद में वन विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। जहां वन रक्षकों, वन पालों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लाख उत्पादन में छत्तीसगढ़ राज्य देश में प्रथम स्थान पर है। संयुक्त वन प्रबंधन समितियों द्वारा स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 187 प्रसंस्करण लघु वनोपज इकाईयां खोली गई हैं।

बैठक में वन्य प्राणियों के संरक्षण, लघु वनोपज संघ और वन विकास निगम के कार्यों की भी समीक्षा की गई। बैठक में सचिव मुख्यमंत्री श्री के. सुब्रमण्यम, सचिव वन श्री कौशलेन्द्र सिंह, विशेष सचिव मुख्यमंत्री श्री अमन सिंह, संयुक्त सचिव मुख्यमंत्री श्री सुबोध सिंह तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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