रायपुर, 17 जुलाई 2009 - खरीफ मौसम में छत्तीसगढ़ के किसानों को खेती से संबंधित सलाह देने के लिए दूरदर्शन और आकाशवाणी केन्द्र से कृषि, उद्यान, पशुपालन, मछली पालन और सामाजिक वानिकी से संबंधित जानकारियों का प्रसारण किया जाएगा। राज्यस्तरीय मास मीडिया समिति की यहां आयोजित बैठक में प्रचार-प्रसार के विषयों का चयन भी कर लिया गया है। दूरदर्शन और आकाशवाणी से उर्वरक की उपलब्धता एवं प्रमाणित बीज का कृषि उत्पादन में महत्व विषय को प्राथमिकता से प्रसारित किया जाएगा। साथ ही धान की रोपाई की उन्नत तकनीकों मेडागास्कर और श्री विधि की जानकारी भी प्रसारण के माध्यम से किसानों को दी जाएगी।
राज्य शासन द्वारा इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को आकाशवाणी और दूरदर्शन के अधिकारियों से विचार-विमर्श कर पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से इन कार्यक्रमों के प्रति कृषकों से प्राप्त फीड बेक एकत्र करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभागीय अधिकारियों को कृषकों के द्वारा दिए गए सुझावों से कार्यक्रमों के प्रति उनकी रूचि तथा अच्छे लगने वाले कार्यक्रमों की जानकारी भी इकट्ठी करने के निर्देश दिए गए हैं।
दूरदर्शन एवं आकाशवाणी से उसमें उच्चहन भूमि में धान के स्थान पर दलहन तिलहन या मक्के की खेती को ज्यादा लाभ दायक बनाने के विषयों को प्रसारण में प्राथमिकता दी जाएगी। अंतरवतीय फसलों का चयन एवं महत्व, धान उत्पादन में उन्नत किसमों के प्रमाणित बीजों का उपयोग, बीजोपचार की विधियां तथा 17 प्रतिशत नमक घोल से धान बीज का चुनाव, निंदा नियंत्रण कब, क्यों और कैसे किया जाए, संतुलित एवं सूक्ष्म तत्व का उपयोग एवं सावधानियां, हरी खाद से लाभ, धान की नर्सरी में पौध संरक्षण एवं रोपाई में ध्यान देने योग्य बाते किसान आकाशवाणी और दूरदर्शन से जान सकेंगें। किसानों को दलहन तिलहन बोनी का उचित समय, धान खेत के मेड़ों पर दलहन-तिलहन एवं सब्जी की खेती, राष्ट्रीय कृषि विकास एवं खाद्यान्न सुरक्षा मिशन योजना की जानकारी, उन्नत कृषि यंत्रों एवं पौध संरक्षण यंत्र का महत्व एवं उनका रख-रखाव और अवर्षा अतिवर्षा की स्थिति में वैकल्पिक कार्य योजना की जानकारी भी दी जाएगी। आकाशवाणी और दूरदर्शन से उद्यान विभाग के संबंध में नई फल पौध रोपण कार्य, फलोद्यान में जन निकास व्यवस्था, केला का पौधे रोपण एवं पुराने पौधो में डिसकरिंग करना, वर्षा कालीन सब्जियाें को रोपाई कार्य, कंदीय फसलों का कंदरोपण, औषधीन एवं सुगधित फसलों का रोपण गेंदा एवं अन्य पुष्पीय पौधों का रोपण के बारे में जानकारी का प्रसारण किया जाएगा। पशुपालन के बारे में दुधारू पशुओं में संक्रामक बिमारियों एवं बचाव, पशुओं में कोलरूद्रम किडिंग का महत्व, मादा पशुओं में प्रजनन की समस्याएं एवं उसका निदान और अधिक दूध देने वाली गाय का पोषण प्रबंधन की जानकारी दी जायेगी।
इसके अतिरिक्त मछली पालन के लिए तालाब की व्यवस्था, मछली बीज उत्पादन के बारे में बताया जाएगा। मौसम संबंधी तात्कालिक जानकारी हो या फसलों के बीज की जानकारी से लेकर कीट-व्याधि के प्रकोप व रोकथाम की जानकारी सभी कुछ इन केन्द्रों द्वारा तैयार किए गए कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाएगा। अब इन केन्द्रों से कृषि विभाग द्वारा कृषि, के साथ-साथ को-ऑपरेटिव एक्ट की प्रमुख बातों को भी इन कार्यक्रमों में शामिल कर राज्य में सहकारिता विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
Comments
Post new comment